
भारत में कोरोना संक्रमण पर लगाम लगाने के लिए वैक्सीनेशन अभियान तेजी से चलाया जा रहा हैं। देश में अबतक 14 करोड़ से ज्यादा लोगों को टीके लग चुके हैं जिसके बाद भी संक्रमण के हाल बेहाल होते नजर आ रहे हैं। ऐसे में अगर पड़ोसी देश पाकिस्तान की बात करें तो लोग वैक्सीन लगवाने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं और अबतक सिर्फ 0.2 फीसदी लोगों को टीका लगाया गया हैं। ऐसे में पाकिस्तान में खतरे को महसूस किया जा सकता है। दूसरे देशों की बात करें तो इजरायल अपने 60 फीसदी से ज्यादा लोगों को टीके लगा चुका है। जबकि ब्रिटेन 50, बहरीन 40, भूटान 63 प्रतिशत लोगों को टीके लगा चुका है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में अब तक मात्र आठ लाख लोगों ने टीके लगवाए हैं। यह आंकड़ा कुल आबादी का 0.2 फीसदी है। 'द डिप्लोमैट' में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह चलता रहा तो देश के 22 करोड़ लोगों को टीका लगवाने में पाकिस्तान को करीब पांच साल लगेंगे।
कोरोना टीकाकरण अभियान पाकिस्तान में भी चल रहा है, लेकिन सरकार के प्रयासों को कामयाबी नहीं मिल रही है, क्योंकि वहां की अधिसंख्य आबादी में टीके के प्रति रुचि नहीं है। इमरान सरकार टीकाकरण के प्रति जागरूकता के प्रयास कर रही है, लेकिन केवल शिक्षित लोग ही टीकाकरण करवा रहे हैं। लोगों का कहना है कि उन्हें कोरोना टीकों से डर है। उन्हें ऐसा लगता है कि वैक्सीन की वजह से उन्हें कुछ हो सकता है। उधर टीकाकरण में जुटी संस्थाएं अखबारों, मौलवियों और सोशल मीडिया के माध्यम से टीकाकरण के प्रति जागरूकता के प्रयास कर रही है, लेकिन वे कामयाब नहीं हो रहे। कराची, इस्लामाबाद, मुल्तान और पेशावर के अलावा पंजाब व खैबर पख्तूनख्वा में भी लोग टीकाकरण से दूरी बनाए हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में तो लोगों ने मास्क पहनने से भी इनकार कर रहे हैं।













