
मराठी सिनेमा की ताकत एक बार फिर बॉक्स ऑफिस पर देखने को मिल रही है, और इस बार चर्चा में है दिलीप प्रभावलकर अभिनीत फिल्म ‘दशावतार’, जो बड़ी-बड़ी फिल्मों के बीच भी अपने दम पर शानदार प्रदर्शन कर रही है। जहां एक ओर ‘बागी 4’ और ‘मिराय’ जैसी हाई बजट फिल्में मल्टीप्लेक्स में छाई हुई हैं, वहीं ‘दशावतार’ ने चुपचाप पांच दिनों में करीब 6.8 करोड़ रुपये की कमाई कर सबको चौंका दिया है।
सिनेमाघरों में जबरदस्त प्रतिस्पर्धा के बीच भी 'दशावतार' को दर्शकों का भरपूर साथ मिला है। शुक्रवार को जहां फिल्म की ओपनिंग 60 लाख रुपये रही, वहीं शनिवार और रविवार को इसमें जबरदस्त उछाल आया। शनिवार को फिल्म ने 1.4 करोड़, और रविवार को 2.4 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार किया। हालांकि सोमवार को वीकडे के चलते कलेक्शन में थोड़ी गिरावट देखी गई और फिल्म ने 1.1 करोड़ रुपये कमाए, लेकिन मंगलवार को फिर से ग्रोथ देखने को मिली।
सैकनिल्क की अर्ली ट्रेंड रिपोर्ट के अनुसार, ‘दशावतार’ ने मंगलवार यानी पांचवें दिन करीब 1.3 करोड़ रुपये की कमाई की। इससे फिल्म का कुल पांच दिनों का नेट कलेक्शन भारत में 6.8 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो किसी मराठी थ्रिलर फिल्म के लिए शानदार उपलब्धि मानी जा सकती है।
इस सफलता का एक बड़ा कारण है फिल्म की ऑक्यूपेंसी, जो खासकर मराठी बेल्ट में काफी मजबूत रही। मंगलवार को फिल्म की कुल मराठी ऑक्यूपेंसी लगभग 45.95% रही, जबकि शाम के शो में 50% और रात के शो में यह आंकड़ा 78.23% तक पहुंच गया। इतने मजबूत ऑक्यूपेंसी नंबर किसी भी रीजनल फिल्म के लिए संकेत हैं कि वर्ड ऑफ माउथ पॉजिटिव है और फिल्म लंबी रेस की खिलाड़ी बन सकती है।
फिल्म की कहानी भी दर्शकों को बांधे रखने में सफल रही है। सुबोध खानोलकर के निर्देशन में बनी यह फिल्म पारंपरिक 'दशावतार' लोकनाट्य कला की पृष्ठभूमि में एक रहस्यपूर्ण और सांस्कृतिक यात्रा कराती है। दिलीप प्रभावलकर ने बाबुली मेस्त्री का किरदार निभाया है, जो कोंकण के एक लोक कलाकार हैं और विष्णु के दस अवतारों की परंपरा को सहेजने की कोशिश करते हैं।
फिल्म में दिलीप प्रभावलकर के अलावा महेश मांजरेकर, सिद्धार्थ मेनन, प्रियदर्शनी इंदलकर, भरत जाधव, अभिनय बेर्डे, रवि काले, विजय केनकरे, सुनील तावड़े और आरती वडगबलकर जैसे दिग्गज कलाकारों ने अहम भूमिकाएं निभाई हैं।
‘दशावतार’ की यह सफलता दिखाती है कि अगर कंटेंट मजबूत हो, तो बजट और स्केल मायने नहीं रखते। दर्शक आज भी अच्छी कहानी, सजीव अभिनय और सांस्कृतिक जुड़ाव वाले सिनेमा को हाथों-हाथ लेते हैं। आने वाले दिनों में अगर फिल्म इसी गति से कलेक्शन जारी रखती है, तो यह मराठी सिनेमा के लिए एक नया बेंचमार्क साबित हो सकती है।














