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असम विधानसभा में पेश हुआ UCC बिल, हिमंत सरमा सरकार का बड़ा फैसला; आदिवासी समुदाय को दी गई बड़ी राहत

असम विधानसभा में UCC बिल पेश होने के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। हिमंत सरमा सरकार के इस बड़े फैसले में आदिवासी समुदाय को कानून के दायरे से बाहर रखा गया है, जबकि विपक्ष ने इसका विरोध शुरू कर दिया है।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Mon, 25 May 2026 11:43:17

असम विधानसभा में पेश हुआ UCC बिल, हिमंत सरमा सरकार का बड़ा फैसला; आदिवासी समुदाय को दी गई बड़ी राहत

असम विधानसभा में समान नागरिक संहिता यानी UCC विधेयक पेश कर दिया गया है। इस कदम के साथ ही मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma की सरकार ने राज्य में बड़ा राजनीतिक और सामाजिक संदेश देने की कोशिश की है। हालांकि, विधानसभा में बिल पेश होते ही विपक्षी दलों ने इसका जोरदार विरोध शुरू कर दिया। विपक्ष का कहना है कि इतने अहम मुद्दे पर सरकार को पहले सभी समुदायों, सामाजिक संगठनों और हितधारकों से व्यापक चर्चा करनी चाहिए थी। इसके बावजूद सरकार ने विधेयक को सदन में पेश कर आगे बढ़ाने का फैसला लिया।

गौरतलब है कि राज्य मंत्रिमंडल पहले ही इस विधेयक को मंजूरी दे चुका था। अब इसे विधानसभा के पटल पर रखा गया है। उत्तराखंड और गुजरात के बाद असम ऐसा करने वाला तीसरा राज्य बन गया है। खास बात यह है कि इस प्रस्तावित कानून में आदिवासी समुदायों को दायरे से बाहर रखा गया है, जिससे राज्य के जनजातीय समूहों को बड़ी राहत मिलने की चर्चा है।

क्या-क्या प्रावधान शामिल हैं?

राज्य सरकार का दावा है कि असम की सामाजिक और जनसांख्यिकीय विविधता को ध्यान में रखते हुए यूसीसी का मसौदा तैयार किया गया है। इस विधेयक में कई अहम बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। सबसे प्रमुख उद्देश्य राज्य में बहुविवाह की प्रथा पर पूरी तरह रोक लगाना बताया जा रहा है।

इसके अलावा विवाह के लिए न्यूनतम कानूनी उम्र को सख्ती से लागू करने का प्रावधान भी रखा गया है। सरकार चाहती है कि राज्य में होने वाली सभी शादियों और तलाक का अनिवार्य रूप से सरकारी रिकॉर्ड में पंजीकरण हो। वहीं बेटियों को पैतृक संपत्ति में बराबरी का अधिकार सुनिश्चित करने की बात भी इस विधेयक में शामिल की गई है।

सरकार ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी नियम सख्त करने का प्रस्ताव रखा है। मसौदे के अनुसार ऐसे संबंधों के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया जा सकता है ताकि कानूनी और सामाजिक जवाबदेही तय हो सके।

धार्मिक परंपराओं में दखल नहीं: हिमंत सरमा

मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने साफ किया है कि यूसीसी का उद्देश्य किसी धर्म विशेष की परंपराओं या पूजा-पद्धतियों में हस्तक्षेप करना नहीं है। उन्होंने कहा कि लोगों के मन में यह भ्रम है कि धार्मिक रीति-रिवाज भी इस कानून के दायरे में आ जाएंगे, जबकि ऐसा नहीं होने वाला।

सीएम सरमा ने कहा कि धार्मिक मान्यताओं और पूजा-पाठ से जुड़े मामलों को पूरी तरह अलग रखा गया है। उनका कहना है कि सरकार सिर्फ सामाजिक और कानूनी व्यवस्था को अधिक समान और पारदर्शी बनाने की दिशा में काम कर रही है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदायों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। सरकार का कहना है कि असम की सांस्कृतिक विविधता और जनजातीय परंपराओं का सम्मान करते हुए यह फैसला लिया गया है।

विपक्ष ने साधा सरकार पर निशाना

यूसीसी को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है। कांग्रेस और अन्य दलों का आरोप है कि सरकार असली मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए इस तरह के संवेदनशील विषय उठा रही है। विपक्ष का कहना है कि महंगाई, बेरोजगारी और विकास जैसे मुद्दों पर सरकार जवाब देने से बच रही है।

कांग्रेस विधायक Zakir Hussain Sikdar ने कहा कि असम में यूसीसी लागू करने का कोई व्यावहारिक फायदा नहीं होने वाला। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस इस विधेयक का पुरजोर विरोध करेगी और इसे जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने वाला कदम बताया।

विपक्ष का यह भी आरोप है कि राज्य सरकार केंद्र और नागपुर नेतृत्व को खुश करने के लिए यह बिल लेकर आई है। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष सिर्फ राजनीतिक माहौल खराब करने की कोशिश कर रहा है।

बीजेपी नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने जनता से जो वादे किए थे, उसी आधार पर उन्हें बड़ा जनादेश मिला है। पार्टी के अनुसार यूसीसी राज्य में समानता और पारदर्शिता की दिशा में अहम कदम साबित होगा।

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