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दुनिया में कोरोना की तीसरी लहर शुरू, WHO ने कहा - सिर्फ वैक्सीन से महामारी को रोका नहीं जा सकता

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के चीफ डॉ. टेड्रोस गेब्रेयेसस ने बुधवार को चेतावनी दी कि कोरोना की तीसरी लहर के शुरुआती फेज में आ चुके हैं इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ वैक्सीन से महामारी को रोका नहीं जा सकता है

Posts by : Priyanka Maheshwari | Updated on: Thu, 15 July 2021 7:42:17

दुनिया में कोरोना की तीसरी लहर शुरू, WHO ने कहा - सिर्फ वैक्सीन से महामारी को रोका नहीं जा सकता

दुनिया में कोरोना की तीसरी लहर शुरू हो गई है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के चीफ डॉ. टेड्रोस गेब्रेयेसस ने बुधवार को चेतावनी दी कि कोरोना की तीसरी लहर के शुरुआती फेज में आ चुके हैं इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ वैक्सीन से महामारी को रोका नहीं जा सकता है। देशों को इससे निपटने के लिए लगातार सावधानी रखनी होगी। WHO चीफ ने कहा कि वायरस लगातार खुद में बदलाव कर रहा है। इसके साथ ही यह ज्यादा संक्रामक होता जा रहा है। उन्होंने बताया कि डेल्टा वैरिएंट अब WHO के सभी 6 रीजन और 111 से ज्यादा देशों में पहुंच चुका है। यह जल्द ही पूरी दुनिया में भी फैल सकता है। वायरस का अल्फा वैरिएंट 178 देशों में, बीटा 123 देशों में और गामा 75 देशों में मिल चुका है।

अमेरिका में 67%, स्पेन में 61% मामले बढ़े

दुनिया में सबसे ज्यादा नए केस ब्राजील में मिल रहे हैं। बीते 24 घंटों में बाजील में 57 हजार से जायदा केस मिले। पिछले हफ्ते यहां 3.49 लाख केस मिले। हालांकि यहां नए मामलों में 14% की गिरावट आई है। इसी दौरान इंडोनेशिया में 45%, ब्रिटेन में 28%, अमेरिका में 67%, स्पेन में 61% तक मामले बढ़े हैं।

साउथ ईस्ट एशिया रीजन में मौतों के मामले में भारत सबसे आगे है। यहां 6 हजार नई मौतें दर्ज की गई हैं। इसके बाद इंडानेशिया और बांग्लादेश हैं।

भारत में पाबंदियों में छूट से जोखिम बढ़ा

न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, UBS सिक्योरिटीज इंडिया की चीफ इकोनॉमिस्ट तन्वी गुप्ता जैन ने कहा है कि कई राज्य पाबंदियों में ढील दे रहे हैं, बाजार खुल रहे हैं, इस वजह से तीसरी लहर का जोखिम और ज्यादा हो गया है। देश में वैक्सीनेशन की रफ्तार भी धीमी पड़ने लगी है। आपको बता दे, भारत में कल शुक्रवार को कोरोना वैक्सीनेशन को 180 दिन पूरे हो जाएंगे। इस दौरान देश में 39 करोड़ से ज्यादा डोज लगाए जा चुके हैं। शाम तक यह संख्या 39.10 करोड़ हो चुकी है। बुधवार को 32.10 लाख से ज्यादा लोगों को टीके लगाए गए।

UBS की रिपोर्ट के मुताबिक, पहले भारत में औसतन 40 लाख डोज हर दिन लगाए जा रहे थे। अब यह संख्या 34 लाख तक आ गई है। यह स्थिति इसलिए भी खतरनाक है क्योंकि अब 45% केस ग्रामीण इलाकों में सामने आ रहे हैं।

20% जिलों में दूसरी लहर खत्म नहीं, तीसरी लहर की आहट

तन्वी गुप्ता जैन ने बुधवार को बताया कि देश के ज्यादातर केस 20% जिलों में मिल रहे हैं। यहां दूसरी लहर का ही असर खत्म नहीं हुआ है और तीसरी लहर की आहट सुनाई देने लगी है। उन्होंने कहा कि इकोनॉमिक पॉइंटर सामान्य हो रहे हैं, लेकिन ये अब भी मिले-जुले नतीजे दिखा रहे हैं। ट्रेन और एयर पैसेंजर की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। वहीं, UBS इंडिया एक्टिविटी इंडीकेटर के मुताबिक टोल कलेक्शन अब भी पहले की स्तर से नीचे हैं।

भारत में कोरोना वायरस के मामलों के कम होने के बीच बड़ी संख्या में लोगों के बाजारों का रुख करने, सार्वजनिक और पर्यटन स्थलों की ओर जाने और कोविड से बचाव के नियमों का पालन नहीं करने पर विशेषज्ञों ने चिंता जाहिर की है।

उन्होंने कहा कि संक्रमण को नियंत्रित करने में समाज की भूमिका को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है और लोग खतरे को नहीं देख पा रहे हैं। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि जनता के रवैये में बदलाव के लिए सरकार में उनका भरोसा अहम होता है, लेकिन दुर्भाग्य से देश में लोगों का राजनीति पार्टियों में यकीन कम है।

उनका यह भी कहना है कि संक्रमण की गंभीरता और टीकाकरण दर के बारे में अस्पष्ट जानकारी देने से भी भम्र की स्थिति पैदा हुई है।

गौरतलब है कि सोशल मीडिया और अन्य संचार माध्यमों पर पहाड़ों वाले पर्यटन स्थलों पर एंट्री के लिए कारों की लंबी कतारों और लोगों की भीड़ की तस्वीरें सामने आई हैं, जिससे कई हलकों में चिंता बढ़ी है। अपनी जिंदगी को पटरी पर लाने के चक्कर में लोगों ने बचाव के बुनियादी उपाय करना भी छोड़ दिया है।

वरिष्ठ महामारी विशेषज्ञ ललित कांत ने कहा कि नियमों का पालन नहीं करना, लोगों की उदासीनता और जो होगा ईश्वर की मर्जी से होगा का मिश्रण है। मानव व्यवहार और संबद्ध विज्ञान संस्थान के निदेशक नीमेश देसाई का कहना है कि मास्क न लगाना और सामाजिक दूरी का पालन नहीं करने जैसी लापरवाही का कारण यह है कि लोग खतरे को नहीं देख पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोग खतरे को जिस तरह से आंकते हैं, उसके हिसाब से अपना व्यवहार बदलते हैं। उन्हें समझना चाहिए कि तीसरी लहर कभी भी दस्तक दे सकती है।

देसाई का कहना है कि भारत में 'सामाजिक गैर जिम्मेदारी की भारी प्रवृत्ति' देखी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को व्यवहार बदलने के लिए प्रेरित करना मुश्किल है, नामुमकिन नहीं। AIIMS के महामारी विज्ञान और संचारी रोग प्रभाग के पूर्व प्रमुख कांत ने कहा कि लोग जिस तरह से कोविड उपयुक्त व्यवहार का पालन करेंगे, उसी के मुताबिक महामारी के मामले घटेंगे या बढ़ेंगे।

देसाई ने कहा, 'बीते दो दशक में विकसित देश यह समझ पाए हैं कि हर व्यक्ति की सेहत उसकी जीवनशैली और व्यवहार पर निर्भर करती है। यह हमारे समाज में नहीं है।'

अर्थशास्त्री अरूण कुमार ने कहा, 'अगर लोगों का सरकारों में भरोसा ज्यादा होगा तो वे उसके निर्देशों का पालन करेंगे। भारत में दुर्भाग्य से राजनीतिक पार्टियों में विश्वास बहुत कम है।'

उन्होंने कहा, 'देखा गया है कि कई परिवारों ने इलाज के खर्च के लिए कर्ज लिया है। लोग अपना पैसा अपने पास रखेंगे। वे बाहर जरूर जाएंगे लेकिन पैसा अनावश्यक चीजों पर खर्च नहीं करेंगे। आप जो भीड़ बाजारों में देख रहे हैं, वे घूमने निकलें हैं पैसा खर्च नहीं करेंगे।'

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के पूर्व प्रोफेसर कुमार ने कहा, 'अगर हर कोई कहता है कि हमने इस बीमारी पर जीत हासिल कर ली है तो लोग मास्क या सामाजिक दूरी की चिंता करने की जरूरत पर सवाल उठाएंगे। सरकार में स्पष्टता की कमी है।'

एक विदेशी ब्रोकरेज फर्म ने आगाह किया है कि डेल्टा वैरिएंट के बढ़ते मामलों और वायरस के म्यूटेट होने से देश में कोरोना की तीसरी लहर की आशंका जल्द ही सच में बदल सकती है।

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