
महिला आरक्षण बिल लोकसभा में पास न होने के बाद सियासी माहौल और अधिक गरमा गया है। इस बीच परिसीमन बिल भी अटक जाने को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच टकराव और तेज हो गया। भारतीय जनता पार्टी की ओर से लगातार विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में महिला आयोग की उपाध्यक्ष और बीजेपी नेता अपर्णा यादव ने विपक्ष के खिलाफ जोरदार मोर्चा खोलते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को महिलाओं के सम्मान से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया और लखनऊ विधानसभा परिसर के बाहर प्रदर्शन कर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के झंडों को जलाया।
अपर्णा यादव ने इस विरोध प्रदर्शन को लेकर अपनी भावनाएं सोशल मीडिया पर भी साझा कीं। इंस्टाग्राम पर पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा कि वह इस “अंधेरी रात” में महिलाओं की अस्मिता और सम्मान की रक्षा के लिए आवाज उठाने निकली हैं। उन्होंने विपक्षी दलों की तुलना पौराणिक पात्रों से करते हुए कहा कि वह इन राजनीतिक शक्तियों के प्रतीकात्मक झंडे जलाकर भारतीय नारी शक्ति की गरिमा का संदेश देने आई हैं। उनके अनुसार यह कदम महिलाओं के आत्मसम्मान की रक्षा के लिए एक प्रतीकात्मक विरोध है।
अपने बयान में अपर्णा यादव ने आगे लिखा कि यदि एक महिला होकर भी वह इस मुद्दे पर चुप रहतीं, तो यह उनके लिए आत्मग्लानि का कारण बनता। उन्होंने कहा कि यह विरोध केवल राजनीतिक नहीं बल्कि महिलाओं के अधिकारों और सम्मान से जुड़ा विषय है। उनके अनुसार भारतीय नारी शक्ति किसी भी तरह के अपमान को स्वीकार नहीं करेगी और इसका जवाब मजबूती से दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि देश की महिलाएं और युवा पीढ़ी ऐसे किसी भी रवैये को कभी स्वीकार नहीं करेंगे, जो उनके अधिकारों को कमजोर करता हो।
अपर्णा यादव ने विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह पहली बार नहीं है जब महिला आरक्षण से जुड़े प्रयासों को रोका गया हो। उन्होंने 1996, 1998 और 2003 के उदाहरण देते हुए कहा कि पहले भी कई बार ऐसे बिलों को आगे बढ़ने से रोका गया है और अब 2026 में भी वही स्थिति दोहराई गई है। उनके अनुसार विपक्ष महिलाओं को आगे बढ़ते हुए नहीं देखना चाहता और खासकर साधारण व मध्यमवर्गीय परिवारों से आने वाली महिलाओं को अवसर देने के पक्ष में नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष की मानसिकता केवल कुछ चुनिंदा परिवारों तक सीमित है, जहां उन्हीं लोगों को आगे बढ़ाने की कोशिश की जाती है जो उनके राजनीतिक ढांचे का हिस्सा हैं। यह रवैया महिलाओं के व्यापक हितों के खिलाफ है और समाज में असमानता को बढ़ावा देता है।
महिलाओं के सम्मान पर सवाल उठाने वाली सोच पर कड़ा रुख अपनाते हुए अपर्णा यादव ने कहा कि यह विषय केवल राजनीति का नहीं, बल्कि सामाजिक सम्मान और अधिकारों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने इसे एक गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा कि देश की महिलाएं इस तरह के व्यवहार को कभी माफ नहीं करेंगी। उनके अनुसार यह स्थिति महिलाओं की प्रगति के खिलाफ एक नकारात्मक संकेत है और इसे समय रहते बदलना जरूरी है।
लखनऊ में हुए प्रदर्शन के दौरान अपर्णा यादव ने अपने समर्थकों के साथ मिलकर विपक्षी दलों के झंडे जलाए और महिलाओं के अधिकारों के समर्थन में प्रतीकात्मक मशाल भी जलाई। उन्होंने कहा कि यह विरोध सिर्फ एक विधेयक के खिलाफ नहीं है, बल्कि पूरे देश में महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए एक संदेश है, जिसे हर स्तर पर मजबूत किया जाना चाहिए।
VIDEO | Lucknow, Uttar Pradesh: Aparna Yadav, Vice Chairperson of the UP Women Commission says, "What has happened in Parliament, where this Bill was not passed, demonstrates opposition to women's dignity. The opposition has exposed its true face, and women of the country will… pic.twitter.com/1FvOR71Wmn
— Press Trust of India (@PTI_News) April 17, 2026













