
मशहूर संगीतकार एआर रहमान इन दिनों अपने एक बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में काम कम मिलने के सवाल पर उन्होंने इसे ‘सांप्रदायिक पहलू’ से जोड़कर देखा, जिसके बाद यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बन गया। उनके इस बयान पर मनोरंजन जगत की कई जानी-मानी हस्तियों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। कंगना रनौत से लेकर जावेद अख्तर तक, अलग-अलग राय सामने आई है। अब इस बहस में लोकप्रिय गायक शान का नाम भी जुड़ गया है। शान ने इस पूरे मामले पर अपनी दो टूक राय रखते हुए साफ कहा है कि म्यूजिक इंडस्ट्री में किसी तरह का सांप्रदायिक भेदभाव नहीं है। उन्होंने इस तरह की बातों को जरूरत से ज्यादा तवज्जो न देने की सलाह दी और कहा कि आरोपों में उलझने के बजाय कलाकारों को अपने काम पर ध्यान देना चाहिए।
काम न मिलने को निजी मुद्दा बताया
IANS से बातचीत में शान ने बेहद सीधे शब्दों में कहा, “अगर बात काम न मिलने की है, तो मैं खुद इसका उदाहरण हूं। इतने सालों से गा रहा हूं, सैकड़ों गाने कर चुका हूं, फिर भी कई बार ऐसा होता है कि काम नहीं मिलता। लेकिन मैं इसे कभी व्यक्तिगत तौर पर नहीं लेता। यह पूरी तरह से एक प्रोफेशनल और निजी मामला है।” उन्होंने आगे कहा कि हर इंसान की अपनी सोच, पसंद और प्राथमिकताएं होती हैं। शान के मुताबिक, अगर कहीं कोई दिक्कत है भी, तो उसे संगीत में सांप्रदायिक या अल्पसंख्यक मुद्दे से जोड़ना सही नहीं है।
‘संगीत में भेदभाव की कोई जगह नहीं’
शान ने साफ शब्दों में कहा कि म्यूजिक इंडस्ट्री का काम करने का तरीका इस तरह का नहीं होता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “अगर इंडस्ट्री सच में इस तरह से चलती, तो पिछले 30 सालों में हमारे तीन बड़े सुपरस्टार—जो अल्पसंख्यक समुदाय से आते हैं—इतनी ऊंचाई तक कभी नहीं पहुंच पाते। यह अपने आप में इस बात का सबूत है कि संगीत में ऐसा कोई भेदभाव नहीं है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि कलाकार को चाहिए कि वह अच्छा काम करे, अच्छा म्यूजिक बनाए और बाकी बातों को लेकर ज्यादा दिमाग न लगाए।
हर गाने के पीछे होती है एक सोच
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए शान ने यह भी समझाया कि किसी गायक या संगीतकार को चुनने के पीछे प्रोड्यूसर्स और म्यूजिक डायरेक्टर्स की अपनी सोच होती है। उन्होंने कहा, “हर इंसान की राय अलग होती है और हमेशा रहेगी। ऐसा कोई नियम नहीं है कि सब एक जैसी सोच रखें। किसी गाने के लिए किस आवाज़ की जरूरत है, यह पूरी तरह उस प्रोजेक्ट की मांग पर निर्भर करता है। संगीतकार या निर्माता उसी के हिसाब से फैसला लेते हैं।” शान का मानना है कि कुछ लोग फैसलों को सही कहेंगे, कुछ गलत, लेकिन इन बातों में उलझने से कोई फायदा नहीं होता।
एआर रहमान के बयान से कैसे शुरू हुआ विवाद
दरअसल, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब एआर रहमान ने BBC एशियन नेटवर्क को दिए एक इंटरव्यू में हिंदी सिनेमा के साथ अपने मौजूदा रिश्ते पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि वह कभी भी काम के पीछे भागने में विश्वास नहीं रखते और उन्हें लगता है कि ईमानदारी से किया गया काम अपने आप रास्ता बना लेता है। इसी बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी जिक्र किया कि बीते आठ वर्षों में सत्ता के संतुलन में बदलाव आया है।
‘पिछले आठ सालों में बदला माहौल’
रहमान ने इंटरव्यू में कहा था, “शायद पिछले आठ सालों में सत्ता में बदलाव आया है और अब ताकत उन लोगों के हाथ में ज्यादा है जो रचनात्मक नहीं हैं। यह स्थिति सांप्रदायिक सोच से भी जुड़ी हो सकती है।” हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह बात उनके व्यक्तिगत अनुभव के तौर पर सीधे सामने नहीं आई है। उनके इसी बयान को लेकर सोशल मीडिया और फिल्म इंडस्ट्री में बहस छिड़ गई, जिस पर अब शान समेत कई कलाकार अपनी-अपनी राय रख रहे हैं।













