
आज प्रोटीन सिर्फ जिम तक सीमित नहीं रहा; यह हमारी रोजमर्रा की डाइट का अहम हिस्सा बन गया है। सोशल मीडिया खोलिए, सुपरमार्केट जाइए या कैफे का मेन्यू देखें — हर जगह “हाई-प्रोटीन” लिखा नजर आता है। प्रोटीन शेक, स्नैक बार, आटा, सीरियल — हर उत्पाद बड़े वादों के साथ आता है: वजन घटाएं, मसल्स बनाएं और लंबे समय तक पेट भरा रखें। लेकिन क्या ये वादे सच में इतने आसान हैं? न्यूट्रिशन साइंस हमेशा इतनी सरल नहीं होती।
प्रोटीन और शरीर का रिश्ता
प्रोटीन हमारे शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व है। यह टिश्यू की मरम्मत करता है, मांसपेशियों को मजबूत बनाता है, हार्मोन और एंजाइम बनाने में मदद करता है और इम्यून सिस्टम को मजबूत रखता है। शरीर इसे अमीनो एसिड में तोड़ता है, जो कई महत्वपूर्ण शारीरिक प्रक्रियाओं में काम आते हैं। सवाल यह उठता है कि क्या हर खाने में अतिरिक्त प्रोटीन लेना वास्तव में जरूरी है या यह सिर्फ एक बढ़ा-चढ़ा ट्रेंड बन गया है?
एक्सपर्ट की राय
एचओडी कल्पना गुप्ता के अनुसार, प्रोटीन की जरूरत व्यक्ति की उम्र, जेंडर, शारीरिक गतिविधि और मेटाबॉलिज़्म पर निर्भर करती है। ICMR की गाइडलाइन भी बताती है कि भारतीयों के आहार में प्रोटीन अक्सर कम और अनाज ज्यादा होते हैं, इसलिए संतुलित मात्रा में प्रोटीन लेना जरूरी है। दूध, दही, पनीर, अंडा, दाल और चिकन अच्छे विकल्प हैं।
कुछ रिसर्च यह भी दिखाती हैं कि नियमित व्यायाम के साथ पर्याप्त प्रोटीन लेने से वजन घटाने और ब्लड शुगर कंट्रोल में मदद मिल सकती है, खासकर टाइप 2 डायबिटीज वाले लोगों में। वहीं दाल, बीन्स और सोया जैसे पौध-आधारित प्रोटीन हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहतर माने जाते हैं। हालांकि, अत्यधिक प्रोटीन सेवन के चमत्कारी फायदे होने के ठोस प्रमाण सीमित हैं।
अत्यधिक प्रोटीन से हो सकता है नुकसान
बहुत अधिक प्रोटीन किडनी पर दबाव डाल सकता है, खासकर उन लोगों में जिन्हें पहले से किडनी की समस्या हो। इसके अलावा, अधिक प्रोटीन लेने से फाइबर और अन्य पोषक तत्वों की कमी भी हो सकती है, जिससे पाचन संबंधी दिक्कतें बढ़ सकती हैं। बिना विशेषज्ञ की सलाह के प्रोटीन सप्लीमेंट या पाउडर का सेवन करना सही नहीं।
सही मात्रा और संतुलित सेवन
जिन्हें ज्यादा प्रोटीन की जरूरत हो, वे आमतौर पर नियमित व्यायाम करने वाले या उम्रदराज लोग होते हैं। सामान्यत: 0.8 से 1.2 ग्राम प्रोटीन प्रति किलो शरीर का वजन पर्याप्त माना जाता है। कल्पना गुप्ता का सुझाव है कि हर खाने में एक प्रोटीन सोर्स शामिल करें। उदाहरण के लिए:
नाश्ते में दूध या अंडा
दोपहर या रात के खाने में दाल, दही या चिकन
स्नैक्स के रूप में बिस्किट की बजाय मेवे या भुना चना
इस तरह संतुलित प्रोटीन सेवन से आप शरीर की जरूरत पूरी करते हुए ओवरहाइप्ड ट्रेंड्स के फॉलोअर बनने से बच सकते हैं।













