
भारत–पाकिस्तान तनाव को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लगातार किए जा रहे दावों पर अब कांग्रेस नेता शशि थरूर ने खुलकर प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप यह कहते रहे हैं कि मई महीने में भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित सैन्य टकराव को रोकने के लिए उन्होंने व्यापार को हथियार की तरह इस्तेमाल किया था। हालांकि, शशि थरूर ने सोमवार को इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि शांति को बढ़ावा देने के लिए न तो व्यापार की कोई धमकी दी गई थी और न ही भारत पर किसी तरह का दबाव बनाया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत से कभी यह नहीं कहा गया कि ‘यह करो या वह करो’। थरूर ने यह बातें सरकार के विभिन्न स्तरों के अधिकारियों से हुई बातचीत के आधार पर कहीं।
गैर-सरकारी संगठन ‘कट्स इंटरनेशनल’ द्वारा आयोजित एक विचार-विमर्श कार्यक्रम में शशि थरूर ने ऑपरेशन सिंदूर और उससे जुड़े ट्रंप के बयानों पर अपना रुख दोहराया। यह रुख कांग्रेस के आधिकारिक बयान से कुछ अलग नजर आया, लेकिन थरूर ने अपनी बात तथ्यों और अपने अनुभवों के आधार पर रखी।
जब उनसे ट्रंप के दावों के बारे में सवाल किया गया, तो थरूर ने वॉशिंगटन दौरे का जिक्र किया, जहां वह एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे थे। उन्होंने कहा, “उस समय मुझसे भी यही सवाल पूछा गया था। मैंने साफ कहा था कि भारत को कभी मनाने या समझाने की जरूरत ही नहीं पड़ी। हमने 6–7 मई की रात को की गई कार्रवाई से यह स्पष्ट संकेत दे दिया था कि भारत पाकिस्तान के साथ किसी लंबे युद्ध में उलझना नहीं चाहता।”
शशि थरूर ने दोहराया कि सरकार के अलग-अलग स्तर के अधिकारियों से बातचीत के दौरान उन्हें कहीं भी यह संकेत नहीं मिला कि शांति स्थापित करने के लिए व्यापार को दबाव के तौर पर इस्तेमाल किया गया हो। न ही भारत को किसी तरह का अल्टीमेटम दिया गया था। उनके मुताबिक, पूरी सैन्य कार्रवाई बेहद सोच-समझकर और सीमित दायरे में की गई थी।
उन्होंने बताया कि भारत की रणनीति बेहद सटीक थी। “हमने आतंकी ठिकानों को बेहद सटीक तरीके से निशाना बनाया। इस दौरान पूरा ध्यान रखा गया कि पाकिस्तानी नागरिकों को नुकसान न पहुंचे। हमने सरकारी ठिकानों और यहां तक कि सैन्य इलाकों को भी सीधे निशाना बनाने से बचने की पूरी कोशिश की। अगर पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई करने का फैसला नहीं किया होता, तो वहीं पर यह अध्याय खत्म हो जाता।”
थरूर ने आगे कहा कि जब पाकिस्तान ने जवाबी कदम उठाए, तब भारत के पास भी प्रतिक्रिया देने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। “लेकिन जैसे ही पाकिस्तान की तरफ से रुकने का संकेत आया, हमने भी तुरंत अपनी कार्रवाई रोक दी। दरअसल, पाकिस्तान की ओर से ही यह संदेश आया था कि इस टकराव को आगे न बढ़ाया जाए, और उसी के बाद स्थिति को थाम लिया गया।”
डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका पर बोलते हुए शशि थरूर ने संतुलित बयान दिया। उन्होंने कहा, “मैं यह बात पूरी ईमानदारी से कह रहा हूं कि मैं बिना किसी आधिकारिक ब्रीफिंग के बोल रहा था। मुझे यह नहीं पता कि वॉशिंगटन और इस्लामाबाद के बीच पर्दे के पीछे क्या बातचीत हुई। अगर ट्रंप ने पाकिस्तान को शांति की मेज पर लाने में कोई सकारात्मक भूमिका निभाई है, तो एक शांति-प्रिय देश होने के नाते भारत उनका आभार व्यक्त करेगा।”
हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि सरकार के अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, ट्रंप के साथ भारत की कोई सीधी बातचीत नहीं हुई थी। न ही व्यापार को लेकर किसी तरह की धमकी दी गई थी और न ही भारत पर किसी प्रकार का दबाव बनाने की कोशिश की गई थी।
अंत में शशि थरूर ने यह स्पष्ट कर दिया कि वह फिलहाल सरकार का हिस्सा नहीं हैं और इसलिए उनके पास कोई गोपनीय या अंदरूनी जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके बयान सार्वजनिक बातचीत, अपने अनुभव और अधिकारियों से हुई चर्चाओं पर आधारित हैं, न कि किसी खुफिया या गोपनीय दस्तावेज पर।














