
केंद्रीय बजट 2026 को लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर का रुख अचानक सख्त हो गया है। बीते कुछ महीनों से केंद्र सरकार की नीतियों पर संतुलित और कई मौकों पर सकारात्मक टिप्पणियां करने वाले थरूर ने बजट सामने आते ही असंतोष जाहिर कर दिया। उनका कहना है कि बजट भाषण में न तो स्पष्टता थी और न ही ठोस जानकारी, जिससे इसे ठीक से समझ पाना मुश्किल हो गया। शुरुआती प्रतिक्रिया के बाद थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सिलसिलेवार सात पोस्ट साझा कर अपनी नाराजगी खुलकर सामने रखी।
शशि थरूर ने अपनी पोस्ट में केरल की अनदेखी को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य को ऐसे नेतृत्व की दरकार है, जो दिल्ली में मलयाली समाज की आवाज मजबूती से उठा सके और राज्य में वास्तविक विकास सुनिश्चित कर सके। उनके मुताबिक फिलहाल केरल को न तो केंद्र में प्रभावी प्रतिनिधित्व मिल पा रहा है और न ही जमीनी स्तर पर वह प्रगति दिख रही है, जिसकी अपेक्षा की जाती है।
थरूर ने लिखा, “वित्त मंत्री का भाषण सुनते हुए एक अजीब-सी बेचैनी महसूस हुई। एक ऐसा राज्य जो देश के विदेशी मुद्रा भंडार, कुशल मानव संसाधन और सॉफ्ट पावर को लगातार मजबूत करता आया है, वही केरल केंद्र की आर्थिक सोच में कहीं दिखाई नहीं देता। चुनावी वर्ष में पेश किया गया यह ‘अदृश्य केरल वाला बजट’ अपने आप में बहुत कुछ कहता है।” उन्होंने इसे केवल संयोग नहीं, बल्कि एक गंभीर संकेत बताया।
कांग्रेस सांसद ने स्वास्थ्य क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा कि केरल जैसे राज्य के लिए AIIMS पर अब तक चुप्पी बनी रहना हैरान करने वाला है। देश के अलग-अलग हिस्सों में 22 AIIMS की स्थापना हो चुकी है, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं में अग्रणी राज्य को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। यही नहीं, ऑल इंडिया आयुर्वेद इंस्टीट्यूट से जुड़ा वादा भी सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आता है, क्योंकि बजट में केरल का नाम तक नहीं लिया गया। थरूर के अनुसार, एक मेडिकल हब के रूप में तिरुवनंतपुरम की संभावनाओं को योजनाबद्ध तरीके से दबाया जा रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि देशभर में 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा निस्संदेह एक सकारात्मक कदम है, लेकिन केरल को पूरी तरह इससे बाहर रखना समझ से परे है। केरल एक हाई-डेंसिटी आबादी वाला राज्य है, जहां आधुनिक परिवहन की सख्त जरूरत है। थरूर का आरोप है कि केंद्र सरकार राज्य की जरूरतों को नजरअंदाज करती है, जबकि राज्य सरकार ऐसे प्रोजेक्ट्स सामने रखती है, जिन्हें वह आर्थिक रूप से संभाल ही नहीं सकती। नतीजा यह है कि आम यात्रियों के हाथ कुछ नहीं लगता। उन्होंने साफ कहा, “हमें नए नामों और संक्षिप्त शब्दों की नहीं, बल्कि असली और काम की ट्रेनों की जरूरत है।”
विझिंजम पोर्ट का मुद्दा उठाते हुए शशि थरूर ने लिखा कि यह केवल केरल की परियोजना नहीं, बल्कि भारत के समुद्री व्यापार के लिए एक रणनीतिक राष्ट्रीय संपत्ति है। इसके बावजूद पोर्ट की लास्ट-माइल कनेक्टिविटी के लिए बजट में कोई ठोस आवंटन नहीं किया गया, जबकि देश के अन्य बंदरगाहों को भरपूर सहायता दी जा रही है। उन्होंने चेताया कि विझिंजम को राष्ट्रीय प्राथमिकता के बजाय केवल एक राज्य का मुद्दा मानना, रणनीतिक सोच की बड़ी विफलता को दर्शाता है।
As the MP for Kerala's capital, I see that our State Budget was built on a fantasy of central funds that today's Union Budget has explicitly failed to deliver. Sadly, the Malayali is caught between a Centre indifferent to our pain and a State Government in denial of its own…
— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) February 1, 2026
While three new NIPERs (National Institute of Pharmaceutical Education and Research) have been announced, there is no clarity on their location. With multiple NIPERs in northern and eastern India and only one serving the entire South (in Hyderabad), denying Kerala a NIPER,…
— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) February 1, 2026














