नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार बुधवार को लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक 2024 पेश करेगी। केंद्रीय संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार को बताया कि विधेयक को 2 अप्रैल को प्रश्नकाल के बाद विचार और पारित करने के लिए पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विधेयक पर 8 घंटे चर्चा होगी, जिसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
रिजिजू ने कहा कि अगर सदन को लगता है कि अगर ऐसा लगेगा कि चर्चा के लिए समय बढ़ाया जाना चाहिए, तो समय बढ़ाया जा सकता है, लेकिन अगर विपक्षी दल कोई बहाना बनाकर चर्चा में हिस्सा नहीं लेना चाहते हैं, तो हम इसे रोक नहीं सकता। हम चर्चा चाहते हैं। हर राजनीतिक दल को अपनी बात रखने का अधिकार है। देश जानना चाहता है कि संशोधन विधेयक पर किस राजनीतिक दल का क्या रुख है। ये बात हजारों साल तक दर्ज रहेगी, ये बात रिकॉर्ड में रहेगी कि किसने संशोधन विधेयक का विरोध किया और किसने समर्थन किया।
उन्होंने कहा, "2 अप्रैल को प्रश्न काल के तुरंत बाद मैं संशोधन विधेयक को विचार और पारित करने के लिए पेश करना चाहता हूं। हम 8 घंटे की चर्चा के लिए सहमत हुए हैं।"
केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने सोमवार को पार्टी मुख्यालय में भाजपा प्रवक्ताओं को वक्फ संशोधन विधेयक के बारे में जानकारी दी थी। बैठक के दौरान रिजिजू ने विधेयक का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया, जिसमें मुस्लिम समुदाय को इससे होने वाले लाभों पर प्रकाश डाला गया। रिजिजू ने कहा कि विधेयक धार्मिक संस्थानों की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप नहीं करता है और इसे उन लोगों को अधिकार देने के लिए बनाया गया है, जिनके पास पहले ये अधिकार नहीं थे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विधेयक का उद्देश्य वक्फ प्रबंधन में सुधार, पारदर्शिता और डिजिटलीकरण को बढ़ाना है।
हालांकि, विपक्ष समेत तमाम मुस्लिम संगठनों ने वक्फ संशोधन विधेयक की कड़ी आलोचना की है और इसे 'असंवैधानिक' बताया है। विपक्ष का आरोप है कि भाजपा मुसलमानों के अधिकारों को 'छीनने' का प्रयास कर रही है।
वक्फ संशोधन विधेयक का विरोध करते हुए एआईएमआईएम प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि यह विधेयक असंवैधानिक है और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 25, 26 और 29 का 'गंभीर उल्लंघन' है। ओवैसी ने कहा कि यह 'वक्फ बर्बाद विधेयक' है। हैदराबाद के सांसद ओवैसी ने भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए में शामिल नीतीश कुमार, चंद्रबाबू नायडू, चिराग पासवान और जयंत चौधरी से वक्फ संशोधन विधेयक के समर्थन के पीछे के कारणों पर सवाल उठाया।
जेपीसी के संशोधन मंजूर
वक्फ संशोधन विधेयक पिछले साल अगस्त में लोकसभा में पेश किया गया था। विपक्ष के विरोध के बाद इस विचार करने के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का गठन किया गया था। जेपीसी ने पिछले महीने अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। बाद में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जेपीसी द्वारा किए गए सुझावों और संशोधनों को मंजूरी दे दी थी।
#WATCH | Delhi: On the Waqf Amendment Bill, Union Minister of Minority Affairs Kiren Rijiju says, ...If the House feels that the time for discussion should be extended, then the time can be extended, but if they (opposition) do not want to participate in the discussion by making… pic.twitter.com/ouBiSVkZm6
— ANI (@ANI) April 1, 2025
विधेयक का उद्देश्य
इस विधेयक का उद्देश्य वक्फ अधिनियम, 1995 में संशोधन करना है, ताकि वक्फ संपत्तियों के विनियमन और प्रबंधन में आने वाली समस्याओं और चुनौतियों का समाधान किया जा सके। सरकार का कहना है कि अधिनियम में संशोधन से भारत में वक्फ संपत्तियों के प्रशासन और प्रबंधन में सुधार होगा। साथ ही पंजीकरण प्रक्रिया में सुधार करने और वक्फ रिकॉर्ड के प्रबंधन में प्रौद्योगिकी की भूमिका बढ़ाने जैसे बदलाव करके वक्फ बोर्ड की दक्षता बढ़ाई जा सकती है।