केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO के तहत अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को मौजूदा ₹15,000 की सीमा को बढ़ाने का फैसला किया। सरकार के अनुमान के मुताबिक इस बदलाव के बाद 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य EPFO कवरेज के दायरे में आ सकते हैं।
नई सीमा के तहत ₹25,000 तक की मासिक वेतन सीमा वाले कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा से जुड़े EPF प्रावधान लागू होंगे। ₹25,000 से अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों के मामले में इस सीमा से ऊपर का योगदान स्वैच्छिक रहेगा, जैसा कि कैबिनेट के फैसले की जानकारी में बताया गया है। इस बदलाव से PF बचत के साथ कर्मचारी पेंशन योजना यानी EPS और कर्मचारी जमा-सम्बद्ध बीमा योजना यानी EDLI का कवरेज भी अधिक कर्मचारियों तक पहुंचने की बात सरकार ने कही है।
12 साल बाद बदली EPFO की वेतन सीमा
EPFO की वैधानिक वेतन सीमा आखिरी बार सितंबर 2014 में बदली गई थी। उस समय इसे ₹6,500 से बढ़ाकर ₹15,000 प्रति माह किया गया था। अब करीब 12 साल बाद इसे ₹25,000 करने का फैसला लिया गया है। सरकार की ओर से बताया गया कि नई सीमा का उद्देश्य मौजूदा वेतन स्तर और औपचारिक रोजगार के विस्तार को ध्यान में रखते हुए EPFO कवरेज का दायरा बढ़ाना है।
51 लाख से ज्यादा नए कर्मचारियों को मिलेगा कवरेज
सरकार के अनुमान के अनुसार नई वेतन सीमा से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य EPFO कवरेज में शामिल होंगे। इसका मतलब यह है कि ऐसे कर्मचारी जिनकी संबंधित EPF वेतन राशि पहले ₹15,000 की सीमा से ऊपर होने के कारण अनिवार्य कवरेज से बाहर थी, नई सीमा लागू होने के बाद इसके दायरे में आ सकते हैं, बशर्ते वे EPFO कवरेज की अन्य पात्रता शर्तों के अंतर्गत आते हों।
यहां यह समझना जरूरी है कि ₹25,000 की सीमा का मतलब यह नहीं है कि हर कर्मचारी की कुल मासिक सैलरी ₹25,000 तक सीमित मानी जाएगी। यह EPFO कवरेज से जुड़ी वेतन सीमा है। PF की गणना में लागू वेतन घटकों और संबंधित नियमों के अनुसार योगदान निर्धारित किया जाता है।
PF में योगदान कैसे काम करेगा?
EPFO की मौजूदा व्यवस्था में कर्मचारी की ओर से सामान्य तौर पर EPF में 12 प्रतिशत योगदान किया जाता है और नियोक्ता की ओर से भी निर्धारित योगदान होता है। नियोक्ता के हिस्से का एक भाग कर्मचारी पेंशन योजना यानी EPS में जाता है और शेष हिस्सा EPF में जाता है। EPFO के उपलब्ध नियमों के अनुसार EPS में कर्मचारी की ओर से अलग से योगदान नहीं किया जाता, बल्कि यह नियोक्ता के हिस्से से किया जाता है।
नई ₹25,000 की सीमा लागू होने के बाद जिन नए कर्मचारियों को अनिवार्य कवरेज में शामिल किया जाएगा, उनके लिए संबंधित योगदान और पेंशन व्यवस्था नई वैधानिक सीमा के अनुरूप लागू होगी। हालांकि, वास्तविक PF कटौती किसी कर्मचारी के पूरे CTC पर सीधे 12 प्रतिशत लगाकर तय नहीं होती। इसमें लागू वेतन की परिभाषा और EPFO के नियम महत्वपूर्ण होते हैं।
▪️#Cabinet approves enhancement of EPFO wage ceiling from Rs.15,000 to Rs.25,000 per month.
— PIB India (@PIB_India) September 16, 2026
▪️The decision is expected to bring more than 51 lakh additional employees within the ambit of mandatory EPFO coverage.
▪️The annual Government outgo is estimated at about Rs.11,339… pic.twitter.com/Tx7jR0O2n7
उदाहरण से समझिए
मान लीजिए किसी कर्मचारी की EPF के लिए लागू मासिक वेतन राशि ₹20,000 है और वह नई सीमा के तहत EPFO कवरेज में आता है। 12 प्रतिशत की कर्मचारी हिस्सेदारी के आधार पर उसका मासिक योगदान ₹2,400 होगा। नियोक्ता की ओर से भी निर्धारित योगदान होगा, जिसमें लागू नियमों के अनुसार EPF और EPS के हिस्से शामिल होंगे।
इसी तरह ₹25,000 की लागू मासिक वेतन राशि पर कर्मचारी का 12 प्रतिशत योगदान ₹3,000 होगा। हालांकि, किसी व्यक्ति की वास्तविक वेतन पर्ची में PF कटौती कितनी होगी, यह उसके वेतन ढांचे और लागू EPFO प्रावधानों पर निर्भर करेगा।
सरकार पर कितना खर्च बढ़ेगा?
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, इस फैसले के बाद सरकार का अनुमानित वार्षिक खर्च करीब ₹11,339 करोड़ होगा। मौजूदा बजटीय सहायता करीब ₹10,250 करोड़ बताई गई है। पांच साल की अवधि में अनुमानित खर्च लगभग ₹56,696 करोड़ रहने की जानकारी दी गई है।
सरकार के अनुसार, नई सीमा से PF बचत, पेंशन सुरक्षा और बीमा सुरक्षा का दायरा बढ़ेगा। EPFO से जुड़े कर्मचारियों को EPF के अलावा पात्रता के अनुसार EPS और EDLI जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ भी मिलता है।
कब से लागू होगी नई ₹25,000 की सीमा?
16 सितंबर 2026 को कैबिनेट ने वेतन सीमा बढ़ाने को मंजूरी दी है। उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और ताजा रिपोर्टों में फैसले की घोषणा की पुष्टि हुई है, लेकिन कर्मचारियों के लिए वास्तविक योगदान किस तारीख से नई सीमा के आधार पर शुरू होगा, इसके लिए संबंधित श्रम एवं रोजगार मंत्रालय और EPFO की आगे की वैधानिक या प्रशासनिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। इसलिए केवल कैबिनेट मंजूरी के आधार पर किसी विशेष वेतन महीने से नई कटौती शुरू होने की तारीख बताना अभी उचित नहीं होगा।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद ₹15,000 से अधिक और ₹25,000 तक की लागू EPF वेतन राशि वाले कर्मचारियों के लिए EPFO कवरेज का दायरा बढ़ेगा। सरकार का अनुमान है कि इससे 51 लाख से अधिक नए कर्मचारी अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा कवरेज में आ सकते हैं।













