
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के ताज़ा नतीजों ने जन सुराज पार्टी के लिए बेहद निराशाजनक तस्वीर पेश की है। पहली बार चुनावी अखाड़े में उतरने वाली प्रशांत किशोर की यह पार्टी मतदाताओं के बीच उम्मीद के अनुरूप प्रभाव नहीं बना सकी। भारत निर्वाचन आयोग के रुझानों ने साफ कर दिया है कि 243 विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी की स्थिति कमजोर से बेहद कमजोर बनी हुई है।
पार्टी किसी भी सीट पर दूसरे स्थान तक नहीं पहुंच सकी। यानी एक भी सीट ऐसी नहीं रही जहां जन सुराज ने मुख्य मुकाबले में जगह बनाई हो। यही नहीं, लगभग 122 सीटों पर पार्टी की स्थिति तीसरे स्थान से भी नीचे रही। जबकि 116 सीटों पर जन सुराज तीसरे नंबर पर दिखाई दे रही है, जो पार्टी के लिए बड़ी चिंता का विषय है।
किन सीटों पर तीसरे स्थान पर रही जन सुराज?
तीसरे नंबर पर रहने वाले क्षेत्रों की लंबी सूची सामने आई है। इनमें रामनगर, बगहा, लौरिया, नौतन, चनपटिया, रक्सौल, हरसिद्धि, कल्याणपुर, पिपरा, मधुबन, मोतिहारी, ढाका, बथनाहा, राजनगर, झंझारपुर, बनमनखी, पूर्णिया, कोढ़ा, सहरसा, दरभंगा, हायाघाट, मुजफ्फरपुर, बरुराज, साहेबगंज, बैकुंठपुर, गोऱियाकोठी, बनियापुर, तरैया, सोनपुर, हाजीपुर, राघोपुर, पातेपुर, रोसड़ा, तेघड़ा, बिहपुर, पीरपैंती, भागलपुर, बांका, तारापुर, लखीसराय और दीघा शामिल हैं।
इसके अलावा कई शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों जैसे बांकीपुर, कुम्हरार, पटना साहिब, आरा, अगिआंव, तरारी, शाहपुर, गया टाउन, जमुई, नरकटियागंज, केसरिया, सिरसंड, रुन्नीसैदपुर, बाबूबरही, फुलपरास, निर्मली, सोनबरसा, कुशेश्वरस्थान, गैघाट, मीना पुर, कांटी, सकरा, भोरे, हथुआ, जिरादेई, एकमा, कल्याणपुर, वारिसनगर, सरायरंजन, हसनपुर, अमरपुर, ढोरैया, बेलहर, शेखपुरा, अस्थावन, राजगीर, इस्लामपुर, हिलसा, नालंदा, हरनौत, मोकामा, फुलवारी, मसौढ़ी, जगदीशपुर, कूर्था, नवादा, झाझा, रणिगंज, बरहरिया, परसा, उजियारपुर, मटिहानी, फतुहा, मनेर, सन्देश, जहानाबाद, मखदुमपुर, सुगौली, गोविंदगंज, बेलसंड, बोचहां, दरौली, बखरी, परबत्ता, बख्तियारपुर, शेरघाटी, जोकिहाट, कुटुंबा, इमामगंज, बाराचट्टी, अत्री, सिकंदरा, बाजपट्टी और बेगूसराय भी शामिल हैं।
पहला चुनाव, लेकिन प्रदर्शन बेहद खराब
जन सुराज की शुरुआत बड़े वादों और ज़ोरदार अभियानों के साथ हुई थी, लेकिन मतदाताओं ने पार्टी को इस बार मौका देने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी ने मुद्दों पर बात तो की, लेकिन संगठनात्मक मजबूती और क्षमताओं की कमी चुनावी जमीन पर साफ दिखाई दी।
प्रशांत किशोर, जो अपनी रणनीति और चुनाव प्रबंधन के लिए देशभर में जाने जाते हैं, इस बार अपनी ही बनाई पार्टी को मजबूती से खड़ा करने में सफल नहीं हो सके। जिस "परिवर्तन" की बात जन सुराज कर रही थी, वह मतपेटियों में कहीं नजर नहीं आया।
अगला कदम क्या?
लगातार मिल रहे निराशाजनक आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि पार्टी को अपनी रणनीति, संगठन और जमीनी पकड़ पर व्यापक पुनर्मूल्यांकन करने की ज़रूरत है। यह देखना दिलचस्प होगा कि परिणामों के बाद प्रशांत किशोर और उनकी टीम जन सुराज की दिशा और भविष्य को लेकर क्या निर्णय लेते हैं।














