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सोनम वांगचुक ने बताया क्यों नहीं बनना चाहते शिक्षा मंत्री, बोले- मौजूदा राजनीतिक हालात में कोई भी आएगा तो फेल होगा

सोनम वांगचुक ने शिक्षा मंत्री बनने के सवाल पर कहा कि उन्हें पद में रुचि नहीं है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था और बीजेपी-कांग्रेस दोनों सरकारों पर सवाल उठाए।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Mon, 31 Aug 2026 8:56:56

सोनम वांगचुक ने बताया क्यों नहीं बनना चाहते शिक्षा मंत्री, बोले- मौजूदा राजनीतिक हालात में कोई भी आएगा तो फेल होगा

जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने शिक्षा मंत्री बनने की संभावना पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। एक पॉडकास्ट में उनसे पूछा गया कि अगर उन्हें देश का शिक्षा मंत्री बनने का अवसर मिले तो वह क्या करेंगे। इसके जवाब में वांगचुक ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में किसी भी व्यक्ति के लिए प्रभावी ढंग से काम करना मुश्किल होगा और उनकी खुद की दिलचस्पी किसी पद या ओहदे में नहीं है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी पद पर पहुंचना नहीं, बल्कि सकारात्मक बदलाव लाना है।

प्रखर गुप्ता के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान वांगचुक ने अपने आंदोलनों, देश की शिक्षा व्यवस्था और राजनीतिक व्यवस्था से जुड़े सवालों पर विस्तार से अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि वह किसी राजनीतिक दल के पक्ष में नहीं हैं और सही को सही तथा गलत को गलत कहने की कोशिश करते हैं।

शिक्षा मंत्री बनने पर क्या बोले वांगचुक?


शिक्षा मंत्री बनने के सवाल पर सोनम वांगचुक ने साफ तौर पर कहा कि उन्हें पद हासिल करने में रुचि नहीं है। उनके मुताबिक, मौजूदा राजनीतिक माहौल में कोई भी व्यक्ति सत्ता में आकर कुछ खास नहीं कर पाएगा।

उन्होंने कहा कि वह किसी पद या पोजीशन में दिलचस्पी नहीं रखते। उनका लक्ष्य बदलाव लाना है। वांगचुक ने यह भी सवाल उठाया कि जिस राजनीतिक माहौल में शिक्षा को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं मिल रही, वहां शिक्षा मंत्री बनकर वह कितना प्रभावी बदलाव कर पाएंगे।

सरकारी स्कूलों की हालत पर जताई नाराजगी

वांगचुक ने देश की शिक्षा व्यवस्था पर बात करते हुए मौजूदा सरकार के साथ-साथ पिछली कांग्रेस सरकार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने एक गांव के स्कूल की तस्वीर का उदाहरण देते हुए सरकारी स्कूलों की स्थिति पर चिंता जताई।

उन्होंने कहा कि यह समस्या केवल पिछले 12 वर्षों में पैदा नहीं हुई है। उनके मुताबिक, इससे पहले लंबे समय तक सत्ता में रही कांग्रेस सरकार भी सरकारी स्कूलों और गरीब बच्चों की शिक्षा की स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं ला सकी।

वांगचुक ने कहा कि उन्हें सभी सरकारों से नाराजगी है, लेकिन कांग्रेस से विशेष रूप से इसलिए क्योंकि वह लंबे समय तक सत्ता में रही। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अपने करीब 40 वर्षों के काम का भी जिक्र किया।

बीजेपी या कांग्रेस के पक्ष में होने के आरोप पर जवाब


सोनम वांगचुक ने कहा कि अलग-अलग मौकों पर लोग उन्हें कभी बीजेपी के साथ तो कभी कांग्रेस के साथ जोड़कर देखते हैं। उनके मुताबिक, दोनों पक्षों से समान रूप से सवाल किए जाने को वह इस बात के संकेत के तौर पर देखते हैं कि वह किसी एक राजनीतिक खेमे के साथ नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि वह सही को सही और गलत को गलत कहने की कोशिश करते हैं। इसी वजह से अलग-अलग राजनीतिक विचार रखने वाले लोग उनके रुख को अपने-अपने नजरिए से देखते हैं।

संसद और राजनीतिक व्यवस्था पर भी सवाल

पॉडकास्ट में वांगचुक ने संसद में आपराधिक मामलों का सामना कर रहे सांसदों को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में सांसदों के खिलाफ मामले दर्ज हैं और कुछ पर दुष्कर्म, हत्या तथा अपहरण जैसे गंभीर मामलों के आरोप हैं।

उनका कहना था कि ऐसे माहौल में शिक्षा को प्राथमिकता मिलने को लेकर सवाल खड़े होते हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री बनकर वह क्या हासिल कर पाएंगे और कहीं ऐसा न हो कि पद पर रहते हुए बदलाव न ला पाने के कारण वह खुद को ही दोष देते रहें।

पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन का भी किया जिक्र


सोनम वांगचुक ने हाल में पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शन में भी हिस्सा लिया था। जून और जुलाई में दिल्ली में हुए इस आंदोलन के दौरान वह करीब 25 दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठे थे।

इससे पहले 13 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके से पहले जारी एक वीडियो संदेश में भी उन्होंने राजनीतिक नेतृत्व चुनने के तरीके में शांतिपूर्ण क्रांति की जरूरत बताई थी। उन्होंने कहा था कि अगर देश को 2047 तक एक सम्मानजनक राष्ट्र बने रहना है तो बड़े बदलाव आवश्यक हैं।

वांगचुक ने नागरिकों से ऐसे निःस्वार्थ, निडर, चरित्रवान और योग्य पुरुषों एवं महिलाओं के नाम सुझाने की अपील भी की थी, जो देश के भविष्य को आकार देने में योगदान दे सकें।

यह भी पढ़ें: राहुल गांधी के हाथों जूस पीकर अनशन खत्म करना चाहते थे सोनम वांगचुक, बताया 20 जुलाई का पूरा प्लान

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