अजमेर। अधिवक्ता पुरुषोत्तम जाखेटिया की मौत के बाद उपजा आक्रोश अब शांत हो गया है। अधिवक्ता और परिजन जेएलएन अस्पताल की मोर्चरी से शव पोस्टमार्टम करवा कर अंतिम संस्कार के लिए तैयार हो गए हैं। शनिवार को 5 सूत्रीय मांग को लेकर वकीलों ने अजमेर बंद किया था। इसके बाद शासन और प्रशासन से हुई वार्ता में वकीलों की मांगें मान ली गई। रविवार को जिला बार एसोसिएशन कार्यालय में हुई बैठक के बाद वकीलों ने आंदोलन स्थगित करने की घोषणा कर दी है। इससे प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है।
पुरुषोत्तम जाखेटिया की मौत के बाद मुआवजे के लिए जिला विधिक प्राधिकरण में भी प्रार्थना पत्र दिया गया था। प्राधिकरण की ओर से मुआवजा दिया जाना है, लेकिन वकीलों ने मुआवजा राशि बढ़ाने की मांग की है। मांगें पूरी नहीं होते देख वकील आंदोलन को राज्य स्तर का बनाने की तैयारी कर रहे थे। इसके लिए प्रदेश के समस्त जिलों की जिला बार एसोसिएशन को आंदोलन के लिए पत्र भी लिखे जा रहे थे।
इन मांगों पर बनी सहमति
जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक सिंह रावत ने बताया कि शासन और प्रशासन ने वकीलों की सभी मांगें मान ली हैं। इसके तहत मृतक वकील पुरुषोत्तम जाखेटिया के परिवार को 25 लाख रुपए मुआवजा देने, परिवार में एक सदस्य को संविदा पर नौकरी देने, जाखेटिया के घर के पास स्थित शराब का ठेका हटाने और रात्रि 10 बजे बाद डीजे पर पूर्ण रूप से अंकुश लगाने की मांग मान ली गई है। प्रशासन के साथ हुई बैठक में मृतक वकील के परिजन भी शामिल थे। परिजनों की संतुष्टि के बाद जिला बार एसोसिएशन ने आंदोलन को स्थगित करने का निर्णय लिया है, जबकि अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट को लागू करने की मांग सरकार से जारी रहेगी।
उन्होंने बताया कि वरिष्ठ अधिवक्ता पुरुषोत्तम जाखेटिया पर हमला होने के बाद से ही वकीलों में जबरदस्त आक्रोश था। वकील आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे। 7 मार्च को सुबह वकील जाखेटिया की मौत हो गई। इसके बाद से ही वकीलों में जबरदस्त गुस्सा था। इसको लेकर अजमेर ब्यावर, पुष्कर और नसीराबाद को भी बंद करवाया गया। प्रशासन से रविवार को सकारात्मक बातचीत हुई, जिसमें मृतक के परिजन भी शामिल थे। प्रकरण में उच्च स्तरीय जांच होगी और अन्य आरोपियों की भी गिरफ्तारी जल्द होगी।