
बिहार विधानसभा चुनावों की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है और चुनाव आयोग ने अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इसी सिलसिले में राजधानी पटना के ताज होटल में शनिवार को एक अहम बैठक आयोजित की गई। इस मीटिंग में सभी बड़े राजनीतिक दलों ने हिस्सा लिया और अपने-अपने सुझाव चुनाव आयोग के सामने रखे। बैठक की अध्यक्षता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने की।
बीजेपी का पक्ष: मतदाताओं और उम्मीदवारों की सुविधा पर जोर
बैठक के दौरान बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने आयोग से आग्रह किया कि इस बार विधानसभा चुनाव को केवल दो चरणों में पूरा कराया जाए। उनका कहना था कि अधिक चरणों में चुनाव होने से न सिर्फ मतदाताओं को असुविधा होती है, बल्कि उम्मीदवारों पर खर्च का बोझ भी बढ़ जाता है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि चुनाव की तारीखें अधिसूचना जारी होने के 28 दिन बाद घोषित की जाएं, ताकि सभी दलों को पर्याप्त तैयारी का समय मिल सके।
सुरक्षा और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान
बीजेपी ने अपनी बात रखते हुए यह भी कहा कि अति पिछड़े समाज वाले क्षेत्रों और संवेदनशील गांवों में अर्धसैनिक बलों की तैनाती सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी मांग रखी कि वोटर स्लिप समय पर हर मतदाता तक पहुंचनी चाहिए, ताकि मतदान प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और किसी को वोट डालने में बाधा न आए।
सभी दलों ने रखा अपना पक्ष
इस अहम बैठक में केवल बीजेपी ही नहीं, बल्कि कांग्रेस, आरजेडी, जेडीयू और बीएसपी समेत सभी प्रमुख दलों के प्रतिनिधि मौजूद थे। जेडीयू की ओर से कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, कांग्रेस से प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और शकील अहमद खान, आरजेडी से सांसद अभय कुशवाहा और प्रवक्ता चितरंजन गगन, वहीं बीएसपी से शंकर महतो शामिल हुए। सभी दलों ने आयोग के सामने अपनी प्राथमिकताएँ और सुझाव रखे।
पिछली बार कितने चरणों में हुए थे चुनाव?
बिहार में इससे पहले हुए विधानसभा चुनावों पर नज़र डालें तो 2020 में तीन चरणों में मतदान हुआ था, जबकि 2015 में चुनाव आयोग ने पांच चरणों में वोटिंग कराई थी। इस बार आयोग कितने चरणों में चुनाव कराएगा, इस पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। हालांकि बैठक के बाद यह अटकलें तेज हो गई हैं कि चुनाव आयोग अगले एक सप्ताह के भीतर आधिकारिक तारीखों का ऐलान कर सकता है।














