
मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक तेल बाजार में आई अचानक बढ़ोतरी के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम करने का बड़ा कदम उठाया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के पीपीएसी (PPAC) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी 2026 में भारतीय बास्केट का औसत कच्चा तेल 69.01 डॉलर प्रति बैरल था, जो 24 मार्च तक बढ़कर 123.15 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गया। यानी केवल एक महीने में करीब 78% की भारी बढ़ोतरी दर्ज हुई।
इस तेज़ी से तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ गया था कि वे पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाएं। लेकिन सरकार ने आम जनता पर सीधा बोझ डालने के बजाय एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर राहत देने का विकल्प चुना।
International crude prices have gone through the roof in the last 1 month from around 70 dollars/barrel to around 122 dollars/barrel. Consequently, petrol and diesel prices for consumers have gone up all over the world. Prices have increased by around 30%-50% in South East Asian…
— Hardeep Singh Puri (@HardeepSPuri) March 27, 2026
केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने बताई वजहें
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें 70 डॉलर से बढ़कर 120 डॉलर के पार जा चुकी हैं। इसके चलते दुनिया के कई देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम 20% से 50% तक बढ़ चुके हैं। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में 30%-50% की बढ़ोतरी, उत्तरी अमेरिका में 30%, यूरोप में 20% और अफ्रीका में 50% तक की वृद्धि देखी गई।
सरकार के सामने विकल्प
पुरी ने बताया कि सरकार के पास दो रास्ते थे: पहला, अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुसार भारत में भी दाम बढ़ाना; दूसरा, राजस्व पर असर डालकर आम जनता को राहत देना।
पुरी ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने दूसरा रास्ता अपनाया। इसके तहत टैक्स में कटौती कर तेल कंपनियों के घाटे को कम करने का प्रयास किया गया, जो पेट्रोल पर लगभग 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया था। साथ ही, पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर टैक्स लगाया गया, ताकि घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित किया जा सके और कंपनियां केवल विदेशी मुनाफे पर ध्यान न दें।"
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की प्रतिक्रिया
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट को देखते हुए घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई है। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को बढ़ती कीमतों से सुरक्षा देना है। उन्होंने बताया कि डीजल के निर्यात पर 21.5 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 29.5 रुपये प्रति लीटर का टैक्स लगाया गया है, ताकि घरेलू आपूर्ति बनी रहे। संसद को इस कदम की पूरी जानकारी भी दे दी गई है।
आम आदमी की जेब पर असर
सरकार का मानना है कि इस फैसले से आम नागरिक को सीधे राहत मिलेगी और महंगाई पर भी नियंत्रण में मदद मिलेगी। क्योंकि ईंधन की कीमतें लगभग हर सेक्टर को प्रभावित करती हैं, इस कटौती से व्यापक आर्थिक लाभ भी मिलेगा।
In view of the West Asia crisis, the central excise duty on petrol and diesel for domestic consumption has been reduced by ₹10 per litre each. This will provide protection to consumers from rise in prices. Hon. PM @narendramodi has always ensured that citizens are protected from…
— Nirmala Sitharaman (@nsitharaman) March 27, 2026













