
भारतीय समाज और न्याय व्यवस्था के इतिहास में कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं जो न सिर्फ कानून के दायरे में बहस को जन्म देती हैं, बल्कि सामाजिक चेतना को भी गहराई से झकझोर देती हैं। 'HAQ' ऐसी ही एक फिल्म के रूप में सामने आ रही है, जो शाह बानो केस की असल सच्चाई और उसकी वर्षों लंबी लड़ाई को बड़े पर्दे पर लेकर आएगी। इस फिल्म की पहली झलक अब सामने आ चुकी है और इसे देखकर साफ पता चलता है कि यह कहानी केवल एक महिला की नहीं, बल्कि उस पूरे सिस्टम की है जो अक्सर मज़हब, कानून और इंसाफ के बीच उलझ जाता है।
जंगली पिक्चर्स ने इनसोम्निया फिल्म्स और बावेजा स्टूडियोज के सहयोग से इस दमदार फिल्म की घोषणा की है, जिसमें यामी गौतम धर और इमरान हाशमी जैसे सशक्त अदाकार मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म का निर्देशन सुपर्ण एस वर्मा ने किया है, जो इससे पहले भी सामाजिक मुद्दों पर गहराई से फिल्में बना चुके हैं। 'HAQ' सिर्फ एक कानूनी लड़ाई नहीं है, बल्कि यह उस इंसानी जद्दोजहद की दास्तान है जिसमें हक़ मांगना एक अपराध बन जाता है।
जंगली पिक्चर्स हमेशा ऐसी फिल्में बनाता है जो कुछ अलग होती हैं और समाज के नियमों को चुनौती देती हैं. इनकी फिल्मों में बेबाकी और साहस होता है. 'राज़ी', 'तलवार' और 'बधाई दो' जैसी शानदार फिल्में बनाने के बाद, यह स्टूडियो एक और दिलचस्प और दमदार कहानी लेकर आया है, जो दर्शकों को जरूर पसंद आएगी.। 'HAQ' फिल्म यामी गौतम धर के लिए 'आर्टिकल 370' में उनके शानदार परफॉर्मेंस के बाद, सिनेमा में उनकी अगली बड़ी दस्तक है।
यह फिल्म मोहम्मद अहमद खान बनाम शाह बानो बेगम केस से प्रेरित है – एक ऐसा मामला जिसने 1985 में भारत के संविधान, धार्मिक स्वतंत्रता और महिलाओं के अधिकारों को लेकर तीखी बहस को जन्म दिया था। शाह बानो ने अपने अधिकारों के लिए जो लंबी और थकाऊ कानूनी लड़ाई लड़ी, वह आज भी कई लोगों के लिए प्रेरणा है, लेकिन साथ ही यह हमारे समाज की कठोर सच्चाई को भी सामने लाती है।
फिल्म का टीजर आज रिलीज कर दिया गया है और इसमें कोर्टरूम ड्रामा, भावनात्मक टकराव और सामाजिक तनाव का तीखा मिश्रण नजर आता है। यामी गौतम जहां एक मजबूत महिला के किरदार में दिख रही हैं, वहीं इमरान हाशमी एक वकील के रूप में संवेदनशीलता और प्रखरता के बीच संतुलन बनाते दिखते हैं। दोनों की जोड़ी पहली बार स्क्रीन पर साथ नजर आएगी, और पहले ही टीजर से यह स्पष्ट है कि उनकी केमिस्ट्री और संवाद अदायगी फिल्म का मजबूत पक्ष बन सकती है।
‘HAQ’ एक प्रेम कहानी के रूप में शुरू होती है और पति-पत्नी के बीच एक निजी विवाद से बढ़कर एक भड़काऊ विषय पर बहस बन जाती है, जो आज भी एक समाधान की मांग करता है। यह एक कोर्टरूम ड्रामा है, जो आस्था, पहचान, उदारवाद, व्यक्तिगत विश्वास और अंत में नीति और कानून, यानी समान नागरिक संहिता (UCC), अनुच्छेद 44 के तहत के बड़े सवालों को उजागर करती है।
‘HAQ’ 7 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। यह फिल्म सिर्फ देखने भर की नहीं, बल्कि सोचने और सवाल करने की भी है – क्या वाकई आज भी हक़ मांगना एक लंबी लड़ाई है?














