
भारत को त्योहारों की धरती यूं ही नहीं कहा जाता। यहां हर मौसम, हर महीने कोई न कोई उत्सव रंग बिखेरता नजर आता है। देश की सांस्कृतिक विविधता और पारंपरिक रिवाज दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। इन्हीं उत्सवों में सबसे ज्यादा चर्चा जिस पर्व की होती है, वह है रंगों का त्योहार होली। साल 2026 की होली को खास अंदाज में मनाने के लिए विदेशी सैलानी अभी से भारत का रुख करने की तैयारी में हैं।
अगर आप भी अपने विदेशी दोस्तों या मेहमानों के साथ पारंपरिक अंदाज में होली सेलिब्रेट करना चाहते हैं, तो राजस्थान से बेहतर विकल्प शायद ही कोई हो। यहां की शाही विरासत, लोक संस्कृति और रंगों की धूम होली को एक अलग ही आयाम दे देती है। राज्य के पांच शहर ऐसे हैं, जो विदेशी पर्यटकों की बकेट लिस्ट में हमेशा टॉप पर रहते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं इन खास जगहों के बारे में।
पुष्कर: म्यूजिक, मस्ती और ‘कपड़ा फाड़’ होली का अनोखा संगम
पुष्कर ने अपनी होली के जरिए अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है। यहां रंगों का जश्न मुख्य तिथि से कई दिन पहले ही शुरू हो जाता है। शाम ढलते ही ढोल-नगाड़ों की गूंज और डीजे म्यूजिक के बीच देशी-विदेशी पर्यटक एक साथ झूमते नजर आते हैं। रात 10 बजे से लेकर तड़के 3 बजे तक चलने वाली पार्टियां इस शहर को उत्सव के रंग में पूरी तरह रंग देती हैं।
‘पुष्कर होली फेस्टिवल’ दुनियाभर में मशहूर है। खास तौर पर यहां की ‘कपड़ा फाड़ होली’ विदेशी सैलानियों के लिए बेहद आकर्षक मानी जाती है। इस अनूठे अंदाज का अनुभव लेने के लिए टूरिस्ट महीनों पहले से होटल और गेस्टहाउस बुक कर लेते हैं। अगर आप भी यहां की होली देखना चाहते हैं, तो देर करना भारी पड़ सकता है।
उदयपुर: झीलों की नगरी में शाही अंदाज की होली
उदयपुर की होली में राजसी ठाठ-बाट साफ नजर आता है। सिटी पैलेस में मेवाड़ राजघराने की ओर से आयोजित ‘होलिका दहन’ समारोह इसकी भव्य शुरुआत करता है। पारंपरिक पोशाकों, शाही जुलूस और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच यहां का माहौल किसी ऐतिहासिक फिल्म जैसा प्रतीत होता है।
इसके अलावा मेनार गांव की प्रसिद्ध ‘बारूद की होली’ और गंगौर घाट पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम पर्यटकों को खास अनुभव देते हैं। रंग, लोक संगीत और पारंपरिक नृत्य मिलकर ऐसा दृश्य रचते हैं, जिसे देखने के लिए विदेशी सैलानी पहले से अपनी यात्रा तय कर लेते हैं।
जयपुर: खासा कोठी में सजी रंगों की महफिल
राजस्थान की राजधानी जयपुर में होली को संगठित और सांस्कृतिक अंदाज में मनाया जाता है। पर्यटन विभाग विशेष रूप से विदेशी मेहमानों के लिए कार्यक्रम आयोजित करता है, ताकि वे सुरक्षित माहौल में भारतीय परंपरा का आनंद ले सकें।
होटल खासा कोठी में आयोजित रंगोत्सव में लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां, पारंपरिक व्यंजन और गुलाल की बौछारें माहौल को उत्साह से भर देती हैं। सुबह से दोपहर तक चलने वाला यह आयोजन विदेशी पर्यटकों को भारतीय संस्कृति से रूबरू कराता है।
जोधपुर: ब्लू सिटी की गलियों में सादगी भरी होली
मेहरानगढ़ किले की पृष्ठभूमि में जोधपुर की होली का रंग कुछ अलग ही होता है। यहां भव्यता से ज्यादा अपनापन और सादगी देखने को मिलती है। पुराने शहर की नीली गलियों में स्थानीय लोग और विदेशी पर्यटक एक साथ रंग खेलते हैं।
जोधपुर की ‘गैर नृत्य’ परंपरा विशेष आकर्षण का केंद्र है। इसे देखने के लिए यूरोप के कई देशों से पर्यटक पहुंचते हैं। ढोल की थाप और पारंपरिक परिधान इस उत्सव को और खास बना देते हैं।
मंडावा (शेखावाटी): हवेलियों के बीच रंगों की कलात्मक छटा
अगर आप होली के साथ राजस्थान की कला और ग्रामीण संस्कृति का अनुभव करना चाहते हैं, तो मंडावा बेहतरीन विकल्प है। शेखावाटी क्षेत्र की ऐतिहासिक हवेलियां और भित्ति चित्र इस शहर को अलग पहचान देते हैं।
यहां रंगों के बीच लोक गायन ‘धमाल’ की गूंज सुनाई देती है, जो माहौल को पूरी तरह उत्सवमय बना देती है। विदेशी कलाकार और फोटोग्राफर खास तौर पर इस जगह को पसंद करते हैं, क्योंकि यहां पारंपरिक परिवेश में होली का अनोखा दृश्य देखने को मिलता है।














