
भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में कई कलाकार आए और गए, लेकिन कुछ नाम ऐसे हैं जिन्होंने अपने करियर से इतिहास लिख दिया। दक्षिण भारतीय सिनेमा और बॉलीवुड दोनों में एक अभिनेता ने अपनी जोरदार अदाकारी और डांस से दर्शकों को दीवाना बना दिया। उनके कदमों की थिरकन ने सिनेमाघरों में मौजूद हर दर्शक को झूमने पर मजबूर कर दिया। यही नहीं, उनकी लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे सफल अभिनेता-नर्तक का खिताब दिया। यह वही सितारा हैं जिन्होंने पर्दे पर तो कमाल किया, मगर राजनीति की दुनिया में उम्मीद के मुताबिक चमक नहीं बिखेर पाए। हम बात कर रहे हैं साउथ के मेगास्टार चिरंजीवी की, जिन्होंने आंध्र प्रदेश में अपनी राजनीतिक पार्टी ‘प्रजा राज्यम पार्टी’ (पीआरपी) की नींव रखी और खूब चर्चा बटोरी।
असली नाम और सिनेमा की शुरुआत
बहुत कम लोग जानते हैं कि चिरंजीवी का जन्म नाम कोणिदेल शिव शंकर वर प्रसाद है। 22 अगस्त 1955 को आंध्र प्रदेश के वेस्ट गोदावरी जिले के छोटे से गाँव मोगलथुर में उनका जन्म हुआ। पिता कोनिडेला वेंकट राव पुलिस विभाग में कांस्टेबल थे। बचपन का अधिकांश समय उन्होंने दादा-दादी के साथ बिताया और पढ़ाई अलग-अलग कस्बों—निदादवोलु, गुराजाला, बापटला, पोन्नूर और मंगलागिरी—में की। स्कूल के दिनों से ही अभिनय के प्रति आकर्षण था। इंटरमीडिएट करने के बाद वे चेन्नई पहुंचे और 1976 में मद्रास फिल्म इंस्टीट्यूट से एक्टिंग का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद 1978 में फ़िल्म पुनाधिरल्लू से उनका करियर शुरू हुआ, जिसने धीरे-धीरे उन्हें दक्षिण भारतीय सिनेमा का सबसे बड़ा नाम बना दिया।
उपलब्धियाँ और सम्मान
अपने चार दशक लंबे करियर में चिरंजीवी ने वह हासिल किया जो गिने-चुने कलाकारों को ही मिलता है।
आंध्र प्रदेश का सर्वोच्च फिल्म सम्मान रघुपति वेंकैया अवॉर्ड
तीन नंदी अवॉर्ड्स
नौ बार फिल्मफेयर अवॉर्ड (साउथ)
लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड
2006 में भारत सरकार की ओर से पद्म भूषण
उनकी फिल्म कोडामा सिम्हम (1990) दक्षिण भारत की पहली ऐसी मूवी बनी जिसे अंग्रेज़ी में डब किया गया। इतना ही नहीं, चिरंजीवी ऑस्कर अवॉर्ड समारोह में आमंत्रण पाने वाले पहले साउथ इंडियन अभिनेता भी बने।
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स और डांस का जलवा
करीब 45 साल की सिनेमाई यात्रा में चिरंजीवी ने 156 फिल्मों में अभिनय किया। उनके खाते में 537 गाने और 24,000 से अधिक डांस स्टेप्स दर्ज हैं, जिसकी वजह से उन्हें गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने सम्मानित किया। दर्शकों के बीच उनकी यही ऊर्जा उन्हें सबसे अलग बनाती रही है।
राजनीति का सफर
फिल्मों की तरह राजनीति में उन्हें उतनी बड़ी सफलता नहीं मिली, लेकिन उनका कदम बेहद अहम था। 2008 में उन्होंने प्रजा राज्यम पार्टी की स्थापना की। हालांकि, 2011 में उन्होंने पार्टी का विलय कांग्रेस में कर दिया और इसके बाद वे राज्यसभा पहुंचे।
2012 से 2014 तक वे मनमोहन सिंह सरकार में केंद्रीय पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रहे। हालांकि, 2013 में तेलंगाना गठन का विरोध करते हुए उन्होंने इस्तीफ़ा भी दिया, मगर बाद में वापिस ले लिया। 2014 में आंध्र प्रदेश के बंटवारे के बाद उन्होंने राजनीति से दूरी बना ली और फिल्मों की तरफ लौट आए।
उनके छोटे भाई पवन कल्याण ने बाद में जनसेना पार्टी बनाई, जिसका चिरंजीवी खुले तौर पर समर्थन करते हैं।
सुपरस्टारडम और स्टार फीस
90 का दशक चिरंजीवी के करियर का स्वर्णिम दौर रहा। उन्होंने लगातार 14 सुपरहिट फिल्में दीं। इस सफलता ने उन्हें इतना बड़ा बना दिया कि कहा जाता है उनकी फीस उस समय अमिताभ बच्चन से भी अधिक हो गई थी। द वीक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जहां बिग बी को एक फिल्म के लिए 1 करोड़ रुपये मिलते थे, वहीं चिरंजीवी को 1.25 करोड़ रुपये ऑफर किए जाते थे। आज चिरंजीवी की कुल संपत्ति लगभग 1650 करोड़ रुपये आंकी जाती है। वहीं पूरी कोनिडेला फैमिली की नेटवर्थ करीब 4000 करोड़ रुपये बताई जाती है। चिरंजीवी का सफर यह साबित करता है कि जुनून और मेहनत से कोई भी कलाकार सीमाएँ तोड़ सकता है। पर्दे पर वे आज भी उतने ही दमदार हैं, जितने 80 और 90 के दशक में थे। राजनीति भले ही उनके लिए उतनी कारगर नहीं रही, लेकिन सिनेमा के मंच पर उनका जलवा अब भी कायम है। यही वजह है कि उन्हें आज भी लोग सच्चे अर्थों में "मेगास्टार" कहते हैं।














