
असम दौरे पर मौजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कांग्रेस ने राजनीतिक मोर्चे पर नया हमला किया है। पार्टी के नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट कर प्रधानमंत्री से हिंसा प्रभावित मणिपुर का दौरा करने की मांग की। उनके इस पोस्ट ने राजनीतिक माहौल में हलचल मचा दी है।
खेड़ा का संदेश: मणिपुर को न भूलें
पवन खेड़ा ने अपने पोस्ट में कहा कि चुनाव वाले राज्यों को हमेशा प्राथमिकता मिलती है, लेकिन मणिपुर की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि मणिपुर 2023 से हिंसा की घटनाओं से जूझ रहा है और हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं।
खेड़ा का मानना है कि प्रधानमंत्री की उपस्थिति मणिपुर के लोगों को भरोसा दिला सकती है। उन्होंने कहा कि असम और मणिपुर एक-दूसरे से ज्यादा दूर नहीं हैं, ऐसे में पीएम को वहां जाकर लोगों से मिलना चाहिए।
Dear PM @narendramodi,
— Pawan Khera 🇮🇳 (@Pawankhera) February 14, 2026
We understand that poll-bound states are always your top priority. But Manipur should not be abandoned. The state has been burning since 2023 - and it is burning again.
You are already in Assam today. Manipur is just an hour away. Please go there as well.… pic.twitter.com/kW2zBJICSS
फ्लाइट टिकट की तस्वीर शेयर की
अपने पोस्ट के साथ पवन खेड़ा ने गुवाहाटी से इम्फाल के लिए बुक की गई फ्लाइट टिकट की फोटो भी साझा की। उन्होंने लिखा कि टिकट प्रधानमंत्री की सुविधा के लिए पहले से ही बुक है और उन्हें बस विमान में बैठना बाकी है। साथ ही उन्होंने कहा कि उनके पास प्रधानमंत्री का डायरेक्ट नंबर नहीं था, इसलिए उन्होंने टिकट सोशल मीडिया पर साझा की।
खेड़ा ने केंद्र सरकार के ‘PM CARES’ फंड का जिक्र करते हुए कहा कि पीएम को मणिपुर जाकर दिखाना चाहिए कि वे वास्तव में राज्य की स्थिति और लोगों की चिंता करते हैं।
मणिपुर में 2023 से हिंसा
मणिपुर में 2023 से लगातार जातीय हिंसा की घटनाएं सामने आ रही हैं। विपक्ष लगातार केंद्र सरकार से इस मामले में जवाबदेही की मांग करता रहा है। वहीं, केंद्र सरकार का कहना है कि स्थिति को नियंत्रित करने और शांति बहाल करने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।
सोशल मीडिया पर बहस
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इस पोस्ट पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर बहस जोर पकड़ गई है। कांग्रेस समर्थक इसे मणिपुर की अनदेखी का मुद्दा बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे सिर्फ राजनीतिक दिखावे के रूप में देख रहे हैं।














