
बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘जॉली एलएलबी 3’ की रिलीज पर रोक लगाने की मांग करने वाली जनहित याचिका को कर्नाटक हाईकोर्ट ने सख्ती के साथ खारिज कर दिया है। न्यायालय ने याचिका को तर्कहीन और समय की बर्बादी बताते हुए याचिकाकर्ता पर ₹50,000 का जुर्माना भी ठोका है।
यह याचिका बेंगलुरु के मंजूनाथ नगर की निवासी 27 वर्षीय सैयद नीलोफर द्वारा दायर की गई थी, जिसमें दावा किया गया था कि फिल्म के टीज़र में कुछ ऐसे संवाद और दृश्य शामिल हैं जो न्यायपालिका, विशेष रूप से न्यायाधीशों और वकीलों की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं।
याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश प्रसन्ना बी. वराले और न्यायमूर्ति सी.एम. जोशी की खंडपीठ ने साफ शब्दों में कहा कि फिल्म एक कॉमेडी ड्रामा है, जिसे लोगों के मनोरंजन के लिए बनाया गया है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा, "संभव है कि यह हमारी या आपकी हास्य भावना से मेल न खाए, परंतु यही कारण सेंसरशिप लगाने या रचनात्मकता पर रोक लगाने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता।"
अदालत ने यह भी कहा कि इस प्रकार की जनहित याचिकाएं न्यायिक व्यवस्था के अमूल्य समय का दुरुपयोग करती हैं और ऐसा प्रतीत होता है कि याचिका किसी छुपे हुए उद्देश्य के तहत दायर की गई है।
कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता को ₹50,000 का जुर्माना हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करना होगा, अन्यथा 4 अक्टूबर को अगली सुनवाई में और कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
याचिका में याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की थी कि फिल्म से जुड़े अभिनेता, निर्माता और निर्देशक—जैसे अक्षय कुमार, अरशद वारसी, सुभाष कपूर और फॉक्स स्टार स्टूडियोज—पर भारतीय दंड संहिता और आईटी एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई की जाए और उन्हें राष्ट्रीय समाचार पत्रों में सार्वजनिक माफी मांगने का आदेश दिया जाए।
प्रतिवादी पक्ष में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC), महाराष्ट्र और कर्नाटक सरकारें, बार काउंसिल ऑफ इंडिया, और संबंधित राज्य की बार काउंसिल्स के अलावा फिल्म के निर्माता और कलाकार भी शामिल थे।
गौरतलब है कि ‘जॉली एलएलबी 3’, अक्षय कुमार और अरशद वारसी अभिनीत एक कोर्टरूम कॉमेडी है, जो 19 सितंबर 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। फिल्म के पिछले दोनों संस्करणों को भी दर्शकों और आलोचकों द्वारा सराहा गया था।














