असम की राजनीति में शुक्रवार का दिन अहम रहने वाला है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार होने जा रहा है, जिसके तहत 12 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई जाएगी। इस विस्तार के बाद राज्य सरकार का मंत्रिमंडल लगभग पूर्ण आकार के करीब पहुंच जाएगा और मुख्यमंत्री सहित कुल मंत्रियों की संख्या बढ़कर 17 हो जाएगी।
शपथ ग्रहण समारोह दोपहर 12:45 बजे आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने स्वयं इसकी जानकारी साझा करते हुए कहा कि असम विधानसभा के 12 सदस्य शुक्रवार को कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इस कार्यक्रम की घोषणा की और नए मंत्रियों को अग्रिम शुभकामनाएं भी दीं।
दिलचस्प बात यह है कि इस विस्तार में तीन ऐसे चेहरे शामिल किए जा रहे हैं, जिन्हें पहली बार मंत्री बनने का अवसर मिलेगा। वहीं बाकी अधिकांश नेता पहले भी सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं और प्रशासनिक अनुभव रखते हैं। ऐसे में नई और अनुभवी नेतृत्व क्षमता का मिश्रण राज्य सरकार में देखने को मिलेगा।
मंत्री पद की शपथ लेने वाले 12 विधायक
मंत्रिमंडल विस्तार में जिन विधायकों को शामिल किया जा रहा है, उनके नाम इस प्रकार हैं—
अश्विनी राय सरकार
अशोक सिंघल
बिमल बोरा
बिस्वजीत दैमारी
जयंत मल्लाबरुआ
कौशिक राय
केशव महंत
कृष्णेंदु पॉल
नीलिमा देवी
पीयूष हजारिका
डॉ. रनोज पेगु
सुसंता बोरगोहेन
इन नेताओं के शपथ लेने के साथ ही मुख्यमंत्री की टीम और अधिक मजबूत हो जाएगी तथा विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियां भी जल्द आवंटित की जा सकती हैं।
मुख्यमंत्री के साथ पहले चार मंत्रियों ने ली थी शपथ
गौरतलब है कि हिमंता बिस्वा सरमा ने 12 मई को दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की थी। उस समय उनके साथ केवल चार विधायकों को मंत्री बनाया गया था। अब करीब एक महीने बाद सरकार का पहला बड़ा मंत्रिमंडल विस्तार किया जा रहा है।
12 नए मंत्रियों के शामिल होने के बाद राज्य में मुख्यमंत्री समेत कुल मंत्रियों की संख्या 17 हो जाएगी। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार असम में अधिकतम 19 मंत्री बनाए जा सकते हैं। ऐसे में अभी भी दो पद खाली रहेंगे, जिन्हें भविष्य में राजनीतिक या प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुसार भरा जा सकता है।
इन नए चेहरों को पहली बार मिलेगा मौका
मंत्रिमंडल विस्तार में जिन नेताओं को पहली बार मंत्री पद की जिम्मेदारी मिलने जा रही है, उनमें भाजपा के अश्विनी राय सरकार, नीलिमा देवी और सुसंता बोरगोहेन प्रमुख हैं। इन तीनों नेताओं को संगठन और क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के बाद अब सरकार में स्थान दिया जा रहा है।
वहीं असम गण परिषद (अगप) के वरिष्ठ नेता केशव महंत भी मंत्रिपरिषद का हिस्सा बनने जा रहे हैं। हालांकि उनके लिए यह नई जिम्मेदारी नहीं होगी, क्योंकि वह पिछली एनडीए सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं और प्रशासनिक अनुभव रखते हैं।
इसके अलावा पूर्व विधानसभा अध्यक्ष बिस्वजीत दैमारी का नाम भी मंत्रिमंडल में शामिल होने वालों की सूची में है। उनका शामिल होना राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अनुभवी नेताओं पर फिर जताया गया भरोसा
कैबिनेट विस्तार में कई ऐसे नेताओं को भी दोबारा मौका दिया गया है, जो हिमंता बिस्वा सरमा की पहली सरकार में मंत्री रह चुके हैं। इनमें अशोक सिंघल, डॉ. रनोज पेगु, बिमल बोरा, जयंत मल्लाबरुआ, कौशिक राय, कृष्णेंदु पॉल और पीयूष हजारिका जैसे नाम शामिल हैं।
इन नेताओं के पास विभिन्न विभागों को संभालने का अनुभव है और सरकार ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया है। माना जा रहा है कि अनुभवी मंत्रियों की मौजूदगी सरकार की नीतियों और योजनाओं के क्रियान्वयन को गति देने में मददगार साबित होगी।
12 मई को शपथ लेने वाले मंत्रियों की टीम
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के साथ 12 मई को जिन नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली थी, उनमें असम गण परिषद के अतुल बोरा, बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) के चरण बोरो तथा भाजपा के अजंता नियोग और रामेश्वर तेली शामिल थे।
नए विस्तार के बाद मंत्रिपरिषद की राजनीतिक संरचना भी लगभग स्पष्ट हो जाएगी। मंत्रिमंडल में भाजपा के 13 मंत्री होंगे, जबकि असम गण परिषद के दो और बीपीएफ का एक मंत्री प्रतिनिधित्व करेगा। इससे एनडीए गठबंधन के सहयोगी दलों को भी सरकार में उचित भागीदारी मिलेगी।
महिला प्रतिनिधित्व रहेगा बरकरार
नई मंत्रिपरिषद में महिला प्रतिनिधित्व भी पहले की तरह बना रहेगा। भाजपा की अजंता नियोग और नीलिमा देवी कैबिनेट में दो महिला मंत्री के रूप में शामिल होंगी। इस तरह पिछली सरकार की तरह इस बार भी महिलाओं की संख्या मंत्रिमंडल में समान बनी रहेगी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विस्तार केवल विभागों के बंटवारे तक सीमित नहीं है, बल्कि आगामी वर्षों की राजनीतिक रणनीति और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए भी किया गया है। अब सभी की निगाहें शपथ ग्रहण समारोह और उसके बाद होने वाले विभागों के आवंटन पर टिकी हुई हैं।














