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नीतीश के सियासी यू टर्न के लिए सामने आई राम मंदिर लहर और नरेन्द्र मोदी के पक्ष में बना माहौल

सबसे बड़ा सवाल जो पूछा जा रहा है वह यह है कि नीतीश कुमार को इंडिया ब्लॉक से एनडीए में आने के लिए किसने प्रेरित किया।

Posts by : Rajesh Bhagtani | Updated on: Sat, 27 Jan 2024 4:49:39

नीतीश के सियासी यू टर्न के लिए सामने आई राम मंदिर लहर और नरेन्द्र मोदी के पक्ष में बना माहौल

पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शनिवार दोपहर को अपना इस्तीफा दे सकते हैं और सूत्रों का कहना है कि वह रविवार को आठवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले सकते हैं। सबसे बड़ा सवाल जो पूछा जा रहा है वह यह है कि नीतीश कुमार को इंडिया ब्लॉक से एनडीए में आने के लिए किसने प्रेरित किया। इसकी सबसे बड़ी वजह बनी अयोध्या में राम मंदिर की प्रतिष्ठा और इससे भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पक्ष में बनी लहर, जिसने यह संकेत दिया है कि लोकसभा चुनावों में भाजपा पिछली बार से ज्यादा सीटें लेकर आने में सफल होगी।

सूत्रों ने कहा कि नीतीश कुमार इंडिया ब्लॉक में असुरक्षित महसूस कर रहे थे, क्योंकि प्रशांत किशोर समेत कई राजनीतिक विशेषज्ञों ने कहा था कि अगर जेडी-यू विपक्षी गठबंधन में रहेगा, तो उसे बिहार में पांच सीटें भी नहीं मिलेंगी। प्रशांत किशोर ने दावा किया था कि अगर जेडीयू पांच से ज्यादा सीटें जीतेगी, तो वह देश के सामने माफी मांगेंगे। साथ ही नीतीश कुमार को लगता है कि इंडिया ब्लॉक में उनका भविष्य उज्ज्वल नहीं दिख रहा है। उन्होंने इंडिया ब्लॉक के गठन का नेतृत्व किया, लेकिन गठबंधन के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बनने में असफल रहे। चूंकि इंडिया ब्लॉक के कई नेता नीतीश कुमार के पक्ष में नहीं थे, इसलिए उन्होंने उन्हें नजरअंदाज कर दिया।

अपनी नजरअंदाजी से भाजपा के साथ लौटने में लगी समझदारी

बेंगलुरु में दूसरी बैठक में यह बात साफ दिखी, जब नीतीश कुमार प्रेस ब्रीफिंग में शामिल हुए बिना ही पटना लौट आये। मुंबई में तीसरी बैठक में भी उन्हें नजरअंदाज किया गया। इसके तुरंत बाद नीतीश कुमार ने अक्टूबर के पहले सप्ताह में सीपीआई की एक रैली में सीट बंटवारे में देरी और इंडिया ब्लॉक के कामकाज पर ध्यान न देने के लिए सार्वजनिक रूप से कांग्रेस पार्टी को दोषी ठहराते हुए अपना गुस्सा दिखाया।

उस समय कांग्रेस पार्टी मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के चुनावों में व्यस्त थी। तीन राज्यों में हार के बाद, नीतीश कुमार सीट बंटवारे के विषय पर कांग्रेस पर लगातार हमले कर रहे थे। साथ ही, नीतीश कुमार बिहार में राजद और कांग्रेस पार्टी के साथ सहज नहीं थे। वह हमेशा सोचते हैं कि उनकी पार्टी का भविष्य महागठबंधन के बजाय एनडीए के भीतर अधिक उज्ज्वल है। वह भाजपा की मदद से लंबे समय तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे। वह अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान केंद्रीय मंत्री भी थे।

साथ ही, तेजस्वी यादव के चार्टर्ड प्लेन से परिवार के साथ तिरूपति बालाजी जाने, राजद कोटे के कैबिनेट मंत्रियों द्वारा उनसे सलाह किए बिना फैसले नहीं लेने और तेजस्वी यादव द्वारा नीतीश कुमार की सार्वजनिक सभाओं को नजरअंदाज करने जैसे मुद्दों को लेकर भी बिहार के राजनीतिक गलियारों में चर्चा है।

इसके अलावा, ऐसी अफवाहें भी थीं कि तेजस्वी यादव बिहार में सरकार बनाने के लिए जेडीयू को तोड़ सकते हैं। यही वजह हो सकती है कि नीतीश कुमार ने पार्टी की कमान अपने हाथ में ले ली और ललन सिंह को हटाकर जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए।

वह अपने गठबंधन सहयोगियों के खिलाफ हो रहे हैं, यह तब स्पष्ट हो गया जब कर्पूरी ठाकुर की 100वीं जयंती के दिन, नीतीश कुमार ने एक सभा को संबोधित करते हुए वंशवाद की राजनीति पर निशाना साधा। हालांकि उन्होंने किसी नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन यह साफ था कि उनका निशाना लालू प्रसाद यादव और राहुल गांधी पर था। उन्होंने 2005 से पहले लालू-राबड़ी सरकार के दौरान जंगलराज की भी बात की। नीतीश कुमार ने यह भी दावा किया कि वह कर्पूरी ठाकुर के रास्ते पर चल रहे हैं और कर्पूरी ठाकुर की तरह अपने परिवार के किसी भी सदस्य को बढ़ावा नहीं दे रहे हैं।
यूटर्न में सहयोगात्मक रहे रोहिणी के ट्वीट

नीतीश कुमार के बाद, वंशवादी राजनीति का जिक्र किया गया, लालू प्रसाद यादव की दूसरी बेटी रोहिणी आचार्य ने एक्स पर बिहार के मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए तीन पोस्ट डाले। हालांकि रोहिणी आचार्य ने कुछ घंटों के बाद पोस्ट को हटा दिया, लेकिन यह उनके और नीतीश कुमार के बीच चल रहे झगड़े पर लालू परिवार के दृष्टिकोण को दिखाने के लिए काफी था।

उन्होंने पहली पोस्ट में कहा, "कुछ लोग खुद को समाजवादी दिग्गज घोषित करते हैं, लेकिन उनकी विचारधारा हवा की तरह बदल जाती है।" रोहिणी आचार्य ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन यह स्पष्ट था कि उनका निशाना किसे था।

दूसरे पोस्ट में रोहिणी आचार्य ने कहा, ''गुस्सा दिखाने से कोई मदद नहीं मिलेगी, क्योंकि उनमें से कोई भी इतना योग्य नहीं है कि उनकी विरासत को आगे बढ़ा सके। उनके इरादे ठीक नहीं हैं।”

तीसरे पोस्ट में उन्होंने कहा कि ''कुछ लोग अपनी कमियों पर आत्ममंथन नहीं करते और दूसरों पर कीचड़ उछालते हैं।''

इन पोस्ट के बाद गुस्से में दिख रहे नीतीश कुमार ने गुरुवार को कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता की।

रोहिणी आचार्य 15 मिनट तक कैबिनेट मीटिंग में रहीं और उन्होंने अपने भाई तेजस्वी यादव समेत राजद के किसी भी नेता से बातचीत नहीं की। बाद में उन्होंने पोस्ट हटा दीं।

तो, स्पष्ट रूप से महागठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं था और अयोध्या में राम मंदिर के अभिषेक के बाद देश भर में भाजपा के लिए समर्थन की लहर ने नाखुश नीतीश कुमार को सीधे भगवा खेमे में धकेल दिया।

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