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बिहार नतीजों ने बढ़ाया धर्मेंद्र प्रधान का कद, भाजपा अध्यक्ष पद की दौड़ में बढ़ाया कदम

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए की जीत ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के रणनीतिक नेतृत्व को और मजबूत किया। बिहार, ओडिशा, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में उनकी सफल रणनीति ने उन्हें भाजपा के शीर्ष चुनावी रणनीतिकारों में शामिल कर दिया है।

Posts by : Kratika Maheshwari | Updated on: Sat, 15 Nov 2025 7:43:59

बिहार नतीजों ने बढ़ाया धर्मेंद्र प्रधान का कद, भाजपा अध्यक्ष पद की दौड़ में बढ़ाया कदम

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए की शानदार जीत ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के रणनीतिक नेतृत्व को फिर से उजागर कर दिया है। पार्टी में उन्हें लंबे समय से एक कुशल चुनाव प्रबंधक के रूप में पहचाना जाता है, जिन्होंने बिहार की राजनीति को गहराई से समझते हुए हमेशा निर्णायक भूमिका निभाई है। 2015 में जब बीजेपी और बिहार की राजनीति में बदलाव आया, तब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें स्नेहपूर्वक "सह-बिहारी" कहा था। ओडिशा के रहने वाले धर्मेंद्र प्रधान और नीतीश कुमार के बीच यह निकटता अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के समय से विकसित हुई है। उनके पिता, देवेंद्र प्रधान, भी वाजपेयी सरकार में राज्य मंत्री रहे, जिससे दोनों परिवारों के बीच लंबे समय से घनिष्ठ संबंध बने रहे।

धर्मेंद्र प्रधान का बिहार से रिश्ता 2010 के विधानसभा चुनाव से शुरू हुआ, जब उन्होंने लगभग दो महीने राज्य में सक्रिय भूमिका निभाई। 2012 में उन्हें बिहार से राज्यसभा भेजा गया, जिसने उनके संबंध को और मजबूत किया। इसके बाद से वे बिहार के पांच बड़े चुनावों — लोकसभा और विधानसभा — में रणनीति बनाने में केंद्रीय भूमिका निभाते रहे।

2014 में जब नीतीश कुमार एनडीए से अलग हुए थे, धर्मेंद्र प्रधान उन्हीं में से थे, जिन्होंने उन्हें निर्णय पर पुनर्विचार करने की सलाह दी। 2022 में भी जब राज्य में राजनीतिक अस्थिरता की संभावना बढ़ी, धर्मेंद्र प्रधान ने ही कुमार से सीधे मुलाकात कर स्थिति को संभाला।

प्रधान का नीतीश के साथ सुदृढ़ तालमेल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं गृह मंत्री अमित शाह के साथ भरोसेमंद संबंधों ने उन्हें बिहार चुनाव की जिम्मेदारी सौंपने में निर्णायक भूमिका निभाई। इस बार भी उनकी रणनीति ने बीजेपी-एनडीए को जीत दिलाकर उनकी साख और मजबूत की है।

देश के सबसे लंबे समय तक पेट्रोलियम मंत्री के रूप में सेवा देने के बाद, अब धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्रालय की कमान संभाल रहे हैं। यह मंत्रालय राजनीतिक रूप से अत्यधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसे आरएसएस की विशेष रुचि और संवेदनशीलता से जोड़ा जाता है।

2017 के बाद से धर्मेंद्र प्रधान ने कई महत्वपूर्ण चुनावों में बीजेपी की जीत सुनिश्चित की है। 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उनकी रणनीति ने पार्टी को बड़ी सफलता दिलाई। उत्तराखंड और अन्य राज्यों में भी उनकी चुनावी योजनाओं ने पार्टी को जीत दिलाने में मदद की। नंदीग्राम (2021) में भले ही सीट ममता बनर्जी के हाथ चली गई, लेकिन उनकी रणनीति की योग्यता पर किसी तरह का असर नहीं पड़ा। कर्नाटक में पार्टी को नुकसान हुआ, लेकिन उनके व्यापक चुनावी रिकॉर्ड को यह प्रभावित नहीं कर पाया।

अपने गृह राज्य ओडिशा में बीजेडी के खिलाफ आक्रामक अभियान चलाकर उन्होंने न केवल व्यक्तिगत जीत दर्ज की, बल्कि राज्य में बीजेपी के विस्तार की नींव भी मजबूत की। हाल ही में हरियाणा में कठिन परिस्थितियों में पार्टी को विजय दिलाकर उन्होंने अपनी रणनीतिक क्षमता पर फिर भरोसा जताया। यह खास महत्व रखता है, क्योंकि 2024 लोकसभा चुनाव में पार्टी को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा था।

बिहार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और हरियाणा में लगातार सफलताओं के बाद धर्मेंद्र प्रधान अब भाजपा के शीर्ष रणनीतिकारों में शामिल हो चुके हैं। बिहार में हाल की जीत उनके चुनावी करियर की यात्रा में एक नया, चमकदार अध्याय जोड़ती है। आने वाले चुनावों में उनकी भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होने की संभावना है। उनके नाम को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए संभावित उम्मीदवारों की सूची में भी रखा जा रहा है।

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