
एशिया कप 2025 का खिताब टीम इंडिया ने अपने नाम कर लिया है। यह लगातार नौवीं बार है जब भारत ने एशिया कप की ट्रॉफी जीती। पूरे टूर्नामेंट के दौरान पाकिस्तान की टीम बौखलाहट में दिखी और हर मैच में भारतीय टीम से शिकस्त खाई। यही कारण रहा कि फाइनल मैच में भी पाकिस्तानी खिलाड़ियों की चिड़चिड़ाहट साफ नजर आई। भारत के हाथों हार को पाकिस्तान के कप्तान सलमान आगा पचा नहीं पाए और रनर-अप चेक सबके सामने फेंक दिया।
पोस्ट-मैच प्रेजेंटेशन में विवाद
फाइनल के बाद हुए पोस्ट-मैच प्रेजेंटेशन समारोह में सलमान आगा ने एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के प्रतिनिधि अमीनुल इस्लाम से रनर-अप चेक लिया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर चेक जमीन पर फेंक दिया, जिससे वहां मौजूद दर्शकों और अधिकारियों में हलचल मच गई। आगा के इस क़दम पर लोगों ने जमकर हूटिंग की।
हार के बाद सलमान आगा की प्रतिक्रिया
सलमान आगा हार के बाद पूरी तरह नाराज नजर आए। उन्होंने कहा कि हार अभी सहन करना कठिन है। हालांकि उन्होंने माना कि उनके बल्लेबाजों का प्रदर्शन अपेक्षित स्तर पर नहीं रहा, जबकि गेंदबाजी में टीम ने अच्छा किया। आगा ने कहा, “हम वह स्कोर नहीं बना पाए जो हमारे लक्ष्य में था, यही हार की वजह बनी।”
Salman agha gadiki ekkado kalinattu vundi lucha gadu🤣🤣🤣 #INDvPAK pic.twitter.com/GkEn7deKZj
— 𝙸𝚝𝚊𝚌𝚑𝚒 ❟❛❟ (@itachiistan1) September 28, 2025
टीम इंडिया की प्रतिक्रिया
भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने एशियाई क्रिकेट परिषद के अध्यक्ष और पाकिस्तान के गृहमंत्री मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार किया। सूर्यकुमार ने कहा कि विजयी टीम को याद रखा जाता है, ट्रॉफी को नहीं। उन्होंने फाइनल मैच में पाकिस्तान को पांच विकेट से हराने के बाद कहा, ‘‘मैने ऐसा पहले कभी नहीं देखा कि विजयी टीम को ट्रॉफी न दी जाए, लेकिन मेरे लिए मेरे खिलाड़ी और सहयोगी स्टाफ ही असली ट्रॉफी हैं।’’
भारत ने पूरे टूर्नामेंट में पाकिस्तान से हाथ नहीं मिलाया। भारत और पाकिस्तान के बीच 14 सितंबर से खेले गए तीनों मैचों में भारतीय टीम ने लगातार जीत दर्ज की।
सूर्यकुमार यादव का सोशल मीडिया संदेश
मैच के बाद सूर्यकुमार यादव ने एक्स (Twitter) पर लिखा, ‘‘मैच पूरा होने के बाद सिर्फ चैम्पियंस को याद रखा जाता है, ट्रॉफी की तस्वीर को नहीं।’’ उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार का फैसला टीम ने मैदान पर ही किया और किसी ने उन्हें ऐसा करने के लिए दबाव नहीं डाला।
यह फाइनल न केवल खेल के लिहाज से, बल्कि दोनों देशों के बीच राजनीतिक और भावनात्मक तनाव के संदर्भ में भी ऐतिहासिक रहा। भारतीय टीम ने न सिर्फ शानदार प्रदर्शन किया बल्कि अपने आत्मसम्मान और सम्मानजनक रवैये को भी कायम रखा।














