
मुंबई के प्रतिष्ठित वानखेड़े स्टेडियम स्थित बीसीसीआई कार्यालय एक बड़ी चोरी की घटना का केंद्र बन गया है। यहां बीसीसीआई के आधिकारिक मर्चेंडाइज स्टोर से कुल 261 आईपीएल जर्सी चोरी हो गईं, जिनकी कीमत ₹6.5 लाख से अधिक बताई जा रही है। इस मामले में एक सुरक्षा प्रबंधक पर चोरी का गंभीर आरोप लगा है और उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
एक महीने तक छिपी रही घटना, अब जाकर हुआ खुलासा
चोरी की यह घटना 13 जून 2025 को हुई थी, लेकिन इसकी औपचारिक शिकायत बीसीसीआई कर्मचारी हेमंग भरत कुमार अमीन द्वारा लगभग एक महीने बाद 17 जुलाई को दर्ज कराई गई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 306 (नौकर द्वारा मालिक की संपत्ति की चोरी) के तहत मामला दर्ज किया है। यह धारा ऐसे मामलों में लागू होती है जहां किसी कर्मचारी द्वारा जानबूझकर मालिक की संपत्ति का गबन या चोरी की जाती है।
सुरक्षा प्रबंधक पर लगा गंभीर आरोप
जिन शख्स पर यह आरोप लगा है उसका नाम फारूक असलम खान (उम्र 46) बताया गया है, जो मीरा रोड ईस्ट के गौरव एक्सेलेंसी में रहता है। फारूक, बीसीसीआई के मर्चेंडाइज स्टोर में बतौर सुरक्षा प्रबंधक तैनात था। आरोप है कि उसने ही स्टोर में घुसकर चोरी को अंजाम दिया। शिकायतकर्ता अमीन बीसीसीआई के नियमित कर्मचारी हैं और वानखेड़े स्टेडियम परिसर में कार्यरत हैं।
हर टीम की जर्सी थी चोरी में शामिल
चोरी की गई जर्सियों में आईपीएल की सभी टीमों के खिलाड़ियों की जर्सियां शामिल थीं। इसका मतलब यह है कि यह सामान्य चोरी नहीं, बल्कि पहले से योजना बनाकर की गई संगठित चोरी थी, जिसमें मूल्यवान मर्चेंडाइज को टारगेट किया गया। चोरी हुई सभी जर्सियों की अनुमानित कीमत ₹6,52,500 बताई गई है।
सीसीटीवी फुटेज ने खोला राज
पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामले की जांच में सीसीटीवी फुटेज सबसे अहम कड़ी बनकर सामने आया। वीडियो रिकॉर्डिंग में फारूक असलम खान को एक बड़े कार्डबोर्ड बॉक्स को उठाकर ले जाते हुए देखा गया, जिससे शक की सुई उसकी ओर गई। फुटेज की मदद से ही संदेह को पुष्टि में बदला गया और फिर पुलिस ने उसके खिलाफ कार्रवाई शुरू की।
ऑनलाइन डीलर को बेची गईं जर्सियां, कुछ बरामद
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि फारूक ने चोरी की गई जर्सियों को बेचने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया और हरियाणा के एक ऑनलाइन डीलर से संपर्क साधा। वहीं से उसने चोरी की जर्सियां बेचने की कोशिश की। पुलिस ने अब तक 50 जर्सियां बरामद की हैं, लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि बाकी जर्सियां कहां गईं और फारूक ने इससे कुल कितनी कमाई की।
पुलिस कर रही है गहन जांच
मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन की टीम इस मामले की गंभीरता को समझते हुए सभी तकनीकी सबूत, जैसे सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, सोशल मीडिया चैट्स और बैंकिंग ट्रांजैक्शनों की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही बाकी जर्सियों की भी बरामदगी की जाएगी और अगर इसमें कोई अन्य व्यक्ति शामिल हुआ तो उसकी भी भूमिका की जांच की जाएगी।
बीसीसीआई जैसे प्रतिष्ठित संगठन में इस प्रकार की चोरी न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि खेल से जुड़े व्यवसायिक आयाम अब कितने संवेदनशील हो चुके हैं। लाखों की कीमत वाली मर्चेंडाइज चोरी होना और सोशल मीडिया के जरिए उसे खपाने की कोशिश होना खेल संगठनों के लिए एक बड़ी चेतावनी है।
यदि इस मामले में और खुलासे होते हैं या पुलिस की जांच में अन्य नाम सामने आते हैं, तो वह क्रिकेट प्रशंसकों और बीसीसीआई दोनों के लिए चौंकाने वाला हो सकता है। फिलहाल, मरीन ड्राइव पुलिस की जांच जारी है।














