
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सत्ता पक्ष सुरक्षा प्रोटोकॉल के साथ छेड़छाड़ कर रहा है और राजनीतिक प्रतिशोध के तहत विपक्षी नेताओं की सुरक्षा में कटौती की जा रही है।
अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि बीजेपी ने संत समाज का अपमान किया है, और यह अपमान जनता के बीच गहरा आक्रोश पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें प्रदान की गई एनएसजी सुरक्षा बिना किसी ठोस वजह के हटा दी गई और सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि यह निर्णय किस आधार पर लिया गया।
सपा प्रमुख ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की एसपीजी सुरक्षा हटाए जाने का भी उदाहरण देते हुए इसे राजनीतिक बदले की प्रक्रिया बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री को प्रोटोकॉल के अनुसार मिलने वाली सुरक्षा सुनिश्चित रूप से मिलनी चाहिए, लेकिन वर्तमान सरकार केवल औपचारिक आंकड़े गिन रही है और वास्तविक सुरक्षा का पालन नहीं कर रही।
अखिलेश यादव ने प्रयागराज माघ मेले का हवाला देते हुए संत समाज के अपमान का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य से प्रमाण पत्र मांगना अनुचित और अपमानजनक है। अगर किसी गलती का आरोप है तो मुख्यमंत्री को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए, क्योंकि माफी मांगना साहस का काम है।
सपा अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि बुलडोजर कार्रवाई के नाम पर कानून और संविधान की अवहेलना की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि जनता 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को सत्ता से पूरी तरह बाहर कर देगी।
झांसी दौरे में प्रेस वार्ता:
अखिलेश यादव ने झांसी के एक दिवसीय दौरे के दौरान पत्रकारों से कहा, ‘‘बीजेपी सरकार लगातार सबका अपमान करती है। शंकराचार्य जी का अपमान किया गया, हमारे बटुकों की शिखा खींची गई और उन्हें अपमानित किया गया।’’ उन्होंने एक उपमुख्यमंत्री को निशाना बनाते हुए पूछा, ‘‘जब बटुकों की शिखा खींचकर अपमान किया जा रहा था, तब उपमुख्यमंत्री कहां थे?’’
सपा प्रमुख ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री जी लगातार शंकराचार्य जी का अपमान कर रहे हैं और उनसे प्रमाण पत्र मांग रहे हैं। यदि कोई गलती होती है तो माफी मांग लेना ही साहस की निशानी है। प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य और बटुकों के अपमान के लिए मुख्यमंत्री को माफी मांगनी चाहिए थी।’’













