
बॉलीवुड की जानी-मानी अभिनेत्री, कैंसर सर्वाइवर और सोशल एक्टिविस्ट मनीषा कोइराला को हाल ही में यूनाइटेड किंगडम की प्रतिष्ठित ब्रैडफोर्ड यूनिवर्सिटी ने डॉक्टरेट की मानद उपाधि से नवाज़ा। यह सम्मान उनके जीवन के संघर्ष और योगदान का प्रतीक बन गया है। लंदन के ताज 51 बकिंघम गेट स्थित द चैंबर्स में आयोजित एक खास इवेंट में, जो हियर एंड नाउ 365 द्वारा होस्ट किया गया था, उन्होंने खुलकर अपनी ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव साझा किए — राजनीति, स्वास्थ्य और जिंदगी के अनुभवों पर खुलकर बात की।
बॉलीवुड की चमक-दमक के पीछे का संघर्ष
इस चर्चा में जब हियर एंड नाउ 365 के संस्थापक मनीष तिवारी ने उनसे बातचीत की, तो मनीषा ने दिल से अपना बॉलीवुड सफर बयां किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने अभिनय की कोई औपचारिक ट्रेनिंग नहीं ली थी, यहां तक कि 12वीं क्लास भी पूरी नहीं की थी, और अचानक वे खुद को दिलीप कुमार और राजकुमार जैसे दिग्गजों के साथ फिल्म के सेट पर खड़ा हुआ पाया — यह उनके लिए एक सपना जैसा था!
जब फेम बन गया मानसिक बोझ
'1942: ए लव स्टोरी', 'बॉम्बे', और 'दिल से' जैसी यादगार फिल्मों से सबके दिलों पर राज करने वाली मनीषा ने बताया कि फेम का उन पर भारी असर पड़ा। हीरा मंडी की मल्लिका जान के रूप में हाल ही में उन्होंने सभी को मंत्रमुग्ध किया, लेकिन इसके पीछे की सच्चाई दिल को छू लेने वाली थी। उन्होंने कहा, “मैं बहुत थक जाती थी... 18-19 घंटे काम करती थी रोज़। धीरे-धीरे मैं अंदर ही अंदर खो गई थी — मैं खुद को ही पहचान नहीं पा रही थी।”
जब ज़िंदगी ने दी दूसरी बार मौका
अपने जीवन के सबसे कठिन समय को याद करते हुए मनीषा ने ओवेरियन कैंसर से जंग के बारे में बताया। उन्होंने भावुक होकर कहा, “जब डॉक्टर ने कहा कि मुझे कैंसर है, तो मुझे लगा सब खत्म हो गया है... मैं मर जाऊंगी। लेकिन भगवान की कृपा रही, मैं बच गई। और फिर मैंने जीना सीखा — एक नई शुरुआत की।”
भविष्य की उम्मीदों की नई किरण
इस चर्चा के अंत में, मनीष तिवारी ने सुझाव दिया कि मनीषा नेपाल को एक वैश्विक फिल्म प्रोजेक्ट के ज़रिए दुनिया के सामने ला सकती हैं। इस पर मनीषा ने मुस्कुराते हुए कहा, “ये एक बीज है जो आपने आज बोया है... देखते हैं इससे क्या उगता है।”














