साल 2021 में कारोबारी और अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा पर लगे अश्लील कंटेंट से जुड़े आरोपों ने पूरे मनोरंजन जगत में हलचल मचा दी थी। उन पर मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से कथित तौर पर आपत्तिजनक सामग्री तैयार करने और उसे प्रसारित करने के आरोप लगाए गए थे। इसी मामले में उन्हें गिरफ्तार कर मुंबई की आर्थर रोड जेल भेजा गया, जहां उन्होंने करीब 63 दिन बिताए। अब इस विवाद को लगभग पांच वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन राज कुंद्रा का कहना है कि वह आज भी खुद को निर्दोष साबित करने और न्याय हासिल करने की लड़ाई लड़ रहे हैं। हाल ही में उन्होंने अपने जीवन के सबसे मुश्किल दौर को याद करते हुए बताया कि एक मामले ने न सिर्फ उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया, बल्कि उनके परिवार और कारोबार पर भी गहरा असर डाला।
एक मामले ने पलट दी जिंदगी, बंद करने पड़े सभी कारोबार
राज कुंद्रा ने बताया कि गिरफ्तारी का वह पल उनके और उनके परिवार के लिए किसी बड़े सदमे से कम नहीं था। उनके अनुसार, जब पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया, तब उन्हें और शिल्पा शेट्टी को समझ ही नहीं आया कि आगे क्या होगा। कानूनी प्रक्रिया, विवाद और लगातार हो रही आलोचनाओं के बीच दोनों को अपने कई सफल व्यवसाय बंद करने का कठिन निर्णय लेना पड़ा।
राज ने बताया कि उस समय उनका निवेश कई बड़े क्षेत्रों में फैला हुआ था। वह आईपीएल फ्रेंचाइजी राजस्थान रॉयल्स से जुड़े रहे, मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स के क्षेत्र में भी उनकी हिस्सेदारी थी। इसके अलावा उन्होंने होम शॉपिंग नेटवर्क की शुरुआत की थी और अपने बेटे के नाम पर 'वियान इंडस्ट्रीज' नाम की एक प्रमुख टेक्नोलॉजी कंपनी भी संचालित कर रहे थे। उनके अनुसार इन सभी व्यवसायों से करीब चार हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ था और हजारों परिवारों की आजीविका उनसे जुड़ी हुई थी।
राज कुंद्रा ने भावुक होते हुए कहा कि उन्हें ऐसे अपराध में गिरफ्तार किया गया, जिसे उन्होंने कभी किया ही नहीं। उनका कहना है कि भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में योगदान देने और कई सफल कारोबार खड़े करने के बावजूद उन्हें अपने सभी सक्रिय बिजनेस अचानक बंद करने पड़े, जिसका दर्द आज भी उनके मन में है।
उन्होंने आगे दावा किया कि पुलिस ने उन्हें केवल एक सामान्य बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया था, लेकिन वहां पहुंचने के बाद अचानक उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। राज के मुताबिक, उस एक घटना ने उनकी वर्षों की मेहनत, प्रतिष्ठा और कारोबार पर गहरा प्रभाव डाला, जिसकी भरपाई आज तक नहीं हो सकी।
'अगर मैंने गलती की है तो सजा दो, वरना सम्मान के साथ बरी करो'
राज कुंद्रा ने लंबी कानूनी प्रक्रिया और लगातार हो रहे मीडिया ट्रायल पर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि वह शुरू से ही कानून पर भरोसा रखते हैं और हर जांच में सहयोग करते आए हैं। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि इस मामले का जल्द फैसला हो, ताकि वर्षों से चली आ रही अनिश्चितता खत्म हो सके।
राज कुंद्रा ने साफ शब्दों में कहा कि इस पूरे मामले में शामिल लोगों में शायद वही अकेले हैं जो खुले तौर पर यह कह रहे हैं कि यदि उन्होंने कोई अपराध किया है तो उन्हें कानून के अनुसार कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। लेकिन अगर उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है, जैसा कि उनका दावा है, तो उन्हें सम्मानपूर्वक क्लीन चिट मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों से वह अदालत में अपनी बेगुनाही साबित करने की लड़ाई लड़ रहे हैं और आज भी अपने इसी रुख पर कायम हैं। भावुक होते हुए उन्होंने यहां तक कहा कि यदि अदालत उन्हें दोषी ठहराती है तो वह अपनी जान देने तक को तैयार हैं।
आर्थर रोड जेल के 63 दिन ने बदल दी जिंदगी
राज कुंद्रा ने आर्थर रोड जेल में बिताए 63 दिनों को अपने जीवन का सबसे कठिन और भयावह दौर बताया। हालांकि उनका कहना है कि वह उन दिनों को अपनी जिंदगी से मिटाना नहीं चाहते, क्योंकि उसी अनुभव ने उन्हें जिंदगी की सबसे बड़ी सीख दी।
उन्होंने कहा कि जेल में बिताया गया हर दिन मानसिक और भावनात्मक रूप से बेहद कठिन था। कई रातें ऐसी थीं जब उन्हें यह तक नहीं मालूम होता था कि अगली सुबह कैसी होगी। इसके बावजूद उनका मानना है कि यदि उन्होंने वह मुश्किल दौर नहीं देखा होता तो शायद वह आज इतने मजबूत इंसान नहीं बन पाते। राज के अनुसार, उसी कठिन समय ने उन्हें यह समझाया कि मुश्किल परिस्थितियों में कौन लोग वास्तव में उनके साथ खड़े रहते हैं और कौन सिर्फ अच्छे समय के साथी होते हैं।
बिटकॉइन केस में मिल चुकी है जमानत
गौरतलब है कि राज कुंद्रा का नाम 150 करोड़ रुपये से जुड़े कथित बिटकॉइन मामले में भी सामने आया था। इस मामले में उन्हें हाल ही में अदालत से जमानत मिल चुकी है। अदालत ने माना कि जांच के दौरान उन्होंने जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग किया और किसी भी स्तर पर जांच प्रक्रिया में बाधा नहीं डाली। इसी आधार पर कोर्ट ने उन्हें राहत देते हुए जमानत प्रदान की।













