रक्षाबंधन के त्योहार को लेकर इस बार तिथि और भद्रा को लेकर विशेष स्थिति बनी है। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 28 अगस्त की सुबह तक रहने के कारण उदया तिथि के आधार पर आज रक्षाबंधन मनाया जा रहा है। खास बात यह है कि आज भद्रा का समय नहीं है और भारत में चंद्रग्रहण भी दिखाई नहीं देगा। ऐसे में बहनें आज भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं।
रक्षाबंधन पर बहनें भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर उसके सुख और उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हैं। इसके साथ ही भाई भी बहन की रक्षा और उसके प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का संकल्प लेते हैं।
सुबह इस समय से शुरू हो सकता है राखी बांधने का सिलसिला
ज्योतिषाचार्य पं. शरद चंद मिश्र के अनुसार, हृषिकेश पंचांग में 28 अगस्त को सूर्योदय सुबह 5:41 बजे बताया गया है। पूर्णिमा तिथि का मान सुबह 9:18 बजे तक रहने की जानकारी दी गई है। शतभिषा नक्षत्र पूरे दिन और अगले दिन रात 4:01 बजे तक रहने का उल्लेख है।
उनके अनुसार, सुबह 5:41 बजे के बाद से 9:18 बजे के बीच रक्षाबंधन किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि ऐसे अवसर पर अपराह्न तिथि को भी महत्व दिया जाता है और तिथि दो दिनों में पड़ने की स्थिति में पूर्वा तथा परा, दोनों का विचार किया जाता है।
भद्रा को लेकर क्यों रखा जाता है ध्यान?
रक्षाबंधन के समय भद्रा को महत्वपूर्ण माना जाता है। ज्योतिषाचार्य पं. शरद चंद मिश्र ने बताया कि यदि रक्षाबंधन के दिन भद्रा हो तो उसका परित्याग करना चाहिए। उनके अनुसार, भद्रा में श्रावणी और फाल्गुनी दोनों वर्जित मानी गई हैं।
उन्होंने बताया कि मान्यता के अनुसार श्रावणी से राजा और फाल्गुनी से प्रजा के लिए अनिष्ट माना जाता है। इस बार 28 अगस्त को भद्रा नहीं होने के कारण रक्षाबंधन के लिए यह बाधा नहीं है।
27 अगस्त को शुरू हुई थी पूर्णिमा
इस बार श्रावण पूर्णिमा की शुरुआत 27 अगस्त को सुबह 9:08 बजे हुई थी। संदर्भ के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 28 अगस्त की सुबह 9:47 बजे समाप्त होगी। 27 अगस्त को पूर्णिमा के साथ भद्रा भी शुरू हुई थी, जो रात 9:27 बजे तक रही।
इसी वजह से रक्षाबंधन के लिए तिथि और भद्रा के समय का विशेष ध्यान रखा गया है।
भारत में चंद्रग्रहण दिखाई नहीं देगा
28 अगस्त को खंडग्रास यानी आंशिक चंद्रग्रहण होने की जानकारी दी गई है। हालांकि यह ग्रहण भारत के किसी भी हिस्से में दिखाई नहीं देगा। इसलिए दिए गए ज्योतिषीय संदर्भ के अनुसार भारत में इस ग्रहण का प्रभाव मान्य नहीं होगा और सूतक भी नहीं लगेगा।
इसका मतलब यह है कि भारत में रक्षाबंधन के पर्व पर चंद्रग्रहण को लेकर अलग से कोई बाधा नहीं मानी जा रही है। जिन देशों में ग्रहण दिखाई देगा, वहां उसके प्रभाव को मानने की बात संदर्भ सामग्री में कही गई है।
रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के बीच राखी बांधने का पर्व नहीं है। इस अवसर पर बहन भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती है, जो प्रेम, विश्वास और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी के रिश्ते का प्रतीक माना जाता है।













