
महिला विश्व कप में भारतीय टीम की सबसे बड़ी चुनौती अब तक उसकी बल्लेबाज़ी रही है। तीन मैच बीत चुके हैं, लेकिन शीर्ष क्रम अब तक लय में नहीं दिखा। कई मौकों पर टीम को संकट से उबारने के लिए निचले क्रम पर अमनजोत कौर और ऋचा घोष को जिम्मेदारी उठानी पड़ी। श्रीलंका, पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैचों में इन्हीं बल्लेबाज़ों की पारी ने टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया, वरना भारत शायद अब तक अपनी पहली जीत का इंतजार कर रहा होता।
पाकिस्तान और श्रीलंका जैसी टीमों के खिलाफ भारतीय बल्लेबाज़ी की कमजोरियां छिप गईं, लेकिन दक्षिण अफ्रीका के अनुशासित और योजनाबद्ध गेंदबाज़ी आक्रमण ने भारत की कमजोरियों को उजागर कर दिया। सबसे बड़ी चिंता शीर्ष क्रम की लय और स्ट्राइक रोटेशन को लेकर है। प्रतिभाशाली बल्लेबाज़ प्रतिका रावल और हरलीन देओल दोनों ने अच्छी शुरुआत तो की, लेकिन दोनों की संयमित बल्लेबाज़ी टीम की गति को वहीं रोक देती है, जहां तेज़ी की सबसे ज़्यादा जरूरत होती है।
प्रतिका की दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पारी इसका उदाहरण रही—18 गेंदों पर 25 रन की तेज़ शुरुआत के बाद अगली 38 गेंदों पर सिर्फ 12 रन जोड़ सकीं। हरलीन देओल का हाल भी कुछ ऐसा ही रहा, जो लगातार अच्छी शुरुआत को बड़ी पारी में नहीं बदल पा रहीं।
ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि क्या टीम ने स्थिरता की तलाश में शफाली वर्मा जैसी विस्फोटक बल्लेबाज़ को बाहर रखकर गलती की है? शफाली की मौजूदगी भारत को शीर्ष क्रम में न सिर्फ आक्रामक शुरुआत देती बल्कि विपक्षी टीमों पर मानसिक दबाव भी बनाती।
शफाली वर्मा को बाहर रखना बना बड़ा सवाल
शफाली वर्मा को विश्व कप टीम से बाहर रखने का फैसला अब और भी चर्चाओं में है। पिछले साल न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू वनडे सीरीज़ के बाद उन्हें टीम से ड्रॉप किया गया था और उनकी जगह यास्तिका भाटिया को मौका मिला था। हालांकि यास्तिका के चोटिल होने के बाद भी चयनकर्ताओं ने शफाली की बजाय उमा छेत्री को शामिल कर सबको हैरान कर दिया। उमा अब तक अंतरराष्ट्रीय वनडे डेब्यू नहीं कर पाई हैं और उनके पास घरेलू या WPL में भी कोई बड़ा प्रदर्शन नहीं है।
अगर टीम को अब बल्लेबाज़ी क्रम में बदलाव करना है, तो विकल्प सीमित हैं। शफाली होतीं तो उनके अनुभव और पावर-हिटिंग से भारत के पास ओपनिंग में एक आक्रामक विकल्प मौजूद होता।
शफाली ने पहले ही दिखा दिया था दम
विडंबना यह है कि भारत ए की ओर से न्यूजीलैंड के खिलाफ वॉर्म-अप मैच में शफाली ने 49 गेंदों में 70 रन की तूफानी पारी खेलकर अपने चयन की दावेदारी पहले ही पेश कर दी थी। इस मैच में उन्होंने अमेलिया केर, सोफी डिवाइन और ईडन कार्सन जैसी अनुभवी गेंदबाज़ों को बखूबी संभाला था। लेकिन तब तक भारतीय टीम का चयन हो चुका था, और उन्हें मौका नहीं मिल पाया।
अब शफाली को टीम में जगह तभी मिल सकती है जब कोई मौजूदा खिलाड़ी चोटिल होकर बाहर हो। फिलहाल, भारत को उसी बल्लेबाज़ी संयोजन के साथ खेलना होगा जो दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ लड़खड़ा गया था।
भारत की अगली चुनौती अब और कठिन है — रविवार को टीम का सामना शक्तिशाली ऑस्ट्रेलिया से होगा। ऐसे में भारतीय बल्लेबाज़ी क्रम को जल्द फॉर्म में लौटना होगा, वरना सेमीफाइनल की राह और मुश्किल हो जाएगी।














