
बॉलीवुड में कुछ चेहरे ऐसे होते हैं जो भले ही लंबे वक्त तक परदे से गायब रहें, लेकिन उनके निभाए किरदार लोगों के ज़ेहन में हमेशा जिंदा रहते हैं। ऐसा ही एक चेहरा है रजत बेदी का, जिन्होंने साल 2003 में फिल्म 'कोई मिल गया' में 'राज सक्सेना' का किरदार निभाकर जबरदस्त पहचान बनाई थी। अब पूरे 25 साल बाद, रजत बेदी एक बार फिर स्क्रीन पर वापसी कर रहे हैं, और वो भी किसी मामूली प्रोजेक्ट से नहीं, बल्कि शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की डेब्यू वेब सीरीज 'The Bastards of Bollywood' से।
आर्यन खान की सीरीज से दमदार वापसी
नेटफ्लिक्स पर आने वाली इस सीरीज को लेकर पहले से ही खूब चर्चा है, लेकिन जब इस प्रोजेक्ट से रजत बेदी की वापसी की खबर सामने आई, तो फैंस के बीच उत्साह दोगुना हो गया। बताया जा रहा है कि इस शो में रजत एक बार फिर 'राज सक्सेना' जैसे ग्रे किरदार में दिखाई देंगे — यानी एक बार फिर विलेन का जलवा देखने को मिलेगा।
राघव जुयाल, बॉबी देओल और मोना सिंह जैसे कलाकारों के साथ उनकी स्क्रीन प्रेजेंस देखना दिलचस्प होगा। खास बात यह है कि रजत का किरदार शो में काफी महत्वपूर्ण है, और उनकी एंट्री एक बड़े ट्विस्ट के साथ होगी।
लुक में आया जबरदस्त बदलाव
रजत बेदी अब 55 साल के हो चुके हैं। इतने सालों में उन्होंने न सिर्फ इंडस्ट्री से दूरी बनाई, बल्कि खुद को भी काफी बदल लिया है। अब उनका लुक और पर्सनैलिटी पहले से कहीं ज्यादा मैच्योर और शार्प नजर आ रही है। फैंस सोशल मीडिया पर उनके बदलाव पर हैरानी जता रहे हैं और उनकी तारीफ कर रहे हैं।
क्यों छोड़ दी थी बॉलीवुड की दुनिया?
रजत बेदी ने 90 के दशक के अंत और 2000 के दशक की शुरुआत में कई यादगार फिल्मों में काम किया था — जैसे 'इंटरनेशनल खिलाड़ी', 'जानी दुश्मन', 'कोई मिल गया', 'पार्टनर', और 'चोर मचाए शोर'। लेकिन 'कोई मिल गया' के बाद उनका करियर ग्राफ अचानक गिर गया।
खबरों की मानें तो इस फिल्म में उनके कई सीन काट दिए गए थे और उन्हें प्रमोशन में भी जगह नहीं दी गई, जिससे वो निराश होकर साल 2006 में कनाडा शिफ्ट हो गए। वहाँ उन्होंने रियल एस्टेट का कारोबार शुरू किया और फिल्मों से पूरी तरह दूरी बना ली।

साहित्य और सिनेमा जगत से जुड़ा है परिवार
रजत का परिवार साहित्य और सिनेमा जगत से जुड़ा हुआ रहा है। रजत के दादा राजिन्दर सिंह बेदी हिन्दी साहित्य जगत के नामचीन सितारे रहे हैं। उन्होंने कई साहित्यिक रचनाएँ लिखीं जिनमें एक चादर मैली सी ने सर्वाधिक लोकप्रियता पाई थी। बाद में इस पर इसी नाम से एक फिल्म भी बनी जिसमें हेमा मालिनी के साथ ऋषिकपूर, पूनम ढिल्लो और कुलभूषण खरबंदा ने मुख्य भूमिकाएँ निभाई थीं। राजिन्दर सिंह बेदी ने यह उपन्यास उर्दू भाषा में 60 के दशक में लिखा था और इसके लिए उन्होंने 1965 में राजिन्दर सिंह बेदी को साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
वहीं दूसरी ओर उनके पिता नरेन्द्र बेदी फिल्म उद्योग के जाने माने लेखक और निर्देशक रहे हैं। अपने समय में नरेन्द्र बेदी ने फिरोज खान और डैनी को लेकर खोटे सिक्के नामक फिल्म का निर्देशन किया था। यह फिल्म आज हिन्दी सिनेमा की कल्ट क्लासिक फिल्म का दर्जा रखती है। इसके अतिरिक्त नरेन्द्र सिंह बेदी ने रणधीर कपूर और जया भादुड़ी को लेकर 'जवानी दीवानी', अमिताभ बच्चन, वहीदा रहमान, नीतू कपूर को लेकर 'अदालत' जैसी फिल्मों का निर्देशन किया। ऐसे में रजत की जड़ें सिनेमा और साहित्य दोनों में गहराई से जुड़ी हैं।
'The Bastards of Bollywood' आर्यन खान की बतौर क्रिएटर पहली वेब सीरीज है, और यह प्रोजेक्ट अपने कंटेंट, स्टारकास्ट और निर्माण के लिहाज़ से काफी बड़ा माना जा रहा है। रजत बेदी की वापसी इस सीरीज के लिए न सिर्फ एक नॉस्टेल्जिक कनेक्शन है, बल्कि एक नए आश्चर्यजनक किरदार की भी शुरुआत हो सकती है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या रजत इस सीरीज से एक नई पारी शुरू कर पाएंगे और क्या वो पुराने दिनों की चमक को वापस ला पाएंगे?














