
कांग्रेस नेतृत्व को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है। जनशक्ति जनता दल के संस्थापक तेज प्रताप यादव ने पार्टी की कमान को लेकर बड़ा बयान देते हुए राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाए हैं और प्रियंका गांधी को बेहतर विकल्प बताया है। उनके इस बयान ने कांग्रेस के अंदरूनी समीकरणों और नेतृत्व शैली पर नई चर्चा छेड़ दी है।
पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान तेज प्रताप यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस को मजबूत तरीके से आगे बढ़ाने की क्षमता प्रियंका गांधी में है। उन्होंने प्रियंका की तुलना पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से करते हुए कहा कि उनमें वही दृढ़ता और नेतृत्व कौशल नजर आता है। वहीं राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ यात्राएं करने या प्रतीकात्मक गतिविधियों से राजनीति नहीं चलती। उन्होंने बिहार की मौजूदा राजनीतिक स्थिति का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि आखिर राहुल गांधी की रणनीति और उद्देश्य क्या है।
दरअसल, तेज प्रताप यादव का यह बयान राहुल गांधी द्वारा जद(यू) नेता नीतीश कुमार को ‘समझौता करने वाला नेता’ कहे जाने के बाद सामने आया है। हाल ही में नीतीश कुमार के सक्रिय राजनीति से अलग होने के बाद बीजेपी नेता सम्राट चौधरी ने बिहार के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली है, जिससे राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है।
यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। इससे पहले भी कांग्रेस के भीतर और बाहर से कई नेताओं ने इस मुद्दे को उठाया है। इसी साल जनवरी में कांग्रेस के पूर्व नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शकील अहमद ने भी पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र की कमी का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि पार्टी में फैसले लेने की प्रक्रिया केंद्रीकृत हो गई है और वरिष्ठ नेताओं की भूमिका सीमित होती जा रही है।
शकील अहमद ने एक समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा था कि कांग्रेस में कई ऐसे अनुभवी नेता हैं जो राहुल गांधी के राजनीति में सक्रिय होने से पहले से पार्टी से जुड़े हुए हैं, लेकिन उनके साथ संवाद की कमी महसूस होती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी में कुछ निर्णय ऐसे होते हैं जिनमें व्यापक चर्चा की बजाय एकतरफा रुख अपनाया जाता है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि संगठन में युवाओं को आगे लाने के नाम पर पुराने और अनुभवी नेताओं को किनारे करने की कोशिश की जा रही है।
तेज प्रताप यादव और शकील अहमद जैसे नेताओं के बयान इस बात की ओर इशारा करते हैं कि कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर असहमति और असंतोष का माहौल बना हुआ है। साथ ही, प्रियंका गांधी को पार्टी की कमान सौंपने की मांग अब सिर्फ कांग्रेस के अंदर ही नहीं, बल्कि अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच भी उठने लगी है। यह स्थिति पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आ रही है, जहां उसे संगठनात्मक एकता और प्रभावी नेतृत्व दोनों को संतुलित करना होगा।














