
भारतीय अभिनेत्री हुमा कुरैशी को दक्षिण कोरिया के प्रतिष्ठित बुसान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (BIFF) में 'फेस ऑफ एशिया अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया है। इस खास मौके पर हुमा ने यह पुरस्कार उन तमाम लड़कियों को समर्पित किया जो बड़े सपने देखने का साहस रखती हैं और "ना" को जवाब मानने से इनकार करती हैं।
पुरस्कार ग्रहण करते हुए हुमा कुरैशी ने मंच से अपने जीवन के संघर्षों और सपनों की यात्रा को साझा किया। उन्होंने कहा, "यह मेरा पहला बुसान फिल्म फेस्टिवल है, और यह पल मेरे लिए बेहद खास है।" उन्होंने बताया कि वह दिल्ली की एक साधारण लड़की हैं, जिनके पिता निज़ामुद्दीन बस्ती में पैदा हुए थे और माता एक छोटे से गाँव में। हुमा ने भावुक अंदाज़ में कहा, “मुझे हमेशा यह बताया गया कि अभिनेत्री बनना मेरे जैसी लड़की के लिए नहीं है।”
हुमा ने अपने भाषण में आगे कहा, “आज यहाँ इस मंच पर होना सिर्फ मेरे लिए नहीं, बल्कि उन सभी लड़कियों के लिए एक प्रमाण है, जिन्हें कभी कहा गया कि ये सब उनके लिए नहीं है। यह उन सभी के लिए है जो सपने देखने की हिम्मत रखती हैं और कभी हार नहीं मानतीं। धन्यवाद।”
इस पुरस्कार समारोह के दौरान हुमा की नई फिल्म 'बयान' (Bayaan) की भी स्क्रीनिंग की गई, जो बुसान फिल्म फेस्टिवल का हिस्सा है। फिल्म की कहानी राजस्थान की खूबसूरत वादियों में पृष्ठभूमि पर आधारित है और यह एक पिता-पुत्री के रिश्ते के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में हुमा एक महिला डिटेक्टिव रूही की भूमिका निभा रही हैं, जो अपने करियर के पहले केस की जांच के लिए एक छोटे शहर भेजी जाती है। यह मामला सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था से जुड़ा है जिसमें सत्ता, भ्रष्टाचार और सामाजिक जड़ें गहराई तक फैली हुई हैं। अपने पिता की पुलिस सेवा में प्रतिष्ठित विरासत को बनाए रखने की चुनौती उसके सामने है।
फिल्म में हुमा कुरैशी के साथ चंद्रचूड़ सिंह और सचिन खेड़ेकर भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। 'बयान' का निर्माण प्लाटून वन फिल्म्स के शिलादित्य बोरा, समिट स्टूडियोज़ की मधु शर्मा, कुणाल कुमार और अंशुमान सिंह ने मिलकर किया है, जबकि निर्देशन की कमान संभाली है बिकास रंजन मिश्रा ने।
इस फिल्म को अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी प्राप्त है। 'बयान' को इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल रॉटरडैम के हुबर्ट बाल्स फंड से समर्थन मिला है और इसे फिल्म इंडिपेंडेंट, लॉस एंजेलेस द्वारा संचालित ग्लोबल मीडिया मेकर्स प्रोग्राम के अंतर्गत LA Residency के दौरान विकसित किया गया।
हुमा कुरैशी की इस अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि ने एक बार फिर साबित किया है कि भारतीय कलाकार वैश्विक मंच पर अपनी सशक्त पहचान बना रहे हैं। यह पुरस्कार न सिर्फ उनकी व्यक्तिगत यात्रा की जीत है, बल्कि उन सभी महिलाओं के सपनों की जीत है जो समाज की सीमाओं को तोड़कर आगे बढ़ना चाहती हैं।














