
बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता और पटौदी खानदान के नवाब, सैफ अली खान, ने हाल ही में अपने करियर की शुरुआती चुनौतियों पर खुलकर बातचीत की। नवाबों के परिवार से आने के बावजूद सैफ को फिल्मों की दुनिया में आसान सफर नहीं मिला। हालिया इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में उन्हें एक हफ्ते के लिए सिर्फ 1000 रुपये मिलते थे, और यह रकम मिलने के पीछे एक अजीब शर्त भी थी। आइए जानते हैं क्या थी वह शर्त और सैफ ने अपने शुरुआती संघर्ष कैसे संभाले।
हजार रुपये और अजीब शर्त
सैफ अली खान ने सिर्फ 21 साल की उम्र में अमृता सिंह से शादी कर ली थी। 25 साल की उम्र में उनके कंधों पर पिता होने की जिम्मेदारी भी थी। ऐसे में शुरुआती दिनों में आर्थिक दबाव उनके लिए और भी चुनौतीपूर्ण था। स्क्वायर इंडिया के साथ हुए इंटरव्यू में सैफ ने बताया कि एक समय पर उन्हें किसी फिल्म के लिए सिर्फ हफ्ते के 1000 रुपये मिलते थे। लेकिन इन पैसे के साथ प्रोड्यूसर ने एक अजीब शर्त रखी थी – सैफ को हर भुगतान के समय प्रोड्यूसर के गाल पर दस बार किस करना था।
सेकंड लीड के रूप में करियर की शुरुआत
सैफ ने बताया कि लोग अक्सर मान लेते थे कि पटौदी खानदान से होने की वजह से उनकी फिल्मी जर्नी बहुत आसान रही होगी। लेकिन वास्तविकता कुछ और ही थी। शुरुआती दौर में उन्हें ज्यादातर सेकंड या थर्ड लीड के रोल ही मिलते थे। ऐसी फिल्में मिलीं, जिन्हें शायद आज कोई याद भी नहीं करता। सैफ ने कहा कि शुरुआती फिल्मों में उन्होंने कई बार सेकंड लीड के तौर पर काम किया और कुछ फिल्में अच्छी भी थीं, जिसकी वजह से उन्होंने संघर्ष जारी रखा।
असफलताओं और बेकार फिल्में
सैफ ने बताया कि एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें लगातार औसत दर्जे की फिल्में मिलती रहीं। लोग उन्हें कहते थे कि वह खुशकिस्मत हैं क्योंकि उन्हें इतने मौके मिल रहे हैं, लेकिन सैफ इस बात से सहमत नहीं थे। उनका मानना था कि उन्हें बेस्ट फिल्में ऑफर नहीं हो रही थीं और ना ही लीड रोल के अवसर मिल रहे थे।
नेट प्रैक्टिस का दौर
सैफ ने अपने करियर के शुरुआती सालों को ‘नेट प्रैक्टिस’ का दौर बताया। 1990 के दशक में उन्होंने फिल्मों में जो भी गलतियां कीं, उनसे बहुत कुछ सीखा। हाल ही में सैफ ने अपने करियर के पहले दो दशकों की हर फिल्म को यूट्यूब पर फिर से देखा, ताकि समझ सकें कि अपनी गलतियों से सीखकर उन्होंने अब तक कितनी प्रगति की है।














