
एक्टर सिद्धार्थ मल्होत्रा और एक्ट्रेस जान्हवी कपूर इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘परम सुंदरी’ को लेकर सुर्खियों में हैं। लोग इस जोड़ी को बड़े पर्दे पर देखने के लिए बेकरार हैं। हाल ही में इस फिल्म का ट्रेलर मैडॉक फिल्म्स ने यूट्यूब पर रिलीज किया, जिसे खूब पसंद किया गया। फिल्म का गाना ‘परदेसिया’ पहले ही लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो चुका है। फिल्म सिनेमाघरों में 29 अगस्त को रिलीज होगी। इन दिनों इसका जोर-शोर से प्रमोशन किया जा रहा है। इस बीच फिल्म की सफलता की कामना करने के लिए सिद्धार्थ और जान्हवी डायरेक्टर तुषार जलोटा के साथ चुपचाप तिरुमाला तिरुपति बालाजी मंदिर पहुंचे।
इस दौरान दोनों कलाकार ट्रेडिशनल साउथ इंडियन आउटफिट में नजर आए। उन्होंने वहां पूजा-अर्चना कर भगवान से आशीर्वाद लिया। सिद्धार्थ ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर इस यात्रा का एक वीडियो शेयर किया है। इसमें वे फैंस से बात करते हुए बताते हैं कि यह उनका पहला तिरुमाला दौरा है, जबकि जान्हवी हर साल यहां आती हैं। जान्हवी ने बताया कि उन्होंने सिद्धार्थ को यह दक्षिण भारतीय अनुभव देने के लिए उनके साथ आने की सोची, क्योंकि फिल्म में उनका किरदार ‘परम’ एक दक्षिण भारतीय लड़के का है।
यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। सिद्धार्थ ने इस दौरान फिल्म के ट्रेलर और गानों को मिले प्यार के लिए फैंस को थैंक्स बोला। उन्होंने उम्मीद जताई कि दर्शक फिल्म को भी उतना ही पसंद करेंगे। वीडियो के अंत में सिद्धार्थ ने कहा कि आप सभी के प्यार के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। और हम आप लोगों से 29 अगस्त को सिनेमाघरों में मिलेंगे। उल्लेखनीय है कि सिद्धार्थ की पिछली फिल्म ‘योद्धा’ और ‘जान्हवी’ की उलझ थी। सिद्धार्थ पिछले महीने ही पिता बने हैं। उनकी पत्नी कियारा आडवाणी ने एक बेटी को जन्म दिया है।

रणदीप हुड्डा ने लिखा, मुझे जानवरों से प्यार है, लेकिन क्या मैं इसे उस परिवार…
एक्टर रणदीप हुड्डा अपनी दमदार अदाकारी के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने आवारा कुत्तों से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुलकर सपोर्ट किया है। हालांकि दिल्ली-एनसीआर के आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में भेजने के फैसले से बॉलीवुड और टीवी के अधिकतर कलाकार नाराज हैं। रणदीप ने सोशल मीडिया पर एक लंबी-चौड़ी पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, “ये सुनकर बहुत खुशी हुई कि माननीय CJI (Chief Justice of India) एनसीआर में आवारा कुत्तों के बारे में फैसले पर गौर करने के लिए मान गए हैं।
कानून पास करना और कानून इम्प्लीमेंट करना सबसे पहले मानवीय होना चाहिए और दूसरा इंफ्रास्ट्रक्चर और सेंसिटिविटी का ध्यान रखा जाना चाहिए। क्या आवारा कुत्ते हमारी सामूहिक सामुदायिक मानवीय जिम्मेदारी हैं? हां। क्या वे खतरा हो सकते हैं? हां। मैं खुश हूं कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इस बड़ी बातचीत को शुरू किया है। मुझे जानवरों से प्यार है, लेकिन क्या मैं इसे उस परिवार के लिए जस्टिफाई कर पाऊंगा जिसने रेबीज के कारण अपने किसी प्रियजन को खो दिया है या जो सीरियस इंजरी का सामना कर रहे हैं? नहीं। कुत्तों की पूरी आबादी को जब्त करना शायद एक अच्छा आइडिया नहीं है या संभव नहीं है।
तो आइए नागरिक होने के नाते विकल्पों को देखें। इकलौता ऑप्शन बड़े पैमाने पर और चक्रीय नपुंसकता है और शायद एग्रेसिव पैक्स को पकड़ना या फिर से विभाजित करना है। ये एक लॉन्ग टर्म संभावित समाधान है, जो कुछ सालों में संख्या में कमी ला सकता है। लोगों को आवारा कुत्तों को जितना हो सके उतना अडॉप्ट करना चाहिए और सच में उनकी जिम्मेदारी उठानी चाहिए। मेरे पास भी कुत्ता है इसलिए मैं ये जानता हूं।” रणदीप ने अपने डॉग के साथ कुछ तस्वीरें भी शेयर की हैं।














