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चीनी के एक्सपोर्ट पर केंद्र का बड़ा एक्शन, सितंबर 2026 तक लगाया बैन

मिडिल ईस्ट तनाव और संभावित उत्पादन संकट के बीच केंद्र सरकार ने कच्ची, सफेद और रिफाइंड चीनी के निर्यात पर 30 सितंबर 2026 तक प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार का कहना है कि घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए यह फैसला जरूरी है।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Thu, 14 May 2026 7:28:34

चीनी के एक्सपोर्ट पर केंद्र का बड़ा एक्शन, सितंबर 2026 तक लगाया बैन

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक बाजार में बनी अनिश्चितता के बीच भारत सरकार ने चीनी निर्यात को लेकर बड़ा और सख्त फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने कच्ची, सफेद और रिफाइंड चीनी के एक्सपोर्ट पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह प्रतिबंध 30 सितंबर 2026 तक लागू रहेगा या फिर अगले आदेश आने तक जारी रह सकता है। सरकार का मानना है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और संभावित उत्पादन संकट को देखते हुए घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना बेहद जरूरी है।

विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) की ओर से बुधवार देर रात जारी अधिसूचना में इस फैसले की औपचारिक घोषणा की गई। इससे पहले सरकार सीमित मात्रा में चीनी निर्यात की अनुमति दे चुकी थी, क्योंकि उस समय उत्पादन अधिशेष रहने का अनुमान लगाया जा रहा था। लेकिन अब हालात बदलते दिखाई दे रहे हैं, जिसके चलते नीति में अचानक यह बड़ा बदलाव किया गया है।

सरकार को क्यों सताने लगी चिंता?

सरकार के सामने सबसे बड़ी चिंता आने वाले मौसम और वैश्विक हालात को लेकर है। आशंका जताई जा रही है कि यदि इस साल मानसून सामान्य से कमजोर रहता है, तो गन्ना उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण उर्वरकों और अन्य जरूरी कृषि आपूर्ति पर भी असर पड़ने की संभावना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खाद की सप्लाई बाधित होती है और बारिश कम होती है, तो 2026-27 सीजन में चीनी उत्पादन में गिरावट आ सकती है। यही वजह है कि सरकार अभी से एहतियाती कदम उठाने में जुट गई है ताकि भविष्य में घरेलू बाजार में कीमतों और उपलब्धता को लेकर संकट न पैदा हो।

क्या कहता है चीनी का गणित?

सरकारी अनुमान के मुताबिक 2025-26 सीजन में देश का कुल चीनी उत्पादन लगभग 275 लाख टन रहने की संभावना है। इसके साथ पिछले सीजन का करीब 50 लाख टन पुराना स्टॉक भी उपलब्ध रहेगा। इस तरह कुल मिलाकर देश के पास 325 लाख टन चीनी की उपलब्धता होगी।

दूसरी तरफ घरेलू खपत करीब 280 लाख टन रहने का अनुमान लगाया गया है। ऐसे में सीजन खत्म होने तक केवल 45 लाख टन का स्टॉक बचने की संभावना है। यह स्तर पिछले कई वर्षों में सबसे कम माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार 2016-17 के बाद पहली बार चीनी का बफर स्टॉक इतना कमजोर नजर आ रहा है। सरकार इसी ‘लो बफर’ स्थिति को लेकर सतर्क हो गई है और किसी भी संभावित संकट से पहले निर्यात रोकने का फैसला लिया गया है।

कुछ मामलों में मिलेगी राहत

हालांकि सरकार ने पूरी तरह से सभी निर्यात पर ताला नहीं लगाया है। DGFT ने अपनी अधिसूचना में कुछ विशेष परिस्थितियों में छूट देने की बात भी कही है।

यूरोपीय संघ (EU) और अमेरिका को पहले से तय ‘प्रेफरेंशियल कोटा’ के तहत चीनी सप्लाई जारी रहेगी। इसके अलावा यदि किसी देश की खाद्य सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार विशेष अनुमति देती है, तो वहां भी निर्यात संभव होगा।

इतना ही नहीं, जिन खेपों की लोडिंग 13 मई से पहले शुरू हो चुकी थी या जिनका माल पहले ही कस्टम विभाग को सौंपा जा चुका था, उन पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा। यानी पहले से प्रक्रिया में शामिल निर्यातकों को कुछ राहत देने की कोशिश की गई है।

मिलों और व्यापारियों की बढ़ सकती है मुश्किल

सरकार इससे पहले 15.9 लाख टन चीनी निर्यात की मंजूरी दे चुकी थी। बताया जा रहा है कि करीब 8 लाख टन चीनी के लिए सौदे भी हो चुके थे, लेकिन इनमें से केवल 6 लाख टन की ही शिपमेंट पूरी हो पाई।

अब अचानक लगे प्रतिबंध से चीनी मिलों, निर्यातकों और व्यापारियों के सामने कानूनी और वित्तीय चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। कई कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय अनुबंधों, भुगतान और सप्लाई प्रतिबद्धताओं को लेकर मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

वैश्विक बाजार में भी दिखा असर

भारत के इस फैसले का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तुरंत दिखाई दिया। न्यूयॉर्क में कच्ची चीनी के वायदा भाव में करीब 2 फीसदी की तेजी दर्ज की गई, जबकि लंदन में सफेद चीनी की कीमतें लगभग 3 फीसदी तक चढ़ गईं।

दरअसल, भारत दुनिया में ब्राजील के बाद दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है। ऐसे में भारत की निर्यात नीति में किसी भी बदलाव का असर सीधे वैश्विक बाजार पर पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले महीनों में उत्पादन को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है, तो अंतरराष्ट्रीय चीनी बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

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