
बिहार की चुनावी राजनीति में जबरदस्त हलचल चल रही है, उसी बीच पूर्णिया के सांसद और कांग्रेस नेता पप्पू यादव के एक बयान ने नया विवाद जन्म दे दिया है। पप्पू यादव ने हाल ही में एक साक्षात्कार में निर्दलीय सांसद बनने की कठिनाइयों का हवाला देते हुए कहा, “निर्दलीय सांसद बन जाना भगवान के बाप की औकात नहीं।”
सांसद के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई और जनसुराज पार्टी ने इसका कड़ा विरोध किया। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने पप्पू यादव की भाषा को लोकतंत्र के लिए अनुचित और अहंकारपूर्ण बताया।
मनोज भारती ने अपने बयान में कहा कि, “चाहे जीत किसी भी प्रकार की हो – निर्दलीय हो या किसी दल की – लोकतंत्र में असली ताकत जनता के हाथ में होती है। लेकिन ‘भगवान के बाप की औकात नहीं’ जैसी भाषा लोकतंत्र का अपमान है और केवल अहंकार की झलक दिखाती है। जो नेता जनता की कृपा को अपना चमत्कार समझ लेते हैं, वे भूल जाते हैं कि कुर्सी अस्थायी है, लेकिन शब्दों की मर्यादा हमेशा याद रखी जाती है।”
उन्होंने आगे कहा कि पप्पू यादव का यह व्यवहार अब आम हो गया है और अक्सर ऐसे विवादित बयान उनके व्यक्तित्व का हिस्सा बनते जा रहे हैं। मनोज भारती का यह भी कहना था कि राजनीतिक नेतृत्व में शब्दों की मर्यादा और जनता के प्रति सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए, और इसे नजरअंदाज करना लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में पप्पू यादव के खिलाफ तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं और विपक्षी दल इस मुद्दे का चुनावी लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं। जनता और राजनीतिक विशेषज्ञ इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि नेता अपनी भाषा में संयम रखें, क्योंकि शब्द कभी वापस नहीं आते और उनका प्रभाव लंबे समय तक रहता है।














