सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान भक्त शिवलिंग पर जल अर्पित कर भोलेनाथ की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव को जल चढ़ाने से उनकी कृपा प्राप्त होती है और भक्त की मनोकामना पूरी होने की कामना की जाती है। शिव को शीघ्र प्रसन्न होने वाला देवता माना जाता है, इसलिए उन्हें भोलेनाथ भी कहा जाता है।
शिवलिंग पर जल चढ़ाने को लेकर अलग-अलग धार्मिक विधियां और मान्यताएं प्रचलित हैं। इन्हीं में पांच ऐसे तरीके बताए गए हैं, जिनके अनुसार भक्त जलाभिषेक कर सकते हैं। मान्यता है कि विधि के अनुसार अभिषेक करने से व्यक्ति को सुख-शांति, समृद्धि और कार्यों में सफलता का आशीर्वाद मिल सकता है।
1. सीधे शिवलिंग पर जल अर्पित करना
जलाभिषेक की सबसे सरल विधि में भक्त जल लेकर सीधे शिवलिंग पर अर्पित करता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव को जल चढ़ाने से उनकी कृपा प्राप्त होती है और जीवन के कष्टों से मुक्ति की कामना की जाती है। श्रद्धालु इस दौरान अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना भी करते हैं।
2. दक्षिण दिशा में बैठकर उत्तर की ओर करें जलाभिषेक
दूसरी विधि में जल चढ़ाते समय दिशा का विशेष ध्यान रखने की बात कही गई है। इसके अनुसार भक्त को जलाधारी से जिस दिशा में जल बाहर बहता है, उसके विपरीत यानी दक्षिण दिशा की ओर बैठना या खड़ा होना चाहिए। इसके बाद उत्तर दिशा की ओर मुख करके शिवलिंग पर जल अर्पित करने की मान्यता है।
धार्मिक विश्वास के अनुसार, इस तरह जलाभिषेक करने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से मुक्ति और रोगों पर विजय की कामना पूरी हो सकती है।
3. अशोक सुंदरी के स्थान से शिवलिंग तक जल चढ़ाएं
जलाभिषेक की तीसरी विधि में जल की धारा को जलाधारी में स्थित माता अशोक सुंदरी के स्थान से शुरू करके धीरे-धीरे शिवलिंग तक ले जाने की बात कही गई है। मान्यता है कि इस तरह अभिषेक करने से कार्यों में सफलता मिलती है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, जलाधारी के बीच में जहां से अभिषेक का जल बाहर निकलता है, उसी क्षेत्र में माता अशोक सुंदरी का स्थान माना जाता है।
4. एक लोटे से पांच स्थानों पर चढ़ाएं जल
चौथी विधि में एक ही लोटे के जल का क्रम से पांच स्थानों पर इस्तेमाल करने की बात कही गई है। इसमें सबसे पहले भगवान गणेश को जल अर्पित किया जाता है। इसके बाद भगवान कार्तिकेय, फिर माता अशोक सुंदरी, मुख्य जलाधारी और अंत में शिवलिंग पर जल चढ़ाने की मान्यता बताई गई है।
इस विधि में पांचों स्थानों पर क्रम बनाए रखने को महत्वपूर्ण माना गया है।
5. ऊपर लटकी जलाधारी से करें अभिषेक
पांचवीं विधि में शिवलिंग के ऊपर स्थापित जलाधारी या मटकी का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अनुसार पहले ऊपर लगी जलाधारी में पानी भरा जाता है, जिससे पानी बूंद-बूंद करके शिवलिंग पर गिरता रहता है।
इसके बाद जलाधारी में बचा हुआ पानी माता अशोक सुंदरी के स्थान पर और अंत में शिवलिंग पर अर्पित करने की बात कही गई है। धार्मिक मान्यताओं में इस तरह के अभिषेक को मनोकामना या किसी विशेष कार्य की सफलता की कामना से जोड़ा गया है।
धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं ये विधियां
शिवलिंग पर जल चढ़ाने की ये विधियां धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी हैं। सावन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा-अर्चना करते हैं। इन विधियों के बारे में मान्यता है कि इनके पालन से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि की कामना पूरी होती है।













