
राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को लेकर देश में फिर से सियासी बहस तेज हो गई है। इस गीत की रचना के 150 साल पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक विशेष कार्यक्रम में हिस्सा लिया और इसे देशभक्ति का प्रतीक बताया। लेकिन इस बीच, बीजेपी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस ने वंदे मातरम में देवी दुर्गा के श्लोक हटाकर इसे धार्मिक रूप से तटस्थ बनाने का बहाना बनाते हुए सांप्रदायिक एजेंडा बढ़ाया।
बीजेपी ने कांग्रेस पर साधा निशाना
भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता सीआर केसवन ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट साझा करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि 1937 के फैजपुर अधिवेशन में कांग्रेस ने केवल संक्षिप्त वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया और इसके मूल छंदों में देवी दुर्गा का उल्लेख हटा दिया।
केसवन ने कहा कि वंदे मातरम हमारे देश की एकता और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। अंग्रेजों ने इसे गाने पर प्रतिबंध लगाया था, लेकिन यह किसी धर्म या भाषा विशेष से संबंधित नहीं था। बावजूद इसके, कांग्रेस ने धार्मिक आधार पर जानबूझकर गीत के छंदों में बदलाव किया, जिसमें देवी मां दुर्गा की स्तुति शामिल थी।
नेहरू से राहुल गांधी तक निशाना
पोस्ट में साझा किए गए ऐतिहासिक पत्रों का हवाला देते हुए बीजेपी ने बताया कि 1 सितंबर 1937 को नेहरू ने लिखा था कि वंदे मातरम के शब्दों को देवी से जोड़ना “बेतुका” है और इसे राष्ट्रीय गीत के रूप में उपयुक्त नहीं माना जा सकता।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने हमेशा वंदे मातरम के मूल संस्करण की वकालत की। इसके बावजूद, 20 अक्टूबर 1937 को नेहरू ने नेताजी को पत्र लिखकर दावा किया कि वंदे मातरम की पृष्ठभूमि मुसलमानों को नाराज कर सकती है। उन्होंने लिखा कि विरोध प्रदर्शन में ठोस तथ्य सामने आते हैं और सांप्रदायिक प्रवृत्ति वाले लोग इससे प्रभावित होते हैं।
बीजेपी ने इसे आधुनिक संदर्भ से जोड़ते हुए कहा कि मार्च 2024 में राहुल गांधी ने भी हिंदू परंपरा और उत्सवों के प्रति नकारात्मक टिप्पणी की। उन्होंने छठ पूजा को नाटक बताकर अपमानित करने की बात कही, जिससे करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुईं। बीजेपी ने इसे नेहरू की हिंदू-विरोधी मानसिकता का आधुनिक प्रतिरूप बताया।














