
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG एक बार फिर गंभीर विवादों में घिरती नजर आ रही है। MBBS, BDS और आयुष कोर्सों में एडमिशन दिलाने वाली इस परीक्षा को लेकर पेपर लीक की आशंकाएं तेज हो गई हैं। राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) की जांच में सामने आए तथ्यों ने लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। शुरुआती जांच में यह दावा किया जा रहा है कि परीक्षा से काफी पहले एक कथित “गेस पेपर” छात्रों के बीच फैल चुका था, जिसमें शामिल कई सवाल असली परीक्षा से मेल खाते पाए गए हैं।
3 मई 2026 को आयोजित हुई NEET UG परीक्षा को लेकर SOG ने खुलासा किया है कि एक प्रश्न बैंक या गेस पेपर परीक्षा से लगभग 15 दिन से लेकर एक महीने पहले तक विभिन्न छात्रों के बीच सर्कुलेट हो रहा था। इस दस्तावेज में करीब 410 प्रश्न शामिल थे। जांच एजेंसियों का कहना है कि इनमें से लगभग 120 सवाल सीधे तौर पर परीक्षा के केमिस्ट्री सेक्शन में दिखाई दिए। यही वजह है कि अब पूरे मामले को केवल संयोग मानने के बजाय संभावित पेपर लीक या संगठित चीटिंग नेटवर्क के नजरिए से देखा जा रहा है।
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा सामने आया कि 720 अंकों की परीक्षा में लगभग 600 नंबर के प्रश्न पहले ही कुछ छात्रों तक पहुंच चुके थे। हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जांच एजेंसियां इस एंगल को भी गंभीरता से खंगाल रही हैं। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो यह देश की मेडिकल प्रवेश प्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है।
राजस्थान पुलिस SOG के अतिरिक्त महानिदेशक Vishal Bansal ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जांच फिलहाल इस बात पर केंद्रित है कि कथित गेस पेपर के जरिए कहीं अवैध तरीके से परीक्षा में फायदा तो नहीं पहुंचाया गया। उनके अनुसार, “करीब 410 सवालों वाले एक गेस पेपर की जानकारी सामने आई है। इनमें लगभग 120 सवाल परीक्षा के केमिस्ट्री सेक्शन से पूरी तरह मेल खाते बताए जा रहे हैं। यह दस्तावेज परीक्षा से काफी पहले छात्रों के बीच पहुंच चुका था। अब हम यह पता लगाने में जुटे हैं कि इसके पीछे कोई आपराधिक साजिश या चीटिंग नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था।”
जांच में यह भी सामने आया है कि यह कथित गेस पेपर अलग-अलग कीमतों पर बेचा गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक परीक्षा से दो दिन पहले इसे करीब 5 लाख रुपये तक में कुछ छात्रों को उपलब्ध कराया गया, जबकि परीक्षा से ठीक एक रात पहले इसकी कीमत घटाकर 30 हजार रुपये तक कर दी गई थी। SOG के अधिकारियों ने हिरासत में लिए गए संदिग्धों के मोबाइल फोन में ऐसे कई मैसेज बरामद किए हैं, जिन पर “Forwarded Many Times” लिखा हुआ मिला। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह सामग्री बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच चुकी थी।
सूत्रों के अनुसार जांच की कड़ियां राजस्थान के चूरू जिले से जुड़े एक युवक तक पहुंच रही हैं, जो फिलहाल केरल के एक मेडिकल कॉलेज में MBBS की पढ़ाई कर रहा है। बताया जा रहा है कि उसने 1 मई को यह प्रश्न बैंक सीकर में रहने वाले अपने एक दोस्त को भेजा था। इसके बाद यह सामग्री एक पीजी संचालक तक पहुंची और फिर वहां रह रहे छात्रों, करियर काउंसलर्स और कई अन्य अभ्यर्थियों के बीच तेजी से फैल गई।
SOG अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश में जुटी है कि सवालों का यह सेट आखिर कहां से तैयार हुआ, इसे किसने लीक किया और किन-किन लोगों ने इसे फैलाने या बेचने में भूमिका निभाई। अधिकारियों का मानना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए गए, तो आने वाले दिनों में इस मामले में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।
अब सामने आ रही जानकारी के मुताबिक यह कथित “गेस पेपर” सबसे पहले केरल से बाहर आया और फिर राजस्थान के सीकर तक पहुंचा। जांच एजेंसियों को शक है कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा से जुड़े इस नेटवर्क ने अलग-अलग राज्यों में छात्रों और काउंसलर्स के जरिए सवालों को तेजी से फैलाया। बताया जा रहा है कि झुंझुनूं निवासी एक व्यक्ति, जो सीकर में कंसल्टेंसी चलाता है, उसके पास परीक्षा से लगभग एक महीने पहले ही यह कथित प्रश्न बैंक पहुंच चुका था।
जांच में यह भी सामने आया है कि यह गेस पेपर केवल कुछ चुनिंदा छात्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धीरे-धीरे कई लोगों के बीच शेयर किया गया। राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) अब इस पूरे चैन की कड़ियों को जोड़ने में लगी हुई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर सवाल सबसे पहले किस स्तर से लीक हुए और किन लोगों ने उन्हें आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई।
इस मामले में SOG ने पिछले चार दिनों के भीतर बड़ी कार्रवाई करते हुए देहरादून, सीकर और झुंझुनूं से कुल 13 संदिग्धों को हिरासत में लिया है। जांच एजेंसी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक पकड़े गए लोगों में अधिकांश करियर काउंसलर और एडमिशन नेटवर्क से जुड़े लोग हैं। अधिकारियों का मानना है कि ये लोग छात्रों तक कथित गेस पेपर पहुंचाने की कड़ी बन सकते हैं।
देहरादून से पकड़े गए संदिग्धों में सीकर निवासी राकेश मंडावरिया का नाम भी सामने आया है। बताया जा रहा है कि उसका पीपराली रोड स्थित एक बड़े कोचिंग संस्थान के सामने कंसल्टेंसी ऑफिस है। जांच एजेंसियों ने उसकी निशानदेही पर शनिवार देर शाम देहरादून से चार अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया। अब इन सभी से पूछताछ कर यह जानने की कोशिश की जा रही है कि प्रश्न बैंक की सप्लाई किस तरह की गई और इसके बदले कितनी रकम वसूली गई।
इस बीच परीक्षा आयोजित कराने वाली सरकारी एजेंसी National Testing Agency ने भी परीक्षा में गड़बड़ी की आशंका को स्वीकार किया है। NTA के अनुसार, 3 मई को आयोजित NEET UG परीक्षा के कुछ दिन बाद ही संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े इनपुट मिलने शुरू हो गए थे। एजेंसी ने बताया कि 7 मई को शुरुआती सूचनाएं मिलने के बाद पूरा मामला केंद्रीय जांच एजेंसियों को सौंप दिया गया।
फिलहाल राजस्थान SOG समेत कई एजेंसियां पूरे मामले की गहन जांच में जुटी हुई हैं। वहीं NTA ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और जांच पूरी होने तक संयम बनाए रखें। एजेंसी का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जा रहा है।














