
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Shashi Tharoor ने भारत की विदेश नीति को लेकर एक अलग और स्पष्ट रुख सामने रखा है, जो उनकी ही पार्टी की लाइन से कुछ हद तक भिन्न नजर आता है। पाकिस्तान और अमेरिका से जुड़े हालिया घटनाक्रमों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान ने ईरान और अमेरिका के बीच किसी तरह की मध्यस्थता की भी है, तो इससे भारत की वैश्विक स्थिति पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। गौरतलब है कि कांग्रेस पार्टी अक्सर ऐसे मुद्दों को उठाकर केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल खड़े करती रही है।
पाकिस्तान को लेकर भारत के दृष्टिकोण पर भी थरूर ने दोटूक बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सीमा पार से होने वाली आतंकवादी गतिविधियों पर पाकिस्तान ठोस और निर्णायक कार्रवाई नहीं करता, तब तक भारत के रुख में कोई बदलाव संभव नहीं है। उनके अनुसार, सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भारत की नीति सख्त और स्पष्ट बनी रहनी चाहिए।
एक इंटरव्यू के दौरान थरूर ने पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों ने अतीत में कई मामलों में पाकिस्तान को नजरअंदाज किया है, जिसमें Osama bin Laden का मामला प्रमुख है, जो वर्षों तक वहां छिपा रहा। थरूर ने इसे पाकिस्तान के दोहरे रवैये का उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे इतिहास के चलते उस पर पूरी तरह भरोसा करना मुश्किल है।
उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत तब तक पाकिस्तान के साथ किसी भी तरह की बातचीत या कूटनीतिक नरमी नहीं दिखाएगा, जब तक वह अपने यहां सक्रिय आतंकी संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करता। 2008 Mumbai attacks का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इतने पुख्ता सबूत होने के बावजूद आज तक दोषियों को सजा नहीं मिलना गंभीर चिंता का विषय है।
ईरान-अमेरिका तनाव के संदर्भ में भारत की भूमिका पर पूछे गए सवाल के जवाब में थरूर ने कहा कि भारत के लगभग सभी प्रमुख देशों के साथ संतुलित और सकारात्मक संबंध हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पाकिस्तान की स्थिति इससे अलग है, इसलिए यदि उसने किसी स्तर पर मध्यस्थता की कोशिश की भी है, तो उससे भारत की प्रतिष्ठा पर कोई असर नहीं पड़ता।
वहीं, Donald Trump द्वारा भारत को लेकर की गई कथित विवादित टिप्पणी पर थरूर ने संयम बरतने की सलाह दी। उनका मानना है कि इस तरह की सोशल मीडिया टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया देने की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी कूटनीतिक गरिमा के अनुरूप ही प्रतिक्रिया देनी चाहिए और ऐसे मामलों को नजरअंदाज करना बेहतर होता है।
आपको बता दें कि 2016 Uri attack और 2019 Pulwama attack के बाद से भारत ने स्पष्ट रूप से यह नीति अपनाई है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत लगातार यह रुख रखता आया है कि जब तक पाकिस्तान Lashkar-e-Taiba और Jaish-e-Mohammed जैसे संगठनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं करता, तब तक रिश्तों में सुधार की गुंजाइश सीमित ही रहेगी।














