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धीरेंद्र शास्त्री के मांसाहार वाले बयान पर विवाद, पहले भी इन मुद्दों को लेकर घिर चुके हैं बागेश्वर बाबा

धीरेंद्र शास्त्री के मांसाहार वाले बयान पर बंगाल में विवाद बढ़ा। कांग्रेस ने पुलिस शिकायत और FIR की मांग की। जानिए उनके पुराने विवादों की पूरी टाइमलाइन।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Wed, 09 Sep 2026 4:44:38

धीरेंद्र शास्त्री के मांसाहार वाले बयान पर विवाद, पहले भी इन मुद्दों को लेकर घिर चुके हैं बागेश्वर बाबा

बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री एक बार फिर अपने बयान को लेकर विवादों में हैं। दुर्गापूजा से पहले पश्चिम बंगाल में मांसाहारी भोजन को लेकर उनकी टिप्पणी पर राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई है। पश्चिम बंगाल कांग्रेस ने उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए माफी की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि उनके बयान से बंगाली समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं।

धीरेंद्र शास्त्री, जिन्हें बागेश्वर बाबा के नाम से भी जाना जाता है, ने दुर्गापूजा के दौरान बंगालियों से मांसाहारी भोजन छोड़ने की अपील की थी। उन्होंने धार्मिक अवसर पर मांस खाने वाले लोगों को ‘पाखंडी’ बताया था। इसी टिप्पणी के बाद राज्य में राजनीतिक विवाद शुरू हो गया।

कांग्रेस ने पुलिस से की कार्रवाई की मांग

वरिष्ठ कांग्रेस नेता मनाश सरकार ने धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने शास्त्री से माफी मांगने की मांग करते हुए सवाल उठाया कि कोई बाहरी व्यक्ति बंगाल के लोगों को उनके खान-पान को लेकर निर्देश कैसे दे सकता है।

मनाश सरकार ने कहा कि शास्त्री ने बंगालियों के मछली, मटन और चिकन खाने पर सवाल उठाया और उन्हें ‘पाखंडी’ कहा। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या बीजेपी नेता धीरेंद्र शास्त्री की इस टिप्पणी का समर्थन करते हैं।

दक्षिण कोलकाता जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रदीप प्रसाद ने भी शिकायत देकर FIR दर्ज करने की मांग की। उनका कहना है कि यदि धीरेंद्र शास्त्री की कही बातें रिपोर्ट के अनुसार हैं, तो उन्हें बंगाली समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणी माना जाना चाहिए।

कांग्रेस ने दुर्गापूजा की परंपरा का दिया हवाला

कांग्रेस ने कहा कि दुर्गापूजा पश्चिम बंगाल के सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पार्टी के अनुसार, इस त्योहार के साथ खान-पान से जुड़ी पुरानी परंपराएं भी जुड़ी हुई हैं।

कांग्रेस का आरोप है कि बंगाल की खाद्य परंपराओं पर किसी बाहरी व्यक्ति की ओर से निर्देशात्मक या अपमानजनक टिप्पणी सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकती है। इसी आधार पर पार्टी ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की है।

बीजेपी ने भी बयान से बनाई दूरी

विवाद सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने भी धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी से दूरी बनाई। उन्होंने कहा कि बंगाल में मछली और मांस खाना परंपरा का हिस्सा है।

समिक भट्टाचार्य ने बंगाल की दुर्गापूजा परंपरा का उदाहरण देते हुए कहा कि अष्टमी के दिन बंगाली लुची खाते हैं, जबकि नवमी पर ‘कोची पाठा’ यानी मांस खाने की परंपरा है।

राज्य मंत्री दिलीप घोष ने भी दुर्गापूजा के दौरान मांसाहारी भोजन को लेकर किसी विवाद से इनकार किया। उन्होंने कहा कि बंगाल में दुर्गापूजा के दौरान बकरे की बलि की परंपरा रही है और उसके मांस को प्रसाद के रूप में खाया जाता है।

संत तुकाराम पर टिप्पणी को लेकर भी हुआ था विवाद

धीरेंद्र शास्त्री के बयानों को लेकर इससे पहले भी कई विवाद सामने आ चुके हैं। मार्च 2023 में संत तुकाराम महाराज की पत्नी को लेकर उनकी टिप्पणी पर महाराष्ट्र में विरोध हुआ था।

रिपोर्टों के मुताबिक, शास्त्री ने कहा था कि संत तुकाराम की पत्नी उन्हें रोज मारती थीं। बाद में उन्होंने इस बयान के लिए माफी मांगी और संत तुकाराम को महान संत बताते हुए कहा कि वह उनके आदर्श हैं।

इसी विवाद के दौरान महाराष्ट्र कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने मीरा रोड में होने वाले धीरेंद्र शास्त्री के कार्यक्रम का विरोध किया था। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को पत्र लिखकर 18 और 19 मार्च 2023 के कार्यक्रम को अनुमति नहीं देने की मांग की थी।

नागपुर के कार्यक्रम पर लगे थे अंधविश्वास फैलाने के आरोप

2023 में ही धीरेंद्र शास्त्री के नागपुर कार्यक्रम को लेकर भी विवाद हुआ था। अखिल भारतीय अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के श्याम मानव ने उनके कार्यक्रमों में ‘दिव्य दरबार’ और ‘प्रेत दरबार’ के जरिए अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाया था। इस मामले में पुलिस से शिकायत भी की गई थी।

हालांकि, नागपुर पुलिस की जांच के बाद कहा गया था कि ऐसा कुछ नहीं मिला जिसे महाराष्ट्र के ब्लैक मैजिक एक्ट के तहत अपराध माना जाए। इसके बाद नाना पटोले ने मुंबई कार्यक्रम के विरोध में लिखे पत्र में अंधविश्वास का मुद्दा भी उठाया था।

कुंभलगढ़ और हिंदू राष्ट्र वाले बयान पर मामला

मार्च 2023 में उदयपुर के हाथीपोल थाने में धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ मामला दर्ज होने की खबर भी सामने आई थी। आरोप था कि एक धर्मसभा में उन्होंने कुंभलगढ़ किले को लेकर विवादित टिप्पणी की और भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की बात कही।

साईं बाबा पर टिप्पणी के बाद पुलिस में शिकायत

इसके बाद साईं बाबा को लेकर धीरेंद्र शास्त्री का बयान भी विवाद का कारण बना। वीडियो के हवाले से आई रिपोर्टों में बताया गया कि उन्होंने साईं बाबा को संत या फकीर तो माना, लेकिन भगवान मानने से इनकार किया था। इसी दौरान उन्होंने ‘गीदड़ की खाल पहनकर कोई शेर नहीं बन सकता’ जैसी टिप्पणी भी की।

इस बयान के खिलाफ मुंबई पुलिस में शिकायत की गई थी। शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट की युवा सेना से जुड़े राहुल नारायण कनाल ने बांद्रा पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी।

बुर्के वाले बयान पर भी हुआ था विरोध

अगस्त 2025 में धीरेंद्र शास्त्री के बुर्के को लेकर दिए गए बयान पर भी कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया आई थी। इंदौर की कांग्रेस पार्षद रुबीना इकबाल खान ने उनकी टिप्पणी की आलोचना करते हुए माफी की मांग की थी।

उन्होंने ऐसे बयानों को समाज में नफरत फैलाने वाला बताया था और इस तरह के मामलों में अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की चुप्पी पर भी सवाल उठाए थे।

शिवाजी महाराज पर टिप्पणी के बाद मांगी थी माफी

अप्रैल 2026 में नागपुर के एक कार्यक्रम में धीरेंद्र शास्त्री ने छत्रपति शिवाजी महाराज और समर्थ रामदास से जुड़ा एक प्रसंग सुनाया था। उनके मुताबिक, लगातार युद्ध से थकने के बाद शिवाजी महाराज ने अपनी जिम्मेदारियों से हटने की इच्छा जताई थी और अपना मुकुट समर्थ रामदास के चरणों में रख दिया था। शास्त्री के कथन के अनुसार, समर्थ रामदास ने मुकुट वापस रखकर उन्हें शासन जारी रखने के लिए कहा।

इस बयान पर महाराष्ट्र में राजनीतिक विवाद हुआ। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने इसे आपत्तिजनक बताते हुए आरोप लगाया कि शिवाजी महाराज के इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया।

विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। उन्होंने कहा था कि उनकी बात को गलत समझा गया और उनका उद्देश्य शिवाजी महाराज का अपमान करना नहीं था।

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