
दुबई एयर शो के शुक्रवार को हुए हादसे में भारतीय वायु सेना (IAF) के वरिष्ठ पायलट विंग कमांडर नमन स्याल शहीद हो गए। यह दुर्घटना तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA Mk-1) के साथ IAF में कमीशन के बाद हुई दूसरी घटना है। विंग कमांडर नमन स्याल एक उच्च प्रशिक्षित और अनुभवी पायलट थे, जिन्हें भारत के स्वदेशी फाइटर जेट को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करने का विशेष जिम्मा सौंपा गया था।
पृष्ठभूमि और सैन्य अनुभव
नमन स्याल हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के नगरोटा बगवान तहसील के पटियालकर गांव के रहने वाले थे। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार उनकी उम्र 34 से 37 वर्ष के बीच थी। उन्होंने सैनिक स्कूल, सुजानपुर टीरा से अपनी शिक्षा पूरी की और 24 दिसंबर 2009 को भारतीय वायु सेना में कमीशन प्राप्त किया। उनके पास MiG-21 और सुखोई Su-30 MKI जैसे लड़ाकू विमानों को उड़ाने का व्यापक अनुभव था। हाल ही में वे तेजस की तीसरी स्क्वाड्रन में कार्यरत थे।
पारिवारिक जीवन
उनके परिवार में उनकी पत्नी शामिल हैं, जो स्वयं एक IAF अधिकारी हैं, एक छह से सात साल की बेटी और माता-पिता भी हैं। उनके पिता, जगन्नाथ स्याल, भारतीय सेना के मेडिकल कोर में सेवा दे चुके थे। दुर्घटना के समय उनके माता-पिता तमिलनाडु के कोयंबटूर के पास सुलूर एयर फोर्स स्टेशन में मौजूद थे, जबकि उनकी पत्नी कोलकाता में एक कोर्स में शामिल थीं।
दुबई एयर शो में दुर्घटना का विवरण
तेजस का हादसा भारत के स्वदेशी रक्षा उद्योग और निर्यात क्षमता के लिए गंभीर झटका है। यह दुर्घटना 17 नवंबर से चल रहे दुबई एयर शो के अंतिम दिन, अल मकतूम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर, लो-लेवल एरोबेटिक युद्धाभ्यास के दौरान हुई। एयर शो के अंतिम दिन के दृश्य में तेजस फाइटर जेट अचानक नाक के बल नीचे गोता लगाते हुए जमीन से टकराया और आग के गोले में बदल गया।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह दुर्घटना विमान की ऊंचाई कम होने या गति कम होने के कारण हुई, जिससे पायलट के लिए रिकवरी के लिए पर्याप्त जगह नहीं बची। वास्तविक कारण का पता कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी की रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा।
तेजस विमान से जुड़ी पिछली दुर्घटना
यह तेजस विमान के साथ दूसरी दुर्घटना है और पहली जानलेवा घटना है। इससे पहले मार्च 2024 में राजस्थान के जैसलमेर के पास प्रशिक्षण उड़ान के दौरान तेजस का हादसा हुआ था, जिसमें पायलट सुरक्षित रूप से इजेक्ट करने में सफल रहे थे।














