
बीते कुछ हफ्तों में रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद चांदी के भाव में जबरदस्त करेक्शन देखने को मिल रहा है। सोमवार के कारोबार में MCX पर चांदी करीब 6 फीसदी यानी लगभग 17,000 रुपये लुढ़क गई। 2 फरवरी को चांदी का भाव गिरकर 2,48,799 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया। इससे पहले MCX सिल्वर फ्यूचर्स 4 लाख से 4.20 लाख रुपये प्रति किलो के ऐतिहासिक दायरे तक चढ़ चुके थे, लेकिन मौजूदा गिरावट के बाद कीमतें फिर से 2.50 लाख से 2.60 लाख रुपये प्रति किलो के आसपास आ गई हैं।
आखिर क्यों फिसली चांदी की कीमत?
चांदी में आई इस तेज गिरावट को लेकर एनरिच मनी के सीईओ पोनमुदी आर. का मानना है कि यह हालिया रिकॉर्ड तेजी के बाद एक स्वाभाविक कंसोलिडेशन फेज है। उनके अनुसार, कॉमेक्स सिल्वर फिलहाल 75 से 85 डॉलर के अहम कंसोलिडेशन रेंज में कारोबार कर रहा है, जबकि इससे पहले कीमतें 121.6 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर से ऊपर निकल चुकी थीं।
पोनमुदी आर. ने बताया कि दीर्घकालिक नजरिए से चांदी अब भी तेजी के ट्रेंड में बनी हुई है, लेकिन हाल की तेज उछाल के चलते यह ओवरबॉट ज़ोन में चली गई थी। इसी वजह से निवेशकों ने आक्रामक मुनाफावसूली की, जिसका असर कीमतों में तेज गिरावट के रूप में सामने आया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चांदी अभी भी अपने प्रमुख मूविंग एवरेज से ऊपर ट्रेड कर रही है, जो यह संकेत देता है कि यह गिरावट ट्रेंड रिवर्सल नहीं, बल्कि एक स्वस्थ ठहराव है।
सर्राफा बाजार में कितना गहरा है करेक्शन?
जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के ईबीजी–कमोडिटी एंड करेंसी रिसर्च के उपाध्यक्ष प्रणव मेर के अनुसार, अत्यधिक तेजी के बाद इस तरह की गिरावट पूरी तरह स्वाभाविक मानी जाती है। उन्होंने बताया कि घरेलू बाजार में भारी बिकवाली के चलते सोना अपने ऑल-टाइम हाई से लगभग 20 फीसदी नीचे आ चुका है, जबकि चांदी में यह गिरावट करीब 37 फीसदी तक पहुंच गई है।
हालांकि रविवार को वैश्विक वायदा बाजार बंद रहे, लेकिन इससे पहले शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी के फ्यूचर्स भाव घरेलू बाजार की तुलना में कहीं अधिक दबाव में नजर आए थे।
आगे बाजार का रुख क्या रहेगा?
कॉमेक्स में अप्रैल डिलीवरी वाले सोने के वायदा अनुबंध ने गुरुवार को 5,626.8 डॉलर प्रति औंस का नया रिकॉर्ड बनाया था। इसके बाद इसमें तेज करेक्शन देखने को मिला और यह 612 डॉलर या 11.39 फीसदी टूटकर 4,763.10 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। वहीं मार्च डिलीवरी वाली चांदी गुरुवार को 121.78 डॉलर प्रति औंस के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद शुक्रवार को 35.89 डॉलर या 31.37 फीसदी गिरकर 78.53 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।
निवेशकों के लिए संकेत क्या हैं?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पावेल के उस बयान, जिसमें उन्होंने निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना को कमजोर बताया, के बाद डॉलर में मजबूती आई है। इसका सीधा दबाव सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं पर पड़ा। इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पूर्व फेड गवर्नर केविन वार्श को अगला फेड चेयरमैन नामित किए जाने की घोषणा ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया है।
प्रणव मेर के मुताबिक, आने वाले कुछ कारोबारी सत्रों में सर्राफा बाजार में और तकनीकी सुधार यानी सीमित गिरावट देखने को मिल सकती है। हालांकि इसके बाद कीमतों में स्थिरता बनने और हल्की रिकवरी की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।













