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देश में 56% वाहन बिना बीमा के सड़कों पर दौड़ रहे, सुप्रीम कोर्ट सख्त, बिना इंश्योरेंस गाड़ियों पर कार्रवाई तेज करने के निर्देश

देश में 56% वाहन बिना बीमा के चल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए ऑटोमैटिक ई-चालान, पेट्रोल-डीजल रोकने और बीमा नियमों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Wed, 05 Aug 2026 11:10:37

देश में 56% वाहन बिना बीमा के सड़कों पर दौड़ रहे, सुप्रीम कोर्ट सख्त, बिना इंश्योरेंस गाड़ियों पर कार्रवाई तेज करने के निर्देश

देशभर की सड़कों पर चल रहे करोड़ों वाहनों में से आधे से अधिक के पास वैध बीमा नहीं है। इस गंभीर स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित विभागों को प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि बिना बीमा वाले वाहनों पर सख्ती जरूरी है, ताकि सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को समय पर मुआवजा मिल सके और मोटर वाहन कानून का सही तरीके से पालन हो। अदालत ने ऐसे कई सुझाव भी दिए हैं, जिनमें पेट्रोल पंपों पर ईंधन उपलब्ध कराने को वाहन के वैध बीमा से जोड़ना और हाईवे पर लगे कैमरों के जरिए स्वतः ई-चालान जारी करना शामिल है।

देश में 30 करोड़ से ज्यादा वाहन, लेकिन 16.5 करोड़ के पास नहीं है वैध बीमा

यह मामला जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान सामने आया। सुनवाई में अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि भारत में पंजीकृत लगभग 30.4 करोड़ वाहनों में से करीब 16.5 करोड़ वाहन बिना वैध इंश्योरेंस के चल रहे हैं। यानी लगभग 56 प्रतिशत वाहन बीमा सुरक्षा से बाहर हैं, जिनमें सबसे बड़ी संख्या दोपहिया वाहनों की है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में होने वाली लगभग 22 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाओं में ऐसे वाहन शामिल होते हैं जिनका बीमा नहीं होता। अदालत ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के तहत थर्ड-पार्टी बीमा को अनिवार्य बनाने का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब सभी वाहन मालिक इस नियम का पालन करें। अन्यथा दुर्घटना पीड़ितों को मुआवजा पाने के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

वैध बीमा नहीं तो पेट्रोल-डीजल मिलने में आ सकती है दिक्कत


सुप्रीम कोर्ट ने बीमा नियामक इरडा और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को एक पायलट परियोजना पर विचार करने का सुझाव दिया है। इस प्रस्ताव के तहत वाहनों को पेट्रोल या डीजल उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को उनके वैध बीमा रिकॉर्ड से जोड़ा जा सकता है। यदि किसी वाहन का इंश्योरेंस समाप्त हो चुका है या वैध नहीं है, तो ऐसे वाहन को पेट्रोल पंप पर ईंधन देने से रोका जा सकता है।

अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इस सुझाव पर सिद्धांततः सहमति जताई है। कोर्ट का मानना है कि इससे बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान आसान होगी और वाहन मालिक समय पर अपना बीमा नवीनीकरण कराने के लिए प्रेरित होंगे।

ANPR कैमरों से होगी पहचान, बिना बीमा वाहन का अपने आप कटेगा ई-चालान

सुप्रीम कोर्ट ने मोटर वाहन कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया है। अदालत ने निर्देश दिया कि राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर लगाए गए ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरों को 'इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो' और 'वाहन' (VAHAN) पोर्टल के डेटाबेस से जोड़ा जाए। इससे कैमरे किसी भी बिना बीमा वाले वाहन की तुरंत पहचान कर सकेंगे और उसके नाम स्वतः ई-चालान जारी किया जा सकेगा।

वर्तमान में ANPR कैमरों का उपयोग ओवरस्पीडिंग, रेड लाइट जंप करने और गलत दिशा में वाहन चलाने जैसे ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन की निगरानी के लिए किया जाता है। अदालत ने यह भी कहा कि ट्रैफिक पुलिस को हैंडहेल्ड डिवाइस या विशेष मोबाइल एप उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वे मौके पर ही किसी भी वाहन का बीमा स्टेटस जांच सकें।

बिना बीमा वाहन चलाने पर क्या है कानूनी कार्रवाई?

मोटर वाहन अधिनियम के तहत बिना वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के वाहन चलाना कानून का उल्लंघन माना जाता है। ऐसे मामलों में पहली और दूसरी बार पकड़े जाने पर अलग-अलग दंड का प्रावधान किया गया है।

पहली बार उल्लंघन पर: तीन महीने तक की जेल, या 2,000 रुपये तक का जुर्माना, अथवा दोनों सजा एक साथ दी जा सकती हैं।
दोबारा उल्लंघन पर: तीन महीने तक की जेल, या 4,000 रुपये तक का जुर्माना, या फिर दोनों दंड लगाए जा सकते हैं।

नए वाहनों के लिए थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की अवधि भी बढ़ाई गई

सुप्रीम कोर्ट इससे पहले वर्ष 2018 में नए वाहनों के लिए लंबी अवधि के थर्ड-पार्टी बीमा को अनिवार्य कर चुका है। उस समय नई कारों के लिए तीन वर्ष और नए दोपहिया वाहनों के लिए पांच वर्ष का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य किया गया था। हालांकि अब भी बड़ी संख्या में वाहन बिना बीमा के सड़कों पर चल रहे हैं। इसे देखते हुए अदालत ने इस व्यवस्था को और सख्त बनाने का फैसला किया है।

नए निर्देशों के अनुसार अब नई कार खरीदने वालों को चार वर्ष का और नए दोपहिया वाहन खरीदने वालों को छह वर्ष का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य रूप से लेना होगा। अदालत का मानना है कि इस कदम से सड़क सुरक्षा मजबूत होगी, दुर्घटना पीड़ितों को समय पर मुआवजा मिलने में आसानी होगी और बिना बीमा वाहन चलाने की प्रवृत्ति पर भी प्रभावी रोक लग सकेगी।

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