नई दिल्ली: BAT-BMS नाम की एक मोबाइल ऐप इन दिनों सोशल मीडिया और सरकारी एजेंसियों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। यह ऐप इसलिए विवादों में है क्योंकि दावा किया जा रहा है कि इसके जरिए बैटरी से चलने वाले ई-रिक्शा, जिन्हें कई इलाकों में 'टिर्री' भी कहा जाता है, को दूर से ही बंद किया जा सकता है। आरोप है कि कुछ लोग इस ऐप का इस्तेमाल कर सड़क पर चल रहे ई-रिक्शों को अचानक रोक रहे हैं, जिससे चालकों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ यात्रियों की सुरक्षा पर भी खतरा पैदा हो रहा है। मामले के सामने आने के बाद सरकार ने इसकी जांच शुरू कर दी है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से उठा विवाद
हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कई वीडियो तेजी से वायरल हुए, जिनमें कुछ लोग अपने स्मार्टफोन के जरिए पास से गुजर रहे ई-रिक्शों को अचानक बंद करते दिखाई दिए। वीडियो में कई चालक बीच सड़क पर वाहन रुक जाने के बाद उसे धक्का देकर ले जाते नजर आए। इन घटनाओं के बाद इंटरनेट पर BAT-BMS ऐप को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं और लोगों ने इसकी वैधता व सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
सरकार ने शुरू की जांच, पुलिस कार्रवाई के भी संकेत
दिल्ली के परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने गुरुवार को कहा कि सरकार इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से इस घटना की जानकारी सरकार तक पहुंची है और संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है। मंत्री का कहना है कि यदि किसी ऐप के जरिए इस तरह ई-रिक्शों को नियंत्रित या बंद किया जा रहा है, तो यह गैर-कानूनी गतिविधि की श्रेणी में आएगा और पुलिस भी अपने स्तर पर आवश्यक कार्रवाई कर सकती है।
उन्होंने एक मीडिया बातचीत में यह भी स्पष्ट किया कि अब तक इस संबंध में कोई औपचारिक लिखित शिकायत नहीं मिली है। हालांकि, उनके कार्यालय में कई लोगों ने इस मुद्दे को उठाया है, जिसके बाद उन्होंने अधिकारियों को मामले की विस्तृत जानकारी जुटाने और तकनीकी पहलुओं की जांच करने के निर्देश दिए हैं।
शुरुआती जांच में सामने आई ऐप की कार्यप्रणाली
रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में पता चला है कि BAT-BMS ऐप ब्लूटूथ आधारित लिथियम बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) से कनेक्ट हो जाती है। हालांकि, यह केवल सीमित दूरी के भीतर ही काम करती है। अधिकारी ने बताया कि मूल रूप से इस ऐप को बैटरी के वोल्टेज, तापमान और करंट जैसी तकनीकी जानकारियां प्राप्त करने के उद्देश्य से विकसित किया गया था।
उन्होंने कहा कि शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि कई बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम में किसी प्रकार का पासवर्ड या ऑथेंटिकेशन सुरक्षा तंत्र मौजूद नहीं है। ऐसी स्थिति में कोई भी व्यक्ति यदि ऐप से कनेक्ट हो जाए तो पावर आउटपुट बंद कर वाहन को रोक सकता है। अधिकारियों का यह भी कहना है कि केवल BAT-BMS ही नहीं, बल्कि इसी तरह की कार्यप्रणाली वाली कुछ अन्य ऐप भी मौजूद हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
आईटी एक्ट के तहत हो सकती है कड़ी कार्रवाई
साइबर सिक्योरिटी कानून के विशेषज्ञ और इंटरनेशनल कमीशन ऑन साइबर सिक्योरिटी लॉ के चेयरमैन पवन दुग्गल ने इस मामले को गंभीर साइबर अपराध बताया है। उन्होंने कहा कि आधुनिक ई-रिक्शा केवल एक वाहन नहीं, बल्कि डिजिटल तकनीक पर आधारित एक कंप्यूटर सिस्टम की तरह कार्य करता है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक मेमोरी और सॉफ्टवेयर आधारित नियंत्रण प्रणाली होती है।
उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति वाहन मालिक की अनुमति या जानकारी के बिना उसके डिजिटल सिस्टम में प्रवेश कर वाहन को नियंत्रित करता है, तो यह सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 43 और धारा 66 के तहत दंडनीय अपराध माना जा सकता है। उनके अनुसार ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर तीन वर्ष तक की सजा और अधिकतम पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।













