
बिहार की राजनीति में इन दिनों नए चेहरे और राजनीतिक उत्तराधिकार को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री Nitish Kumar के बेटे Nishant Kumar जल्द ही विधान परिषद के रास्ते सक्रिय राजनीति में औपचारिक एंट्री कर सकते हैं। खबर है कि राज्य में खाली होने वाली एमएलसी सीटों पर उन्हें उम्मीदवार बनाया जा सकता है। हाल ही में हुए कैबिनेट विस्तार में उन्हें मंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन फिलहाल वे विधानसभा या विधान परिषद—किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। ऐसे में अब विधान परिषद चुनाव के जरिए उनकी विधायी पारी शुरू कराने की तैयारी मानी जा रही है।
सिर्फ निशांत कुमार ही नहीं, बल्कि Upendra Kushwaha के बेटे Deepak Prakash का नाम भी विधान परिषद चुनाव को लेकर चर्चा में बना हुआ है। राजनीतिक गलियारों में अटकलें हैं कि उन्हें भी एमएलसी चुनाव के मैदान में उतारा जा सकता है। हालांकि अब तक किसी भी दल की ओर से उम्मीदवारों के नामों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन संभावित नामों को लेकर सियासी हलचल लगातार बढ़ती जा रही है।
मई के आखिर तक हो सकती है चुनावी घोषणा
सूत्रों के अनुसार जून महीने में बिहार विधान परिषद की कुल 10 सीटें खाली होने जा रही हैं। इनमें से नौ सदस्यों का कार्यकाल 28 जून को समाप्त हो रहा है, जबकि एक सीट पहले से खाली पड़ी है, जो Nitish Kumar के राज्यसभा जाने के बाद रिक्त हुई थी। ऐसे में इन सीटों पर चुनाव होना लगभग तय माना जा रहा है। माना जा रहा है कि चुनाव आयोग मई के अंतिम सप्ताह तक एमएलसी चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है।
मंत्री बने रहने के लिए जरूरी है सदन की सदस्यता
गौरतलब है कि Nishant Kumar और Deepak Prakash दोनों ही फिलहाल विधानमंडल के किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। संवैधानिक नियमों के तहत मंत्री बनने के बाद छह महीने के भीतर विधायक या विधान पार्षद चुना जाना जरूरी होता है, अन्यथा मंत्री पद स्वतः समाप्त हो सकता है। इसी वजह से दोनों नेताओं को विधान परिषद चुनाव के जरिए सदन तक पहुंचाने की रणनीति बनाई जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम केवल संवैधानिक आवश्यकता नहीं, बल्कि भविष्य की राजनीति को ध्यान में रखकर भी देखा जा रहा है। खासतौर पर Nitish Kumar लंबे समय से सीधे विधानसभा चुनाव लड़ने से दूरी बनाए हुए थे और विधान परिषद के रास्ते ही मुख्यमंत्री पद तक पहुंचते रहे। अब माना जा रहा है कि उनके बेटे की राजनीतिक शुरुआत भी उसी मॉडल पर आगे बढ़ सकती है।
डिप्टी सीएम बनने से किया था इनकार
बताया जा रहा है कि Nitish Kumar के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद पार्टी के भीतर इस बात को लेकर चर्चा थी कि Nishant Kumar को उपमुख्यमंत्री बनाया जाए। हालांकि उन्होंने उस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था। पार्टी में सक्रिय भूमिका निभाने के बावजूद उन्होंने डिप्टी सीएम का पद लेने से स्पष्ट रूप से दूरी बनाई रखी।
सूत्रों के मुताबिक पिछले महीने जब Samrat Choudhary ने मुख्यमंत्री पद संभाला था, उस समय भी निशांत कुमार को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा थी, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया। बाद में पार्टी नेतृत्व और वरिष्ठ नेताओं के लगातार आग्रह के बाद उन्होंने मंत्री पद की जिम्मेदारी स्वीकार की। जदयू के भीतर यह चिंता भी जताई जा रही थी कि Nitish Kumar के सक्रिय नेतृत्व से पीछे हटने के बाद पार्टी की राजनीतिक पकड़ कमजोर पड़ सकती है। ऐसे में निशांत कुमार की एंट्री को संगठन के भविष्य और नेतृत्व की नई दिशा के रूप में भी देखा जा रहा है।














