आरएसएस को लेकर की गई कथित टिप्पणी पर कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे और यूथ कांग्रेस नेता मोहम्मद नलपाड की कानूनी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। बेंगलुरु की एक अदालत ने दोनों नेताओं को समन जारी करते हुए 21 जुलाई 2026 तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह कार्रवाई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर दायर आपराधिक मानहानि की शिकायत पर सुनवाई के बाद की गई है।
मामले की सुनवाई करते हुए अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) संदीप पाटिल ने प्रथम दृष्टया माना कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 356 के तहत आपराधिक मानहानि का मामला बनता है। अदालत ने इसी आधार पर प्रियांक खरगे और मोहम्मद नलपाड के खिलाफ संज्ञान लेते हुए समन जारी करने का आदेश दिया। हालांकि, इसी मामले में नामजद कर्नाटक के पूर्व मंत्री दिनेश गुंडू राव के खिलाफ अदालत ने आगे की कार्रवाई करने से इनकार कर दिया।
अदालत ने आदेश में क्या कहा?
अपने आदेश में अदालत ने कहा कि आरोपी संख्या-1 प्रियांक खरगे और आरोपी संख्या-3 मोहम्मद नलपाड के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 356 के तहत दंडनीय अपराध का प्रथम दृष्टया मामला बनता है। कोर्ट ने कार्यालय को निर्देश दिया कि इस शिकायत को आपराधिक प्रकरण के रूप में दर्ज किया जाए और दोनों आरोपियों को समन जारी कर 21 जुलाई 2026 तक जवाब प्रस्तुत करने को कहा जाए।
अदालत के इस आदेश के बाद दोनों नेताओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना पक्ष रखना होगा। फिलहाल यह मामला कानूनी प्रक्रिया के शुरुआती चरण में है और आगे की सुनवाई में अदालत उपलब्ध साक्ष्यों और पक्षकारों के तर्कों के आधार पर अगला फैसला करेगी।
अक्टूबर 2025 के बयानों को लेकर दर्ज हुई शिकायत
यह शिकायत बेंगलुरु निवासी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता ए. तेजस द्वारा दायर की गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि अक्टूबर 2025 के दौरान प्रियांक खरगे और अन्य आरोपियों ने आरएसएस तथा उसके सदस्यों के खिलाफ कई कथित अपमानजनक और मानहानिकारक बयान दिए थे।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि 4 अक्टूबर 2025 को मंत्री रहते हुए प्रियांक खरगे ने कर्नाटक सरकार को एक पत्र लिखा था, जिसमें आरएसएस को सरकारी खेल मैदानों, स्कूलों और कॉलेज परिसरों के उपयोग की अनुमति नहीं देने की मांग की गई थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस पत्र को जानबूझकर मीडिया में सार्वजनिक किया गया और बाद में इसे प्रियांक खरगे के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी साझा किया गया, जिससे संगठन की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया।
सोशल मीडिया पोस्ट भी शिकायत का हिस्सा
याचिका में अक्टूबर 2025 के दौरान किए गए कुछ सोशल मीडिया पोस्ट का भी उल्लेख किया गया है। शिकायत के अनुसार, 13 और 14 अक्टूबर को साझा की गई एक पोस्ट में कथित तौर पर लिखा गया था कि, "आरएसएस सदस्य से कभी दोस्ती न करें। सिर्फ दोस्त ही नहीं, भले ही वह आपका परिवार का सदस्य हो। वे असल में दुर्व्यवहार करने वाले लोग होते हैं।"
शिकायतकर्ता का कहना है कि इस तरह की टिप्पणियां पूरे संगठन और उसके सदस्यों की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाली हैं। अदालत ने इन आरोपों का संज्ञान लेते हुए प्रियांक खरगे और मोहम्मद नलपाड से निर्धारित समय के भीतर जवाब मांगा है। वहीं, जब मीडिया ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे से प्रतिक्रिया जाननी चाही, तो उन्होंने इस विषय पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। अब इस मामले की अगली सुनवाई में दोनों पक्षों के तर्कों और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।













