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‘वंदे मातरम्’ पर नई गाइडलाइन लागू: कब, कहां और कितना होगा गायन? खड़े रहना अनिवार्य है या नहीं—जानिए पूरी जानकारी

‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर केंद्र सरकार ने नई गाइडलाइन जारी की है। जानिए अब कितने छंद गाए जाएंगे, कार्यक्रमों में क्या होगा क्रम, खड़े होना अनिवार्य है या नहीं और किन-किन अवसरों पर लागू होंगे ये नियम।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Wed, 11 Feb 2026 9:56:45

‘वंदे मातरम्’ पर नई गाइडलाइन लागू: कब, कहां और कितना होगा गायन? खड़े रहना अनिवार्य है या नहीं—जानिए पूरी जानकारी

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन और प्रस्तुति को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। 28 जनवरी 2026 को जारी आधिकारिक आदेश के जरिए इन नए प्रोटोकॉल को लागू किया गया है। सरकार का कहना है कि जिस तरह ‘जन गण मन’ के लिए स्पष्ट नियम निर्धारित हैं, उसी तरह ‘वंदे मातरम्’ के लिए भी एक समान और औपचारिक व्यवस्था तय करना आवश्यक था, ताकि सभी सरकारी कार्यक्रमों में एकरूपता बनी रहे।

क्या बदला है नए नियमों में?

गृह मंत्रालय द्वारा जारी गाइडलाइन के मुताबिक, अब किसी भी सरकारी या आधिकारिक समारोह में यदि ‘वंदे मातरम्’ गाया या बजाया जाता है, तो उसके सभी छह छंदों को प्राथमिकता दी जाएगी। अब तक आमतौर पर केवल शुरुआती दो छंद ही गाए जाते थे, लेकिन नए आदेश में मूल और विस्तृत स्वरूप को मानक माना गया है। हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया है कि परिस्थितियों के अनुसार प्रस्तुति की व्यावहारिक व्यवस्था की जा सकती है, लेकिन आधिकारिक मानक पूर्ण गीत ही रहेगा।

सरकारी आयोजनों में ‘वंदे मातरम्’ के छहों अंतरों के गायन या वादन की निर्धारित अवधि 3 मिनट 10 सेकंड तय की गई है। इससे कार्यक्रमों में समय और स्वरूप को लेकर स्पष्टता बनी रहेगी।

‘वंदे मातरम्’ और ‘जन गण मन’ का क्रम

यदि किसी कार्यक्रम में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ दोनों प्रस्तुत किए जाते हैं, तो अब उनके क्रम को भी औपचारिक रूप से तय कर दिया गया है। दिशा-निर्देशों के अनुसार पहले ‘वंदे मातरम्’ गाया या बजाया जाएगा, उसके बाद ‘जन गण मन’ प्रस्तुत किया जाएगा। इस बदलाव का उद्देश्य सभी सरकारी कार्यक्रमों में एक समान प्रोटोकॉल सुनिश्चित करना है।

खड़े होना अनिवार्य है या नहीं?

सम्मान और शिष्टाचार से जुड़े प्रावधानों में यह कहा गया है कि ‘वंदे मातरम्’ के गायन या वादन के दौरान उपस्थित लोगों को आदरपूर्वक खड़ा होना चाहिए। यह व्यवस्था राष्ट्रीय गान के समय अपनाए जाने वाले प्रोटोकॉल के समान है। सरकार का तर्क है कि राष्ट्रीय गीत के प्रति भी वही सम्मान भाव प्रदर्शित होना चाहिए जो राष्ट्रगान के समय होता है।

किन-किन अवसरों पर बजेगा ‘वंदे मातरम्’?

नई गाइडलाइन के अनुसार, तिरंगा फहराने के अवसरों पर, राष्ट्रपति के आगमन और उनके राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले एवं बाद में, राज्यपालों के कार्यक्रमों में, तथा अन्य महत्वपूर्ण सरकारी आयोजनों में ‘वंदे मातरम्’ का वादन किया जाएगा। इसके अलावा, पद्म पुरस्कार जैसे नागरिक सम्मान समारोहों और उन सभी कार्यक्रमों में जहां राष्ट्रपति की उपस्थिति हो, वहां भी इसे शामिल किया जाएगा।

कहां लागू होंगे ये निर्देश?

ये दिशा-निर्देश मुख्य रूप से केंद्र और राज्य सरकारों के आधिकारिक समारोहों, राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय आयोजनों, शैक्षणिक संस्थानों के औपचारिक कार्यक्रमों और अन्य सरकारी प्रोटोकॉल वाले आयोजनों पर लागू होंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कोई दंडात्मक कानून नहीं है, बल्कि प्रशासनिक मार्गदर्शन है, जिसका उद्देश्य सम्मानजनक और व्यवस्थित प्रस्तुति सुनिश्चित करना है।

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